खबर लहरिया Blog Noida Engineer’s Death: नोएडा इंजीनियर की मौत का मामला, जानिए अब तक की पूरी जानकारी 

Noida Engineer’s Death: नोएडा इंजीनियर की मौत का मामला, जानिए अब तक की पूरी जानकारी 

 

आरोप लगाया है कि ठंड, घना कोहरा और निर्माण स्थल पर लोहे की छड़ों की मौजूदगी के कारण बचावकर्मी शुरू में पानी में उतरने से हिचकिचा रहे थे। मोनिंदर ने बताया है कि वह रात करीब 1:45 बजे मौके पर पहुंचा। युवराज कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च दिखाते हुए मदद की गुहार लगा रहे थे,लेकिन कोई अंदर नहीं गया।

युवराज मेहता                           

नोएडा सेक्टर-150 में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर पूरे दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था, ड्रेनेज सिस्टम और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुग्राम से घर लौटते वक्त घने कोहरे में उनकी कार एक ऐसे गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी जहां न बैरिकेडिंग थी और न कोई चेतावनी बोर्ड। सवाल यह है कि जब सड़क किनारे इतना खतरनाक निर्माण स्थल मौजूद था तो सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? और जब एक युवक घंटों तक मदद की गुहार लगाता रहा तो रेस्क्यू सिस्टम क्यों नाकाम साबित हुआ? इस मामले पर जानते हैं पूरा घटना क्रम और अब तक की खबरें। 

घटना का विवरण 

16-17 जनवरी 2026 की रात पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर नोएडा सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी लौट रहे थे। उस समय कोहरा बहुत घना था और सड़क पर स्पष्टता से कुछ नहीं दिख पा रहा था। अंधेरे रास्ते पर युवराज को यह साफ़ नहीं दिख पाया कि सड़क सीधी जाती है या मुड़ती है। इसी भ्रम में उनकी कार सड़क के साथ मुड़ने के बजाय दीवार तोड़ते हुए एक मॉल के निर्माणाधीन बेसमेंट में जा गिरी। बेसमेंट में पानी भरा हुआ था जिससे कार डूबने लगी।

हादसे के बाद युवराज ने कई कोशिशें कीं और रात करीब 12 बजे अपने पिता को फोन कर जान बचाने की गुहार लगाई। पिता तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उनके अनुसार 112 पर कॉल करने के करीब 20 मिनट बाद पुलिस पहुंची और फिर दमकल विभाग की टीम आई। युवराज के पिता का कहना है कि रेस्क्यू के नाम पर अधूरी कोशिश की गई। हाइड्रोलिक मशीन का इस्तेमाल तो किया गया लेकिन रस्सी उनके बेटे तक नहीं पहुंच पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी में डूबने की जानकारी होने के बावजूद मौके पर कोई प्रशिक्षित तैराक मौजूद नहीं था जो अंदर उतरकर युवराज को बचा सकता।

डिलीवरी एजेंट मोनिंदर का बयान आया सामने 

NDTV की रिपोर्टिंग के अनुसार इस हादसे के बाद उन्हें बचाने की कोशिश करने वाले डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने आरोप लगाया है कि ठंड, घना कोहरा और निर्माण स्थल पर लोहे की छड़ों की मौजूदगी के कारण बचावकर्मी शुरू में पानी में उतरने से हिचकिचा रहे थे। मोनिंदर ने बताया है कि वह रात करीब 1:45 बजे मौके पर पहुंचा। युवराज कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च दिखाते हुए मदद की गुहार लगा रहे थे,लेकिन कोई अंदर नहीं गया। बचावकर्मियों ने कहा कि पानी बहुत ठंडा है और गड्ढे में लोहे की छड़ें हैं जिससे खतरा हो सकता है।

मोनिंदर का कहना है कि जब उसे बचाव दल की हिचकिचाहट दिखी तो उसने खुद रस्सी बांधकर और सेफ्टी जैकेट पहनकर गड्ढे में उतरने का फैसला किया। उसने यह भी बताया कि करीब दो हफ्ते पहले इसी गड्ढे में एक ट्रक गिरा था जिसे डिलीवरी एजेंटों ने मिलकर बचाया था इसके बावजूद वहां कोई बैरिकेड नहीं लगाया गया।

बता दें मोनिंदर द्वारा पहले अपने बयान बदल देने का आरोप है फिर उसके बाद उसने फिर अपना बयान दिया है। उसने कहा है कि “पुलिस वाले ये बोल रहे थे कि मोनिंदर पुलिस को साथ लेके चलो पुलिस के खिलाफ मत चलो ये जो वीडियो बना रहे हैं दो चार दिन आएँगे और उसके बाद हमें और तुम्हें यहां हमेशा रहना है ध्यान रखना। इसको आप चेतावनी समझ लो या प्यार।” उसने आगे कहा है “मौके पे जो मौजूद थे वो हैं फ़ायर ब्रिगेड वाले उनके पास सारी सुविधा थी लेकिन उन्होंने वो लड़के को नहीं बचाया।” 

