खबर लहरिया Hindi Bolenge Bulwayenge: क्या हमारे आशीर्वाद भी बेटे-बेटी में भेद करते हैं?

Bolenge Bulwayenge: क्या हमारे आशीर्वाद भी बेटे-बेटी में भेद करते हैं?

“दूधो नहाओ, पूतों फलो” — यह आशीर्वाद हम बचपन से सुनते आए हैं। शादी-ब्याह हो, कोई शुभ काम हो या घर में नई बहू आए, बड़े-बुज़ुर्ग अक्सर यही शुभकामना देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस आशीर्वाद में बेटों की कामना तो है, लेकिन बेटियों का ज़िक्र क्यों नहीं? क्या यह सिर्फ एक पुरानी कहावत है या उस दौर की सोच का हिस्सा है, जब बेटे को वंश चलाने वाला और बेटी को “पराया धन” माना जाता था? देखिए पूरा शो और बताइए कि आप इस आशीर्वाद के बारे में क्या सोचते हैं।

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