लखनऊ के अलीगंज इलाके में कल सोमवार 22 जून को एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर दिया। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आपातकालीन निकास और धुएं को बाहर निकालने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को बाहर निकलने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
यह आग अलीगंज इलाके में एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत एमएस/102/डी नंबर में लगी। इस बिल्डिंग में ग्राफिक्स एनिमेशन सेंटर, पालतू जानवरों की दुकान और पुस्तकालय स्थित थे। इस आग में कम से कम 15 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर छात्र थे, और कई अन्य घायल हो गए। कई तस्वीरों में बिल्डिंग से छात्र कूदते दिखाई दिए और पालतू जानवरों को भी बाहर निकाला गया जिसमें अधिकांश बिल्लियां थी।
#WATCH | Uttar Pradesh | Fire broke out at a coaching centre in Aliganj, Lucknow. Firefighting and rescue operations underway. More details awaited. pic.twitter.com/2lcykbuTnO
— ANI (@ANI) June 22, 2026
15 मृतकों व घायलों के नाम की सूची
यूपी सरकार और प्रधानमंत्री की तरफ से आर्थिक सहायता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। साथ ही घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
बिल्डिंग का मालिक गिरफ्तार
जांच में अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, आपातकालीन निकास (फायर एग्जिट) की कमी और अन्य सुरक्षा खामियां भी सामने आई हैं। इसी आधार पर भवन के मालिकों और वहां संचालित संस्थानों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 110, 105, 125 और 3(5) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश फायर सर्विस एक्ट की धाराओं 6 और 10 के तहत FIR दर्ज की। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर इमारत के मालिकों राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषार कृष्ण जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया।
4 अधिकारी निलंबित
वहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
- गौरव कुमार – कार्यकारी अभियंता (संग्रह), जानकीपुरम
- कमलेंद्र कुमार सिंह – खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिकारी, इंदिरा नगर
- अनिल कुमार – सहायक अभियंता
- प्रमोद पांडे – कनिष्ठ अभियंता
सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों ने भवन के उपयोग, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की निगरानी में लापरवाही बरती। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा नियमों के पालन में गंभीर चूक मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
अवैध बिल्डिंग का दावा
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जांच में यह भी पता चला है कि भवन को कागजों में आवासीय बताया गया था, जबकि उसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। द हिन्दू की रिपोर्ट में सामने आया कि अलीगंज में बिल्डिंग सेक्टर-डी में स्थित एमएस/102/डी नंबर की यह बिल्डिंग 11 जुलाई 1980 को किराया-खरीद योजना के तहत लॉटरी के जरिए रामेश्वर सहाय के बेटे विजय कुमार को आवंटित की गई थी। इसके बाद 4 नवंबर 1980 को समझौते पर हस्ताक्षर हुए और विजय कुमार को भवन का कब्जा दे दिया गया। बाद में वर्ष 2005 में विक्रय विलेख (सेल डीड) के जरिए यह संपत्ति आधिकारिक रूप से विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज कर दी गई।
इसके बाद 19 जनवरी 2013 को विजय कुमार और उषा ने यह संपत्ति वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दी। फिर 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने संपत्ति का नामांतरण (म्यूटेशन) दोनों नए मालिकों के नाम कर दिया। करीब 1,992 वर्ग फुट क्षेत्र में बने इस भवन को 20 अगस्त 2014 को स्व-प्रमाणन भवन योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए नक्शा मंजूर किया गया था।
बाद में जांच में पता चला कि भवन में मंजूर नक्शे से अलग अवैध निर्माण किया गया था। इस पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वीरेंद्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ वर्ष 2016 में मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद 10 मई 2016 को सक्षम अधिकारी ने अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि यह आदेश जारी होने के करीब दो महीने बाद, 5 जुलाई 2016 को रद्द कर दिया गया।
लखनऊ में कोचिंग सेंटर की जाँच के लिए टीम का गठन
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद बाराबंकी जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट हो गई है। डीएम और एसपी के निर्देश पर मानकों को पूरा नहीं करने वाली लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम गठित की गई है।
जांच अभियान में फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र), भवन का कमर्शियल नक्शा, आपातकालीन निकास (EXIT) और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। यह अभियान कल से शुरू होगा। बताया जा रहा है कि बेसमेंट में नियमों के खिलाफ चल रहे कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी जिला प्रशासन ने कर ली है।
कानपुर के कोचिंग पर भी बड़ी कार्रवाई
लखनऊ में आग हादसे के बाद कानपुर में भी कोचिंग सेंटर और कॉमर्सियल इमारतों में आग बचाव, उपकरणों और जरुरी सुविधाओं की जाँच में तेजी देखने को मिली। कानपुर विकास प्राधिकरण ने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्ती तेज की, शहर के कोचिंग संस्थानों और कमर्शियल प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की… जोन-1A में 3, जोन-2B में 5, जोन-3 में 3 और जोन-4 में 5 प्रतिष्ठानों को सील किया गया।
Kanpur, Uttar Pradesh: Action has been initiated by Kanpur Development Authority against coaching institutes and commercial establishments. On June 22, 2026, the Authority carried out sealing operations against 3 establishments in Zone-1A, 5 in Zone-2B, 3 in Zone-3, and 5 in… pic.twitter.com/O4IwEyENOj
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 23, 2026
लखनऊ आग घटना पर नेताओं की प्रतिक्रिया
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ के अलीगंज में हुए हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए अपने कार्यक्रम रद्द किए और घटनास्थल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने तथा घटना की जांच के निर्देश दिए।
लखनऊ में अग्नि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पहुंचकर इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना व चिकित्सकों से घायलों के उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
सभी घायलों का समुचित उपचार… pic.twitter.com/cC9xhFasaV
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 22, 2026
- रक्षा मंत्री और लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह ने भी हादसे पर शोक जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वे भी घायलों से मिलने मेडिकल कॉलेज (KGMU) अस्पताल गए
लखनऊ में हुई हृदय विदारक दुर्घटना के बाद घटना स्थल का पहुंच कर स्थिति की जानकारी प्राप्त की एवं उसके बाद मेडिकल कॉलेज (KGMU) पहुंचकर इस हादसे में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना। ईश्वर सभी घायल व्यक्तियों को शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ करें। pic.twitter.com/bpmhr3km1X
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 22, 2026
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी लखनऊ अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने के हादसे में कई लोगों की मृत्यु और कई अन्य के घायल होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
सभी शोकाकुल परिवारों को अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 22, 2026
यूपी में यह पहली घटना नहीं है आग कि इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी आग की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। कानपुर, बाराबंकी, नोएडा, गाजियाबाद और वाराणसी जैसे शहरों में भी समय-समय पर दुकानों, गोदामों, प्रतिष्ठानों और व्यावसायिक इमारतों में आग की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं में अक्सर शॉर्ट सर्किट, अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी, अवैध निर्माण और आपातकालीन रास्तों की कमी जैसी वजहें सामने आती हैं। हर बार सरकार आग लगने की बड़ी घटना के बाद सक्रिय होती है जाँच के आदेश तो कहीं संस्थानों पर कार्रवाई भी करती है लेकिन यह कुछ ही दिन तक चलता उसके बाद फिर से कुछ दिनों बाद ही ऐसी घटना खबरों में देखने को मिलती है। सरकार और निजी संस्थानों को आपदा में बचाव के लिए जरुरी उपकरण रखने चाहिए ताकि इस तरह की घटना होने पर समय पर बचा जका सके। जो लोग निश्चिंत होकर पढ़ने आते हैं उन्हें क्या पता दूसरे ही पल में वो एक बड़ी घटना का शिकार हो जायेंगे।
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