वहीं पुलिस ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्रा के मुताबिक पुलिस और दमकल विभाग ने क्रेन, सीढ़ी, अस्थायी नाव और सर्चलाइट की मदद से बचाव की कोशिश की लेकिन घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी। दमकल विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस की करीब पांच घंटे चली तलाश के बाद युवराज का शव बरामद किया गया। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गया है सामने 

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार युवराज के फेफड़ों में पानी भर गया था जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और हार्ट फेल होने से उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया है कि युवक को हाइपोथर्मिया हो गया था यानी ठंड के कारण शरीर का तापमान तेजी से गिर गया था साथ ही अत्यधिक घबराहट की वजह से उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटीमार्टम ड्राउनिंग की पुष्टि हुई है यानी पानी में डूबने से मौत हुई। खबरों के अनुसार डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक पानी में रहने से युवराज के फेफड़ों में करीब 1 से 2 लीटर पानी भर गया था। लगातार ठंड, तनाव और सांस न ले पाने की स्थिति ने उनकी जान ले ली।                                       

पोस्टमार्टम रिपोर्ट (फोटो साभार: इंडिया टुडे)

युवक के पिता ने क्या कहा 

मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता ने मीडिया में बताया है कि हादसे से कुछ देर पहले उनकी बेटे से बात हुई थी। युवराज ने कहा था कि वह घर लौट रहा है। इसके थोड़ी देर बाद उसने घबराए हुए हाल में फिर फोन किया और बताया कि उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है और वह पानी से भरे नाले में गिर गई है। उसने तुरंत मौके पर आने को कहा। राजकुमार मेहता के अनुसार वह तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को भी सूचना दी गई। आसपास मौजूद लोगों ने मदद की कोशिश की लेकिन बेटे को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि कम दृश्यता के कारण कार का पता लगाना मुश्किल हो रहा था। जब उन्होंने दोबारा बेटे को फोन किया तो युवराज ने कार के अंदर मोबाइल की टॉर्च जला दी जिससे पानी में हल्की रोशनी दिखाई दी। बचाव के लिए रस्सी फेंकी गई लेकिन पानी के भीतर जाना बेहद कठिन था।

राजकुमार मेहता का कहना है कि अगर समय पर प्रशिक्षित गोताखोर अंदर उतर पाते तो शायद उनके बेटे की जान बच सकती थी। युवराज करीब दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा।

यूपी मुख्यमंत्री द्वारा एक्शन 

युवक की मौत के मामले में यूपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही मामले की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है।

इस एसआईटी में एडीजी जोन मेरठ, मेरठ मंडलायुक्त और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम पूरे मामले की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। इसके साथ ही अधिकारियों ने संबंधित विभागों से डेवलपर लोटस के आवंटन और निर्माण कार्य से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है और साइट पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही सभी विभागों को आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने इलाकों में चल रही निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था का दोबारा जांच करें ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

89 मौतें डूबने की वजह से हुईं हैं 

दिल्ली विधानसभा में राजस्व विभाग की ओर से पेश किए गए आंकडों के अनुसार राजधानी में नागरिक सुविधाओं की अनदेखी लगातार लोगों की जान ले रही है। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच हादसों और प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं में कुल 239 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें सबसे ज्यादा 89 मौतें डूबने की वजह से हुईं यानी औसतन हर महीने करीब चार लोग डूबकर जान गंवाते रहे। आंकड़ों के मुताबिक आग लगने की घटनाओं में 53 लोगों की मौत हुई जबकि भारी बारिश के दौरान इमारत या दीवार गिरने से 46 लोगों की जान चली गई। करंट लगने से तीन मौतें दर्ज की गईं और 48 लोगों की मौत अन्य कारणों से हुई।

चौंकाने वाली बात यह है कि डूबने की ज्यादातर घटनाएं गहरी नदियों या जलाशयों में नहीं बल्कि शहर के भीतर पानी से भरे अंडरपास, खुले नालों, नहरों, निचले इलाकों और बारिश में डूबी सड़कों पर हुईं। खराब ड्रेनेज सिस्टम और खुले नालों ने दिल्ली की आम जगहों को लोगों के लिए जानलेवा बना दिया है।

युवराज मेहता की मौत सिर्फ़ एक हादसा नहीं है यह सिस्टम की कई परतों की विफलता की कहानी है। खुले और बिना सुरक्षा वाले निर्माण स्थल, खराब ड्रेनेज व्यवस्था, समय पर प्रभावी रेस्क्यू की कमी और जिम्मेदारी से बचता प्रशासन इन सबने मिलकर एक युवा की जान ले ली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ है कि युवराज घंटों तक संघर्ष करता रहा लेकिन मदद समय पर नहीं पहुंच सकी।

 

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके कासब्सक्रिप्शन लें

If you want to support our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our premium product KL Hatke