धार्मिक और पर्यटक नगरी चित्रकूट को स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए प्रशासन की ओर से कुछ कदम उठाए गए जिसमें शहर की दीवारों, पुलों और सार्वजनिक स्थानों को रंग-बिरंगी पेंटिंग्स और कलाकृतियों से सजाया जा रहा है ताकि आने वाले श्र्द्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर और सुंदर वातावरण मिल सके –
रिपोर्ट – नाज़नी रिज़वी, लेखन – रचना
इसी कड़ी में धनुष चौराहा से लेकर शंकर बाजार की ओर जाने वाले ओवरब्रिज के दीवारों पर कलाकारों की एक टीम पिछले कई दिनों से मेहनत कर रही है। सुबह की तेज धूप हो या रात का समय कलाकार घंटो तक दीवारों पर चित्र उकेरने में जुटे रहते हैं। लेकिन उनकी इस मेहनत पर पान और गुटके की पीक लगातार दाग लगा रही है।
उन टीमों के सदस्यों से बात करने पर पेटिंग बनाने वाली कलाकार प्रिया सोनी के मुताबिक 12 सदस्यीय टीम पिछले दस दिनों से लगातार काम कर रही है। सुबह छह बजे से दस बजे तक और फिर शाम चार बजे से पांच बजे तक वे लोग दीवारों को सुंदर बनाने में लगे रहते हैं। उनका कहना है कि सबसे ज़्यादा दुःख तब होता है जब लोग नई-नई बनाई गई पेंटिंग्स के सामने ही पान या गुटका थूक देते हैं। हम घंटों मेहनत करके दीवारों पर सुंदर चित्र उकेरते हैं लेकिन कई जगह ये पेंटिंग्स एक दिन भी साफ नहीं रह पातीं। हमारी मेहनत और इस पहल की अहमियत की लोगों को ज़रा भी परवाह नहीं होती। एक ओर हम शहर को सुंदर बनाने के लिए दीवारों पर रंग भर रहे होते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग वहीं गंदगी फैलाने से भी नहीं चूकते।”
उनका कहना है कि ऐसी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाना चाहिए और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर डालना चाहिए और सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाना चाहिए। उनका मानना है कि जब नियमों का सख़्ती से पालन होगा और कार्यवाही के उदाहरण सामने आएँगे तभी लोग समझ पाएँगे।
इसी टीम में शामिल आदर्श हैं जो पेंटिंग की ही पढ़ाई करते हैं। उन्हें बचपन से चित्रकला का शौक है और वे इसी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने कई कला प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। इस परियोजना में काम कर रहे कलाकारों को प्रतिदिन एक हजार रुपए मेहनताना और भोजन के लिए सौ रुपए दिए जा रहे हैं। बढ़ते तापमान और तेज धूप के कारण टीम की कोशिश रहती है कि ये काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाए।
बुंदेलखंड की पारंपरिक चित्रकला से जुड़ी कलाकार लवली बताते हैं कि यहां बनाई जा रही पेंटिंग को बुंदेलखंड चित्रशैली कहा जाता है। पहले गांवों में महिलाएं बिना किसी प्रशिक्षण या सीखे अपने घरों के दीवारों पर ऐसे चित्र बनाती थीं। समय के साथ कला सीखने के तरीके बदले हैं और अब लोग स्कूल कॉलेज में पढ़ाई कर डिग्री हासिल कर इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। लवली ने यह कला अपने घर परिवार और आसपास के माहौल से सीखा है। उनके अनुसार आज भी गांवों में शादियों और अन्य अवसरों पर महिलाएं दीवारों पर स्वागत चित्र और पारंपरिक आकृतियाँ बनाती हैं जो संस्कृति का हिस्सा है।
हालांकि शहर को सुंदर बनाने की इस पहल के सामने एक बड़ी चुनौती भी दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर पेंटिंग पेंटिंग होने के तुरंत बाद ही लोग दीवारों पर थूक देते हैं। कलाकार प्रभा कहती हैं नई बनी कलाकृतियों पर लाल पिक के निशान उभरने लगे हैं जिससे उनकी सुंदरता पूरी खराब हो जाती है। “इसके लिए लगातार काम कर रहे हैं अब हर जगह निगरानी तो नहीं कर सकते हैं अपने तरफ से बना दे रहे हैं।”
चित्रकूट देश विदेश से आने वाले श्र्द्धालुओं और पर्यटकों की आस्था का प्रमुख केंद्रो में से एक है। ऐसे में शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखना प्रशासन के साथ नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है। यदि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने की आदतों पर रोक नहीं लगी तो सौंदर्यकरन के प्रयासों का परिणाम हासिल करना कठिन है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन को ऐसे स्थानों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए और गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने जैसे सख्त कार्यवाही करनी चाहिए।
इस पर प्राधिकरण के जूनियर इंजीनियर अतीत कनौजिया का मानना है कि चित्रकूट को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इनमें से दो स्थानों का काम पूरा हो चुका है और अन्य जगहों पर पेंटिंग का काम जारी है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए कलाकार को अपने सुविधाजनक समय में काम करने को कहा गया है। उनका कहना है कि सड़क से कुछ दूरी पर बनी पेंटिंगों का सुरक्षा आसान है लेकिन सड़क किनारे और अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर बनी कलाकृतियों को साफ-सुथरा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। ओवरब्रिज पर चलने वाले वालों की संख्या भले कम हो लेकिन आने जाने वाले कई लोगों द्वारा दीवारों पर गुटखा थूक ही दिया जाता है और पेंटिंग खराब हो जाती है।
वे कहते हैं कि हर व्यक्ति का निगरानी संभव नहीं है। शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाए रखने के लिए लोगों में जागरूकता होना जरुरी है। नागरिकों को समझना चाहिए कि यह उनका अपना शहर है और इसे साफ सुथरा बनाए रखने में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
“चित्रकूट को सुंदर बनाने की यह पहल कलाकरों की मेहनत स्थानीय संस्कृति को बचाए रखने का सुंदर प्रयास है। इतनी मेहनत और संस्कृति की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब आम लोग भी इन कलाकृतियों और सार्वजनिक स्थानों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।” रेपोर्टर नाज़नी रिज़वी
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