खबर लहरिया Blog पेट्रोल-डीज़ल की खरीद के लिए, लोग कर रहें है घर खर्च में कमी

पेट्रोल-डीज़ल की खरीद के लिए, लोग कर रहें है घर खर्च में कमी

For the purchase of petrol and diesel, people are reducing the house expenses

संसद बजट सत्र के बाद अब पेट्रोल की कीमतें आसमान छूने को है। देश में लगातार पेट्रोल और डीज़ल के रेट तेज़ी से बढ़ रहे हैं। फिलहाल राजस्थान और मध्यप्रदेश में पेट्रोल 100 रूपये, मुंबई में 97 रूपये और राजधानी दिल्ली में 90 रूपये है। वहीं डीज़ल की कीमतें राजस्थान और मध्यप्रदेश में 90 रूपये, मुंबई में 88 रूपये और दिल्ली में 81 रूपये है। धीमे-धीमे ये बढ़ती कीमतें मध्यमवर्ग के नागरिकों की धड़कने बढ़ाती जा रही हैं। 

शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों में लोग बढ़ी हुई कीमत से परेशान है। ऐसे में बस लोगों में यही ख्याल है कि वह रोज़ का आना-जाना कैसे करे। जिला पन्ना के गाँव कुंवरपुर के बाबूलाल अनुरागी का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ने से सबसे ज़्यादा परेशानी मध्यम वर्ग के लोगों को हुई है। जो लोग मज़दूरी करते हैं, वह आने -जाने के लिए बाइक का इस्तेमाल भी नहीं कर पाएंगे क्यूंकि कभी उनको दिहाड़ी मिलती है, कभी नहीं मिलती।

गाँव सब्दुआ की सविता अहिरवार का कहना है कि जिस तरह से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। अब तो उन्हें साइकिल ही लेनी पड़ेगी। स्कूटी में अब पेट्रोल कौन भरवाए। 100 रूपये के पेट्रोल में स्कूटी सिर्फ 40 किलोमीटर चलती है। 

कांग्रेस पार्टी के नेता आकाश जाटव ने कहा कि बढ़ती कीमतों ने लोगों का आवागमन मुश्किल कर दिया है। वह आरोप लगाते हुए कहते हैं कि केंद्र की सरकार तानाशाह है। साथ ही मौजूदा सरकार की वजह से ही कीमतों में इज़ाफ़ा हो रहा है। 

बहादुरगंज पेट्रोल पंप के मैनेजर राजू सुल्लेरे कहते हैं कि अगर यूपी में पेट्रोल और डीज़ल पर जीएसटी (सकल घरेलू उत्पाद) लग जाए तो लोगों के लिए डीज़ल-पेट्रोल की खरीद कीमत में कमी आ सकती है। वर्तमान में यूपी में पेट्रोल की कीमत 90.03 रूपये और डीज़ल की कीमत 81.32 है। इस खबर की रिपोर्ट आप इस लिंक के ज़रिये देख सकते हैं। 

लोकल सर्कल्स द्वारा ईंधन की बढ़ी कीमत पर सर्वे 

द प्रिंट की 22 फरवरी की रिपोर्ट में कम्युनिटी प्लेटफार्म लोकल सर्कल्स द्वारा 291 जिलों का एक सर्वे रिपोर्ट पेश किया गया। जिसके अनुसार 51 प्रतिशत उत्तरदाताओं ( जिन्होंने शोध के सवालों का जवाब दिया) ने ईंधन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने खर्चों में कटौती की है। वहीं 21 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो आवश्यक चीज़ें जैसे प्याज, टमाटर,दालें,गेहूं और चावल आदि की कमी कर रहे हैं या उन्हें ज़्यादा खरीद नहीं रहे। बाकी के 14 प्रतिशत लोग मज़बूरन अपनी बचत का उपयोग ईंधन की ज़रुरत को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। 

हालांकि,43 प्रतिशत लोग ऐसे भी थे जिनका कहना था कि उनका महीने का ईंधन बिल सामान्य से कम है क्यूंकि उन्हें काम की जगह जाने के लिए रोज़ आना-जाना नहीं पड़ता है। जानकारी के अनुसार, इस सर्वे के लिए 22 हज़ार से अधिक लोगों की प्रतिक्रियाएं ली गयी थी। 

सर्वे के अनुसार, यह चाहते हैं लोग 

For the purchase of petrol and diesel, people are reducing the house expenses

सर्वे कहता है कि 79 प्रतिशत भारतीय चाहतें हैं कि या तो राज्य सरकार निर्णय लेते हुए मूल्य वर्धित कर ( वैल्यू एडेड टैक्स/वैट  ) को कम कर दे या फिर एक निश्चित मूल्य वर्धित कर लागू कर दे। 

32 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि वह मूल्य वर्धित कर में पूर्णता को देख रहे हैं, 47 प्रतिशत ने कहा कि वैट में कटौती की जाए। जबकि 8 प्रतिशत लोगों को लगता है कि वर्तमान के मूल्य वर्धित कर से वह संतुष्ट है। 

