सरकार का नियम कहता है कि पात्र लाभार्थियों को तय मात्रा में राशन मिले। इसके लिए बायोमेट्रिक सत्यापन यानी अंगूठा लगाना जरूरी है। लेकिन बांदा जिले के नरैनी तहसील के भवई मजरा सराय जदीद के ग्रामीणों का कहना है कि यहां प्रक्रिया कुछ अलग है। ग्रामीणों के मुताबिक पहले अंगूठा लगवाया जाता है और राशन बाद में दिया जाता है। कई बार राशन लेने पहुंचने पर दुकान बंद मिलती है, राशन खत्म हो जाता है या कोटेदार मौजूद नहीं होते। ऐसे में लोगों को एक ही महीने में तीन से चार बार तक दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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