योजनाएं कई पर फिर भी क्यों नहीं खुशहाल किसान

साभार: पिक्साबे

किसान क्रांति यात्रा के तहत दिल्ली के किसान घाट जाने की हजारों किसानों की कोशिश को दिल्ली पुलिस ने रोका। इस समय किसान ने गाजीपुर बॉर्डर के बैरीकेड तोड़े, जिसके बाद पुलिस ने किसानों को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले और पानी की बौछार की। इस यात्रा में यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के अलावा अन्य राज्यों के किसान शामिल हुए। किसान अपनी मांगे पूरी नहीं होने के कारण नाराज थे। इस यात्रा में ज्यादातर किसान भारतीय किसान यूनियन के सदस्य थे। इसकी शुरुआत 23 सितंबर को हरिद्वार से शुरु की थी, जो दिल्ली के किसान घाट पर खत्म होनी थी।

अभी केन्द्रीय सरकारी से आश्वासन के बाद किसान अपने घर तो लौट गए है। लेकिन किसानों के ये प्रदर्शन कहीं न कहीं किसानों की बिगड़ती स्थिति को बताने के लिए काफी हैं, इस ही साल फरवरी में भी किसानों ने एक लम्बी पद यात्रा से अपनी तकलीफ को सरकार को बताने की कोशिश की थी। कृषि प्रधान देश में आज खेती का उद्योग घर चलाने तक का मुनाफा नहीं दे रही है, जिस कारण से अब खेती मुख्य व्यवसाय से अन्य व्यवसाय में आ गई है, और आए भी क्यों नहीं किसानों के हित में योजनाएं तो कई बनाई जाती है। लेकिन जमीन स्तर पर चलती कोई नहीं दिखाई देती है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही लघु और सीमान्त किसानों के लिए 1 लाख तक की कर्जमाफी का ऐलान किया था। ये 31 मार्च 2016 तक लिए गए सभी 1 लाख तक की सीमा पर लागू थी।  उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रंजीतपुर गांव के रसीद खान ने 9 साल पहले खेती के लिए कर्ज लिया और वह कर्जमाफी की सूची में भी हैं, पर कर्ज को माफ करने के लिए विभागों के चक्कर कट रहे हैं। कल्याणपुर के साधुराम का नाम भी कर्जमाफी की सूची में है और उन्हें सच में होने वाली कर्जमाफी का इंतजार है। वहीं चित्रकूट के रसियन गांव के रामचरण अपने कर्ज के पेपर दिखाते हुए कहते हैं कि घर में शादी के लिए कर्ज लिया था और कर्जमाफी नहीं होने की बात पर कहते हैं कि पता नहीं वह कैसे कर्ज को भर पाएंगे। बांदा के घुरहुडा गांव के कौशल प्रसाद का नाम पात्रता सूची में हैं, लेकिन कर्जमाफी नहीं हो रही है, वह इसके लिए बड़े अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार बता रहे हैं।

इन सब सवालों के जवाब पूछने जब इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के प्रबंधक हरिनाराणय दीक्षित से बात की, तो उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत किसानों की कर्ज की माफी हो गई है, जबकि अन्य की चल रही है। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से सबसे ज्यादा किसान कर्ज लेते हैं। वहीं बांदा के कृषि विभाग में तीन बार चक्कर काटने के बाद भी कई अधिकारी नहीं मिला, जो कर्जमाफी पर अधिकारियों की गंभीरता और योजनाओं का जमीन पर क्रियान्वय को दर्शाने के लिए काफी है। वैसे किसान ही एक ऐसा उत्पादक है, जो अपने उत्पाद की कीमत खुद नहीं तय करता है।

-अलका मनराल