खबर लहरिया Blog Election Results: देश के पांच राज्यों में चुनाव का फ़ाइनल रिज़ल्ट, देखें कहां किसने मारी बाजी  

Election Results: देश के पांच राज्यों में चुनाव का फ़ाइनल रिज़ल्ट, देखें कहां किसने मारी बाजी  

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों का आज इंतजार खत्म होने जा रहा है। सुबह से ही मतगणना शुरू हो चुकी है और देशभर की नजर इन चुनावी परिणामों पर टिकी हुई है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की हो रही है जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।

सांकेतिक तस्वीर

यहां मुख्य टक्कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। भाजपा इस बार राज्य में मजबूत चुनौती देती नजर आ रही है जबकि तृणमूल अपने लंबे शासन को बरकरार रखने की कोशिश में है।
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का आंकड़ा हासिल करना जरूरी है। पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी जबकि भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। इस बार भी चुनावी मुकाबला काफी गर्म रहा और कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली। चुनाव प्रचार के दौरान विकास, सरकारी योजनाएं, स्थानीय मुद्दे और बदलाव की मांग जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।
अब जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे तस्वीर साफ होती जाएगी कि बंगाल की जनता ने किसे अपना भरोसा दिया है।

भारतीय जनता पार्टी – भाजपा 179 28 207
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस – एआईटीसी 61 19 80
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – INC 2 0 2
आम जनता उन्नयन पार्टी – एजेयूपी 2 0 2
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) – सीपीआई(एम) 1 0 1
ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट – एआईएसएफ 1 0 1

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। 294 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इस आंकड़े को काफी पीछे छोड़ते हुए 204 सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। वहीं पिछले 15 सालों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस 83 सीटों तक सिमट गई। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच ही देखने को मिला। एक ओर बीजेपी ने बदलाव के मुद्दे पर जोर देते हुए पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार किया, तो दूसरी ओर टीएमसी ने बंगाली पहचान और अपनी जनकल्याण योजनाओं के सहारे जनता का भरोसा बनाए रखने की कोशिश की। नतीजे आने के बाद दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में जीत का जश्न भी मनाया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का दौर लंबे समय तक मजबूत बना रहा। उन्होंने साल 2011 में पहली बार मुख्यमंत्री बनकर राज्य में 34 साल पुराने वामपंथी शासन का अंत किया था। इसके बाद 2016 और 2021 के चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल कर सत्ता अपने पास रखी। बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी ने करीब डेढ़ दशक तक राज्य की कमान संभाली। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में जनता का रुख बदला हुआ नजर आया और इसका असर नतीजों में साफ दिखा। इस बार बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए बहुमत से कहीं ज्यादा सीटें हासिल कीं और राज्य में नई राजनीतिक शुरुआत का रास्ता खोल दिया।

असम
वहीं असम विधानसभा चुनाव के नतीजों पर इस समय सबकी नजर बनी हुई है। राज्य में इस बार मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) मैदान में है तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन चुनौती दे रहा है। शुरुआती रुझानों में भाजपा गठबंधन बढ़त बनाता नजर आ रहा है जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
असम की 126 विधानसभा सीटों में सरकार बनाने के लिए 64 सीटों का आंकड़ा पार करना जरूरी है। ऐसे में हर सीट का परिणाम काफी मायने रखता है। चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों के मुताबिक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा बोकाखात सीट से आगे चल रहे हैं। वहीं जोरहाट विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी बढ़त बनाए हुए हैं।
जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे तस्वीर साफ होती जा रही है कि असम की जनता ने किस पर भरोसा जताया है। अब देखना होगा कि राज्य में एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार बनाती है या विपक्ष कोई बड़ा उलटफेर करता है। सिर्फ असम ही नहीं पूरे पूर्वोत्तर और देशभर की नजर इन नतीजों पर टिकी हुई है।

भारतीय जनता पार्टी – भाजपा 81 1 82
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – INC 18 1 19
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट – बीओपीएफ 10 0 10
असम गण परिषद – एजीपी 10 0 10
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट – एआईयूडीएफ 2 0 2
रायजोर दल – आरजेआरडी 2 0 2
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस – एआईटीसी 1 0 1

असम विधानसभा चुनाव 2026 में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। 126 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस आंकड़े को पार करते हुए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। इस चुनाव में सीधा मुकाबला भाजपा नीत एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच देखने को मिला। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने जनता के सामने अपने-अपने मुद्दे रखे, लेकिन आखिर में मतदाताओं ने एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया। चुनाव से पहले असम की कमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हाथों में थी जो मई 2021 से इस पद पर हैं। उनके नेतृत्व में राज्य में भाजपा सरकार ने विकास, बुनियादी सुविधाओं और केंद्र के साथ तालमेल को चुनावी मुद्दा बनाया। इसका असर नतीजों में भी साफ दिखाई दिया, क्योंकि जनता ने सरकार बदलने के बजाय मौजूदा नेतृत्व को फिर मौका देना सही समझा। 2016 में कांग्रेस के लंबे शासन का अंत कर भाजपा पहली बार सत्ता में आई थी, और तब से राज्य की राजनीति में उसकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई है। इस जीत के साथ भाजपा ने असम में अपना राजनीतिक आधार और मजबूत कर लिया है।