इस समय, वैट यानी मूल्य वर्धित कर की गणना ईंधन के आधार मूल्य के प्रतिशत में की जाती है। लोकल सर्कल्स ने अपने प्रेस को दिए हुए बयान में कहा कि अगर पूर्ण वैट लगाया जाता है तो इससे कीमतों को कम रखने में मदद मिलती है। वो भी उस समय जब पेट्रोल और डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी हो रही हो। 

सर्वेक्षण के अनुसार,89 प्रतिशत उत्तरदाता चाहते हैं कि पेट्रोल पर बढ़े हुए उत्पाद शुल्क में उलटफेर की जाए। वहीं 30 प्रतिशत लोगों का कहना है कि केंद्र को ही सेस में बदलाव करना चाहिए। 

सरकार ने अप्रैल 2020 में लॉकडाउन में ईंधन की कम मांग होने की वजह से उत्पाद शुल्क में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। 

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वैट और सेस का अर्थ 

वैट (वैल्यू एडेड टैक्स ) एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तु और सेवा पर लगाया जाता है। वस्तु और सेवा उत्पादन के हर पड़ाव में कीमत की वृद्धि होती जाती है इसलिए वस्तु के उत्पाद से लेकर बिक्री तक हर पड़ाव में वैट लगाया जाता है।

सेस को उपकर भी कहा जाता है। यह भी एक प्रकार का टैक्स होता है। जो टैक्स के ऊपर लगकर अतिरिक्त शुल्क के रूप में वसूल किया जाता है | इसी वजह से सेस को उपकर कहा जाता है। इसके अलावा इस टैक्स को चुंगी या महसूल के नाम से भी संबोधित किया जाता है |

पेट्रोल कीमतों के साथ लगे “क्या यही है अच्छे दिन” के बैनर्स 

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए महारष्ट्र की शिव सेना सरकार ने केंद्र सरकार पर तानों की बौछार कर दी। सोमवार 22 फरवरी को शिव सेना ने कहा कि “आ गए अच्छे दिन?” यह स्लोगन भाजपा सरकार ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल किया था। मुंबई के पेट्रोल पंप और बांद्रा वेस्ट की बहुत सी जगहों पर “यही है अच्छे दिन?” के बैनर्स लगे हुए थे। जो की सीधा-सीधा केंद्र सरकार पर कटाक्ष कर रहे थे। बैनर पर साल 2015 से 2021 के बीच के पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में विभन्नता का आंकड़ा दिखाया गया था। जब पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें 50 से 65 रूपये प्रति लीटर के बीच में थी।  

सोमवार को मुंबई में पेट्रोल 97 रूपये प्रति लीटर और डीज़ल 88.06 प्रति लीटर था। 

मुनाफ़े के लिए विनिर्माण देश कर रहे हैं कमी – केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भारत ने ओपेक ( आर्गेनाईजेशन फॉर द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कन्ट्रीज) से आग्रह किया है कि वह उत्पादन में कटौती को कम करे। वह कहते हैं कि ईंधन की कीमतों के बढ़ने के दो मुख्य कारण है। अंतराष्ट्रीय बाजार ने ईंधन का उत्पादन करना कम कर दिया है। वहीं ईंधन बनाने वाले विनिर्माण देश भी ईंधन का कम उत्पादन कर रहे हैं ताकि वह ज़्यादा लाभ कमा सके। 

कीमतें बढ़ना महा भयंकर धर्म संकट- वित्त मंत्री 

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार, 20 फरवरी को कहा कि पेट्रोल की कीमतों में भारी वृद्धि एक बहुत बड़ा मुद्दा है और इसे महा भयंकर धर्म संकटम के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसी समस्या है जिसमें कीमत कम करने के आलावा और कोई जवाब लोगों को मंज़ूर नहीं होगा। वह कहती हैं कि वह एक ऐसे क्षेत्र में चल रही हैं जहां अगर वह कुछ भी सच्चाई दिखाने के लिए कहती हैं तो वह ऐसा सुनाई देगा, जैसे की वह किसी जवाब को देने से बचने की कोशिश कर रही हो। यह उन्होंने चेनाई सिटिज़न्स फोरम में यूनियन बजट में चल रही बहस के दौरान कहा था। 

पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों ने आम व्यक्ति की जेब ढीली कर दी है। वहीं सर्वे से यह बात भी साफ होती है कि कई लोग कीमतों के बढ़ने से परेशान है तो कई लोगों को कुछ फर्क नहीं पड़ता। वहीं केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री का यह कहना कि पेट्रोल-डीज़ल का विनिर्माण करने वाली कंपनियां अपने फायदे के लिए पेट्रोल-डीज़ल का उत्पादन नहीं कर रही। यह तो यही दर्शाता है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों के बढ़ने की एक वजह यह भी है।  हालांकि, भारत सरकार ओपेक से पेट्रोल उत्पादन को लेकर बात रही है। साथ ही यह भी देखा गया कि ईंधन खरीदने के लिए लोग अपने घर के खर्चों में भी कटौती कर रहे है। सरकार कीमतों को कम करती है या नहीं यह कहा नहीं जा सकता।

द्वारा लिखित – संध्या