65 वर्षीय एक मंदिर पुजारी पर घर में सो रही 18 साल की युवती के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। घटना ग्वालियर देहात के करहिया थाना क्षेत्र के एक गांव की है। आरोप है कि बुजुर्ग पुजारी रात के समय घर में घुसा और तंत्र-मंत्र का डर दिखाकर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया।
बलात्कार की खबरें अब मानो रोज़मर्रा की खबर बनती जा रही हैं। हर दिन कोई न कोई लड़की या महिला इस हैवानियत का शिकार हो रही है। चिंता की बात यह है कि अब ऐसे अपराध सिर्फ सड़कों या सुनसान इलाकों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि मंदिर जैसे आस्था के स्थानों और धार्मिक पहचान रखने वाले लोगों तक पहुंच चुके हैं।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां 65 वर्षीय एक मंदिर पुजारी पर घर में सो रही 18 साल की युवती के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। घटना ग्वालियर देहात के करहिया थाना क्षेत्र के एक गांव की है। आरोप है कि बुजुर्ग पुजारी रात के समय घर में घुसा और तंत्र-मंत्र का डर दिखाकर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया।
एक तरफ लोग भगवान को पूजते हैं और मंदिरों में बैठे पंडितों-पुजारियों व बाबाओं पर उसी स्तर का भरोसा करते हैं। लोग इन्हें समाज में आस्था, नैतिकता और संस्कारों का प्रतीक माना जाता है। उनके द्वारा लोगों को बड़े-बड़े ज्ञान देते हुए भी सुना जाता है लेकिन जब इन्हीं धार्मिक स्थानों से दुष्कर्म और हिंसा जैसी खबरें सामने आती हैं तो यह भरोसा गहरी चोट खाता है। सवाल उठता है कि आस्था के नाम पर जिन पर आंख मूंदकर विश्वास किया जाता है उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या ऐसे पंडितों के लिए धर्म का चोला अपराधों को ढकने का साधन बन गया है? और क्या समाज ऐसे मामलों में सख्त सवाल पूछने की हिम्मत करेगा?
घर में अकेली थी युवती, मौका देखकर घुसा आरोपी
युवती उस रात घर पर अकेली थी। उसके भाई-भाभी किसी काम से डबरा गए हुए थे, जबकि घर में उसकी मानसिक रूप से अस्वस्थ मां मौजूद थी। खाना खाने के बाद मां दूसरे कमरे में सोने चली गई और युवती अलग कमरे में सो रही थी। इसी दौरान गांव के सिद्धेश्वर मंदिर का पुजारी हरिराम (65) चुपचाप घर में घुस आया और युवती के कमरे में पहुंच गया।
तंत्र-मंत्र का डर दिखाकर किया दुष्कर्म
आरोप है कि पुजारी ने युवती के साथ जबरदस्ती गलत हरकत की। जब युवती की नींद खुली और वह शोर मचाने लगी तो पुजारी ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और तंत्र-मंत्र से मारने की धमकी दी। इसके बाद उसने जबरन दुष्कर्म किया और धमकाकर वहां से भाग गया। डर के कारण युवती कुछ दिनों तक चुप रही और किसी को कुछ नहीं बताया।
ग्रामीणों ने पकड़ा, मारपीट के बाद कबूला जुर्म
कुछ दिन बाद जब युवक के भाई-भाभी घर लौटे तो उसने पूरी घटना उन्हें बताई। इसके बाद मां भाई और ग्रामीण सिद्धेश्वर मंदिर पहुंचे और आरोपी पुजारी को पकड़ लिया। मंदिर में मौजूद एक अन्य पुजारी को जब घटना की जानकारी मिली तो उसने आरोपी की पिटाई कर दी। मारपीट के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।
पुलिस ने दर्ज किया केस, आरोपी गिरफ्तार
युवती की शिकायत पर करहिया महिला थाना पुलिस ने आरोपी पुजारी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। हिंदुस्तान के रिपोर्ट के अनुसार एएसपी देहात जयराज कुबेर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई है और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
यह घटना 8 जनवरी 2026 की है लेकिन यह कोई पहली या अकेली घटना नहीं है। इससे पहले साल 2025 में भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें मंदिरों के पुजारियों पर ही दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगे। बार-बार सामने आ रही इन खबरों ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
– दैनिक भास्कर के खबर अनुसार मध्य प्रदेश के छतरपुर में 60 वर्षीय पुजारी पर मंदिर में दो लड़की से दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। बच्चियों के परिजन जब मंदिर पहुंचे तो पुजारी ने त्रिशूल से हमला करने की कोशिश की। लोगों ने उसे पीट दिया।
– मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के अकोदिया थाना क्षेत्र में मंदिर के एक पुजारी पर 12वीं क्लास में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा से कथित तौर पर दुष्कर्म करने का आरोप लगा। नाबालिग लड़की की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी पुजारी को गिरफ्तार कर लिया है।
– बिहार के दरभंगा में एक नबालिक लड़की ने कथावाचक श्रवण दास महाराज के ऊपर यौन सोशन का आरोप लगाया था। लड़की का कहना है था कि कथावाचक श्रवण दास ने शादी का झांसा देकर उनके साथ यौन सोशन किया और गर्भवती हो जाने पर गर्भपात करवा दिया गया।
– नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में हरियाणा के हिसार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल की अदालत ने गांव के एक पुजारी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
– उत्तर प्रदेश के देवरिया में सात वर्षीय बच्चे से अप्राकृतिक दुष्कर्म के मामले में एक मंदिर के पुजारी के विरुद्ध पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आरोपित पुजारी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
ये सामने आई घटनाएं वही हैं जो किसी तरह खबर बनकर लोगों तक पहुंच पाईं। असल में ऐसे मामलों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है जिनके बारे में कभी पता ही नहीं चलता। कई लोग बदनामी के डर से चुप रह जाते हैं, तो कई पीड़ित हिंसा, धमकी और सामाजिक दबाव के कारण अपनी आवाज़ नहीं उठा पाते। ऐसे में कई अपराध परदे के पीछे ही दबे रह जाते हैं। यह चुप्पी सिर्फ अपराधियों को ताकत देती है और हिंसा हुए लोगों को और कमजोर करती है।
ग्वालियर की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है यह उस गहरी सड़ांध की ओर इशारा करती है जो समाज के भीतर फैलती जा रही है। सवाल यह नहीं है कि अपराध हुआ सवाल यह है कि ऐसी दरिंदगी लगातार क्यों बढ़ रही है? क्या कानून का डर खत्म हो चुका है या न्याय की प्रक्रिया इतनी धीमी हो गई है कि अपराधियों को कोई भय नहीं रहा? जब मंदिर के पुजारी जैसे लोग जिन पर समाज सबसे ज्यादा भरोसा करता है, ऐसे अपराधों में शामिल पाए जाते हैं तो फिर आम लोगों से कैसे उम्मीद की जाए कि वे खुद को सुरक्षित महसूस करें?
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