खबर लहरिया ताजा खबरें लड़का नहीं तो त्योहार नहीं? परंपरा या भेदभाव | Bolenge Bulwayenge

लड़का नहीं तो त्योहार नहीं? परंपरा या भेदभाव | Bolenge Bulwayenge

हमारे देश में त्योहार खुशियों, उम्मीदों और साथ होने का प्रतीक हैं। लेकिन क्या हो जब एक घर में त्योहार की खुशियां किसी शर्त से बंध जाएं?

इस वीडियो में हम एक ऐसी कड़वी सच्चाई पर बात कर रहे हैं, जहाँ किसी की मृत्यु के बाद त्योहार तब तक नहीं मनाया जाता जब तक घर में “लड़का” जन्म न ले।
यह परंपरा सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं, बल्कि पशुओं तक भी जाती है—जहाँ बछिया नहीं, सिर्फ बछड़े का जन्म ही उत्सव का कारण बनता है।

क्या खुशी और त्योहार का भी जेंडर होता है?
क्या परंपराएं इंसानियत से बड़ी हो सकती हैं?

समय के साथ कई पुरानी सोच बदली हैं—लेकिन क्या अभी भी कुछ बदलाव बाकी है?

यह वीडियो एक सवाल है समाज से—
क्या हम जीवन को बिना शर्त स्वीकार कर सकते हैं?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *