खबर लहरिया Hindi Bihar News: मसौढ़ी के वार्ड-1 में तीन साल से नल का कनेक्शन, लेकिन एक बूंद पानी नहीं

Bihar News: मसौढ़ी के वार्ड-1 में तीन साल से नल का कनेक्शन, लेकिन एक बूंद पानी नहीं

पटना जिले के मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड संख्या-1 में वर्ष 2023 में हर घर नल जल योजना के तहत घर-घर कनेक्शन दिया गया था। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी करीब 10 से 15 घरों में आज तक पानी नहीं पहुंचा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत और मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जबकि नगर परिषद का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली।

मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड संख्या-1 में नल जल योजना के तहत 2023 में लगी टंकी (फोटो साभार: सुमन)

रिपोर्ट – सुमन, लेखन – सुचित्रा 

‘हर घर नल का जल’ योजना क्या है?

‘हर घर नल का जल’ योजना बिहार सरकार की योजना है। यह योजना वर्ष 2016-17 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के हर घर तक पाइप से स्वच्छ पानी पहुँचाना था ताकि लोगों को हैंडपंप या दूसरे स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े। इस योजना के तहत घरों में नल का कनेक्शन दिया जाता है।

तीन साल से पानी का इंतजार

सरकार के इस योजना के दावे जमीनी स्तर पर सफल नहीं हुए। मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड संख्या-1 के कुछ परिवारों का कहना है कि उनके घरों में केवल नल लगाया गया, पानी आज तक नहीं पहुंचा।

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2023 में पूरे इलाके में नल जल योजना के तहत कनेक्शन दिए गए थे। अधिकांश घरों में पानी पहुंच रहा है, लेकिन इसी गली के लगभग 10 से 15 घर आज भी पानी से वंचित हैं। पिछले महीने नगर परिषद की ओर से एक मिस्त्री पाइपलाइन की मरम्मत करने आया था। कुछ पाइप बदले भी गए, लेकिन उसके बाद भी उनके घरों में पानी नहीं पहुंचा।

मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड संख्या-1 में नल जल योजना के तहत 2023 में लगी टंकी (फोटो साभार: सुमन)

गुड़िया कुमारी का कहना है कि उनके इलाके में बिछाई गई पाइपलाइन पतली है। यदि मोटी पाइपलाइन होती तो संभव है कि पानी उनके घरों तक भी पहुंच जाता।

पानी न आने से महिलाओं की सेहत पर भी असर

स्थानीय निवासी रूपा कुमारी बताती हैं कि उनके घर में नल तो लगा है, लेकिन उसमें कभी पानी नहीं आया। परिवार में करीब 15 से 20 सदस्य रहते हैं जिसकी वजह से पानी की जरूरत भी ज्यादा होती है और घर का अधिकांश काम उन्हें ही करना पड़ता है। उनका कहना है कि अगर नल से पानी मिलने लगे तो घर का काम काफी आसान हो जाएगा।

वहीं रूपम कुमारी बताती हैं कि मजबूरी में लोगों ने कर्ज लेकर अपने घरों में पुराने हैंडपंप लगवाए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में “कल” कहा जाता है। सुबह खाना बनाने, नहाने, कपड़े धोने और पशुओं के लिए बड़ी मात्रा में पानी चाहिए होता है। बार-बार हैंडपंप चलाने से हाथ और कमर में दर्द होने लगता है, लेकिन दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

गुड्डी कुमारी का कहना है कि समस्या केवल उनके घर की नहीं बल्कि पूरी गली की है। छह से अधिक घरों में पानी नहीं आता और हर घर में 8 से 15 सदस्य रहते हैं। गर्मी के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। कुछ परिवारों को पड़ोसियों के घरों से पानी लाना पड़ता है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि उनके घरों का कनेक्शन कुएं के पास बनी एक टंकी से किया गया है। उनका मानना है कि यदि उनके घरों के पास स्थित दूसरी टंकी से कनेक्शन जोड़ दिया जाए तो पानी आसानी से पहुंच सकता है।

