मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के छतरपुर ब्लॉक के ओरछा थाना क्षेत्र से करीब 15 किलोमीटर दूर कैड़ी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक संख्या -1 की हालत इन दिनों बदहाल है। यह केंद्र रोज सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुलता है लेकिन पिछले तीन महीनों से यहां बिजली नहीं होने के कारण बच्चे आना लगभग बंद कर चुके हैं।
रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – मीरा देवी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता शिवहरे (उम्र 39 वर्ष) बताती हैं कि उनके केंद्र में कुल 40 बच्चे दर्ज हैं लेकिन इस समय रोजाना सिर्फ 3 से 4 बच्चे ही पहुंच रहे हैं। 7 फरवरी 2026 को केंद्र का बिजली मीटर जल गया था तभी से यहां बिजली नहीं है। शुरुआत में सर्दी होने के कारण किसी तरह काम चलता रहा लेकिन अब तापमान 43 से 46 डिग्री तक पहुंचने से हालात और खराब हो गए हैं।
केंद्र में न लाइट है और न ही पंखा चलता है। सुबह 9 बजे से ही धूप तेज हो जाती है जिससे बच्चे कुछ देर भी अंदर नहीं बैठ पाते। वे रोजाना घर-घर जाकर बच्चों को बुलाती हैं लेकिन उनके माता पिता साफ मना कर देते हैं। उनका कहना है कि इतनी गर्मी में बच्चे बीमार पड़ जाएंगे।
खुद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की स्थिति भी मुश्किल में
सुनीता शिवहरे बताती हैं कि बिजली न होने के कारण उन्हें खुद भी काफी परेशानी होती है। कई बार वे केंद्र के अंदर बैठ नहीं पातीं और बाहर बैठकर ही समय काटती हैं। गर्मी इतनी ज्यादा होती है कि उन्हें हाथ वाला पंखा चलाकर काम चलाना पड़ता है। पूरे दिन केंद्र में रहना मुश्किल हो जाता है फिर भी वे किसी तरह अपनी ड्यूटी निभा रही हैं।
खाना भी हो रहा बेकार
केंद्र में बच्चों के लिए आने वाला पोषण आहार भी प्रभावित हो रहा है। जब बच्चे ही नहीं आते तो खाना बांटने के लिए कोई नहीं होता और वह खराब या बेकार चला जाता है। कार्यकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की शिकायत की लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बच्चों की माताओं ने बच्चों को भेजना बंद किया
गांव की रहने वाली रामकली यादव (उम्र 32 वर्ष) बताती हैं कि उनके तीन बच्चों में से दो स्कूल जाते हैं और तीसरे बच्चे को वे आंगनबाड़ी भेजना चाहती थीं लेकिन जब उन्होंने कुछ दिन बच्चे को भेजा तो वह गर्मी से परेशान हो गया और उसके शरीर पर घमौरियां निकल आईं। इसके बाद उन्होंने भेजना बंद कर दिया।
रामकली कहती हैं कि आंगनबाड़ी सिर्फ खाना लेने की जगह नहीं है बल्कि बच्चों के सीखने और खेलने का स्थान है। जब वहां बुनियादी सुविधा ही नहीं है तो बच्चे भेजने का कोई मतलब नहीं।
मालती अहिरवार (उम्र 29 वर्ष) का भी यही कहना है कि सुबह से केंद्र खुल जाता है, लेकिन खाना दोपहर के बाद मिलता है। ऐसे में बच्चे सुबह की गर्मी में बैठ नहीं पाते। अगर जबरदस्ती भेजें, तो बच्चे खुद मना कर देते हैं। उनका कहना है कि केंद्र में न लाइट है, न पंखा और कार्यकर्ता खुद बाहर बैठती हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को वहां रखना ठीक नहीं।
मालती बताती हैं कि गांव की महिलाओं ने मिलकर एक बार शिकायत भी की थी लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका साफ कहना है कि जब तक पंखा नहीं चलेगा वे अपने बच्चों को नहीं भेजेंगी।
सरपंच ने भी मानी समस्या
गांव की सरपंच देवकी कुशवाहा (उम्र 42 वर्ष) बताती हैं कि उनके अपने बच्चे भी अब आंगनवाड़ी नहीं जा रहे हैं। 3 अप्रैल को उन्होंने बच्चे को भेजने की कोशिश की लेकिन घरवालों ने मना कर दिया। कारण वही केंद्र में बिजली नहीं और भीषण गर्मी।
सरपंच के मुताबिक कुछ दिन पहले मीटर ठीक कराया गया था लेकिन बिजली की अनियमित सप्लाई के कारण वह फिर खराब हो गया। कभी वोल्टेज ज्यादा तो कभी कम इसी वजह से मीटर जल जाता है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को महिला एवं बाल विकास विभाग तक पहुंचाएंगी।
अधिकारी ने दिया भरोसा
जब इस मामले पर छतरपुर जिले के बाल विकास अधिकारी अरुण प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने भरोसा दिया कि तुरंत बिजली विभाग को सूचना देकर समस्या का समाधान कराया जाएगा और दो-तीन दिन के भीतर केंद्र की बिजली व्यवस्था ठीक कर दी जाएगी।
कैड़ी गांव का यह आंगनबाड़ी केंद्र कागजों में रोज सुबह 9 से शाम 4 बजे तक चलता है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिना बिजली और पंखे के यह केंद्र गर्मी में बच्चों के लिए बेकार हो चुका है। अब देखने वाली बात यह है कि विभाग का भरोसा कब तक हकीकत में बदलता है।
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