खबर लहरिया Blog UP New Cabinet: यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल में 6 नए मंत्री शामिल 

UP New Cabinet: यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल में 6 नए मंत्री शामिल 

                                                    

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाला है। राज्य में 2017 से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है। इसी से संबंधित उत्तर प्रदेश में बीजेपी के नेतृत्व वाली योगी सरकार के मंत्रिमंडल में 10 मई को फेरबदल किया गया।

फोटो साभार: ANI

राज्य सरकार के मंत्रिमंडल में छह नए चेहरों को शामिल किया गया है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मंत्रिमंडल में बदलाव किया है। इसी कड़ी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं।

6 नए चेहरे जो हुए मंत्रिमंडल में शामिल 

उत्तर प्रदेश में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया जबकि दो को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और चार को राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

भूपेन्द्र सिंह चौधरी और मनोज कुमार पांडे ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। वहीं अजित सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया। ये दोनों पहले भी सरकार में मंत्री थे लेकिन अब उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। अजीत सिंह पाल कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक हैं जबकि सोमेंद्र तोमर मेरठ दक्षिण सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसके अलावा कृष्णा पासवान,कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इनमें कृष्णा पासवान इकलौती महिला मंत्री हैं। वह पासी समुदाय से आती हैं और फतेहपुर की खागा सीट से विधायक हैं। कैलाश सिंह राजपूत कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक हैं जबकि सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं हंसराज विश्वकर्मा विधान परिषद के सदस्य होने के साथ-साथ वाराणसी बीजेपी के जिला अध्यक्ष भी हैं।

नए मंत्रियों के कुछ बयान 

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने एक्स हेंडल में कहा कि “यह बहुत खुशी की बात है कि लंबे समय से अटकी हुई प्रक्रिया पर अब फैसला लिया जा रहा है। जल्द ही सब कुछ पता चल जाएगा”

वहीं राज्य सरकार के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि “हम इस दिन का इंतजार कर रहे थे, आखिरकार यह हो रहा है। केंद्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन हमेशा हमारे साथ है, हम इसका स्वागत करते हैं। राज्य की समृद्धि के लिए मंत्रिमंडल में अधिक से अधिक लोगों को शामिल करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है…”

सुरेंद्र दिलेर ने कहा है कि “मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है और मैं इसे ठीक से निभाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।” 

बता दें यूपी विधानसभा में अधिकतम 60 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 164 (1ए) के तहत किसी भी राज्य के मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य की संख्या के 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती है। यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं। 

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अखिलेश यादव ने अपने एक्स पर एक तीखी टिप्पणी लिखी है। उन्होंने लिखा है कि “उप्र में मंत्रिमंडल में केवल 6 रिक्तियाँ हैं, इससे ज़्यादा तो दूसरे दल से पाला बदल कर आए लोग हैं, क्या उन सभी को मंत्री पद से नवाज़ा जाएगा? क्या उनमें से सबसे कमज़ोर को चुना जाएगा जिससे कि उसकी कमज़ोरी कुछ कम हो जाए? एक समाज के कई विधायकों में से किसी एक को चुना जाएगा तो चुनने का आधार क्या होगा? अगर ऐसा हुआ तो बाक़ी दल-बदलुओं का क्या होगा? उनकी उपेक्षा व अपमान को क्या कुछ ले-देकर शांत करा जाएगा? या उन्हें भी ये अहसास करा दिया जाएगा कि भाजपा किसी की सगी नहीं है? बाक़ी छूटे हुए लोग क्या अपने को ठगा सा महसूस नहीं करेंगे? वो अपने चुनाव क्षेत्र में मुँह दिखाने लायक बचेंगे क्या? इसके अतिरिक्त प्रश्न ये भी है कि उनके अपने दल के जो लोग मंत्री बनने के इंतज़ार में सूखकर काँटा हो गये हैं, उन बेचारों का क्या होगा? ⁠जिन वर्तमान मंत्रियों के विभाग कम किये जाएंगे तो क्या इससे जनता के बीच ये संदेश नहीं जाएगा कि वो नाकाम रहे, इसलिए उनसे मंत्रालय छीन लिया गया है? ⁠ऐसे मंत्री तो बिना लड़े ही क्या अपना चुनाव हार नहीं जाएंगे? 

 

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