पानी नहीं, फिर भी पानी का टैक्स

महिलाओं का आरोप है कि नगर परिषद उनसे हाउस टैक्स के साथ पानी का शुल्क भी वसूल रही है। किसी के पास दो हजार रुपये तो किसी के पास ढाई हजार रुपये तक का बकाया आया। एक महिला ने बताया कि उन्होंने लगभग ढाई हजार रुपये पानी शुल्क के रूप में जमा किए हैं, जबकि दूसरे परिवारों के पास चार हजार रुपये तक का बिल आया है।

गुस्से में महिलाओं ने कहा कि अगर सरकार पानी नहीं दे सकती तो लगाए गए नल उखाड़कर ले जाए। उनका कहना है कि जब सुविधा ही नहीं मिल रही तो केवल बिल वसूलना उचित नहीं है।

मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड संख्या-1 में नल जल योजना के तहत 2023 में लगी टंकी (फोटो साभार: सुमन)

जिनके घर कनेक्शन नहीं लगा, वे भी परेशान

रास्ते से गुजर रही पुष्पा देवी ने बताया कि वह दूसरे घरों से पानी लाती हैं। जब जिनके घर कनेक्शन लगा है उन्हें भी पानी नहीं मिल रहा, तब उन्हें लगता है कि शायद कनेक्शन नहीं लगना ही बेहतर रहा। अब वे कर्ज लेकर अपने घर में समरसेबल लगाने की योजना बना रही हैं।

जनप्रतिनिधियों से शिकायत, फिर भी समाधान नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार वार्ड सदस्य साबुजा कुमारी से शिकायत की। नगर परिषद की अध्यक्ष पिंकी देवी के प्रतिनिधि शंभू सिंह से भी कई बार मिलकर समस्या बताई गई। लोगों का आरोप है कि हर बार जल्द समाधान का आश्वासन मिला, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

कुछ लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर इस बार भी समस्या दूर नहीं हुई तो वे चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।

नगर परिषद ने कहा दोबारा शिकायत करें

नगर परिषद के मिस्त्री सिकंदर ने बताया कि पिछले महीने वार्ड संख्या-1 के दही भट्ट इलाके में टूटी पाइपलाइन बदली गई थी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के निर्देश पर ही मरम्मत का काम किया जाता है। उस समय स्थानीय लोगों ने बताया था कि पानी मिलने लगा है। यदि अब फिर समस्या है तो लोगों को दोबारा नगर परिषद में शिकायत करनी होगी, जिसके बाद आदेश मिलने पर वे जाकर जांच करेंगे।

नगर प्रबंधक का पक्ष

नगर परिषद मसौढ़ी के नगर प्रबंधक शेखर कुमार प्रसाद ने कहा कि वार्ड संख्या-1 में किसी प्रकार की पानी की सप्लाई की शिकायत उनके पास नहीं आई है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों ने नगर परिषद में आवेदन दिया होता तो समस्या का समाधान कराया जाता।

उन्होंने बताया कि नगर परिषद ने शिकायत दर्ज कराने के लिए एक टोल-फ्री नंबर 1800 102 7559 जारी किया है। इस नंबर पर शिकायत मिलने के बाद टीम मौके पर जाकर जांच करती है। उनके अनुसार, छोटी खराबी एक-दो घंटे या एक दिन में ठीक हो सकती है, जबकि बड़ी तकनीकी समस्या या नई पाइपलाइन बिछाने की जरूरत होने पर अधिक समय लग सकता है।

लोगों की मांग

वार्ड संख्या-1 के प्रभावित परिवारों की मांग है कि नगर परिषद जल्दी जांच करे कि पानी नहीं आने की असली वजह क्या है और उसे दूर करे। तीन साल से बंद पड़े नल जल कनेक्शन को चालू करे। लोगों का कहना है कि जब योजना के तहत कनेक्शन दिया गया है और पानी का शुल्क भी लिया जा रहा है, तो हर घर तक नियमित रूप से पानी पहुंचाया जाए।

पानी लोगों की बुनियादी जरूरत होती है जिससे लोगों को जीवन मिलता है, घर के काम और लोगों का स्वास्थ्य सभी इसी से जुड़े होते है। ऐसे में सवाल है कि क्या योजनाओं की सफलता सिर्फ कागजों और रिपोर्टों से तय होगी या फिर उस दिन मानी जाएगी जब हर घर के नल से वास्तव में पानी निकलेगा?

 

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