खबर लहरिया खेती महोबा: किसानों का औज़ार जेरी, बोझ की करे फेरी | KhabarLahariya

महोबा: किसानों का औज़ार जेरी, बोझ की करे फेरी | KhabarLahariya

महोबा के ग्रामीण इलाकों में आज भी खेती- किसानी के लिए किसने पुराने तरीके आज़मा रहे हैं। यहाँ पर मटर की डाबी इकट्ठा करने का दशकों पुराना तरीका इस्तेमाल किया जा रहा है। एक लकड़ी के बंधन जिसे जेरी भी कहते हैं उससे पहले से कटी मटर की फसल को एक साथ भारी मात्रा में उठाया जाता है और फिर उसे अपने कंधे पर लाद कर किसान उसकी जगह तक पहुंचाते हैं।

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जहाँ एक तरफ कृषि क्षेत्र जब टेक्नोलॉजी के माध्यम से इतना आगे बढ़ रहा है, वहीं महोबा के ये किसान आज भी पुरानी परंपराओं के साथ खेती-किसानी में उन्नति कर रहे हैं। इन किसानों ने बताया कि दशकों पुराने इस तरीके को करने में मेहनत तो बहुत लगती है लेकिन उन्हें इसे करने में मज़ा भी बहुत आता है।

ये किसान एक जेरी में लगभग 10 किलो का वज़न एक बार में उठा लेते हैं। इसके साथ ही महोबा में जेरी से मटर इकठ्ठा करने के किसानों को 300 रूपए प्रतिदिन मिलता है। वो जेरी से मटर इकठ्ठा करने में थक तो ज़रूर जाते हैं, लेकिन हाँ उनके चेहरे की मुस्कराहट कम नहीं होती।

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