पुडुचेरी

ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस – एआईएनआरसी 11 1 12
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम – डीएमके 5 0 5
भारतीय जनता पार्टी – भाजपा 4 0 4
तमिलागा वेट्ट्री कज़गम – टीवीके 2 0 2
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – INC 1 0 1
लाचिया जननायक काची (एलजेके) – एलजेके 1 0 1
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम – एडीएमके 1 0 1
नेयम मक्कल कज़गम – एनवाईएमके 1 0 1
स्वतंत्र – IND 3 0 3

पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 में एक बार फिर एनडीए गठबंधन ने अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। यहां विधानसभा की 30 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं जबकि 3 सदस्य केंद्र सरकार की ओर से नामित किए जाते हैं। सरकार बनाने के लिए 16 सीटों का आंकड़ा जरूरी होता है और इस बार एनडीए ने बहुमत हासिल कर सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखी है। चुनाव में मुकाबला काफी दिलचस्प रहा, क्योंकि एक तरफ ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस और बीजेपी का एनडीए गठबंधन था दूसरी ओर कांग्रेस और डीएमके का सेक्युलर डेमोक्रेटिक एलायंस मैदान में था। इसके अलावा अभिनेता विजय की नई पार्टी के चुनाव मैदान में आने से मुकाबला और भी रोचक हो गया। चुनाव से पहले पुडुचेरी की कमान मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी के हाथों में थी जो ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस के संस्थापक हैं और मई 2021 से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे थे। उनके नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने 2021 में कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को हराकर सत्ता हासिल की थी। इस बार भी जनता ने उनके काम और नेतृत्व पर भरोसा जताया, जिसके चलते गठबंधन ने फिर से जीत दर्ज की। इन नतीजों से साफ है कि पुडुचेरी में फिलहाल जनता बदलाव के बजाय मौजूदा सरकार के साथ खड़ी नजर आई और एन. रंगास्वामी ने लगातार दूसरी बार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर ली।

तमिलनाडु
बता दें कि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी जिसके नतीजों के लिए आज वोटों की काउंटिंग हो रही है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर देर रात तक सभी सीटों के फाइनल परिणाम जारी किए जा सकते हैं। तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों पर वोटों की गिनती जारी है।

तमिलागा वेट्ट्री कज़गम – टीवीके 95 12 107
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम – डीएमके 52 8 60
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम – एडीएमके 43 4 47
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – INC 4 1 5
पट्टाली मक्कल काची – पीएमके 2 2 4
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग – आईयूएमएल 2 0 2
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – सीपीआई 2 0 2
विदुथलाई चिरुथिगल काची – वीसीके 2 0 2
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – सीपीआई(एम) 2 0 2
भारतीय जनता पार्टी – भाजपा 1 0 1
देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम – डीएमडीके 1 0 1
अम्मा मक्कल मुनेत्र कज़गम – AMMKMNKZ 1 0 1

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। 234 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है और इस बार चुनावी नतीजों ने सभी को चौंका दिया। लंबे समय से राज्य की राजनीति डीएमके और एआईएडीएमके के बीच घूमती रही है, लेकिन इस बार मुकाबला अलग रहा। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके पहली बार चुनावी मैदान में उतरी और आते ही मजबूत दावेदारी पेश की। ताज़ा नतीजों के मुताबिक टीवीके 109 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जिसने तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। चुनाव से पहले तमिलनाडु की कमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हाथों में थी जो मई 2021 से इस पद पर थे। उनकी पार्टी डीएमके ने 2021 में एआईएडीएमके के 10 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी लेकिन इस बार जनता का रुख बदला हुआ नजर आया। इतना ही नहीं, स्टालिन को अपनी कोलाथुर सीट से हार का सामना भी करना पड़ा। वहीं विजय की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर यह दिखा दिया कि तमिलनाडु की राजनीति अब सिर्फ दो बड़ी पार्टियों तक सीमित नहीं रही। पांच साल बाद सत्ता में यह बदलाव राज्य की राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।

केरल
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर राज्य में उत्सुकता बनी हुई है। यहां 140 विधानसभा सीटों के लिए कुल 883 उम्मीदवार मैदान में थे और सरकार बनाने के लिए 71 सीटों का बहुमत जरूरी है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा यानी यूडीएफ और पिछले दो कार्यकाल से सत्ता में रहे वाम लोकतांत्रिक मोर्चा यानी एलडीएफ के बीच माना जा रहा है। एक तरफ एलडीएफ अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है तो दूसरी ओर कांग्रेस गठबंधन जोरदार वापसी की उम्मीद लगाए हुए है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भी राज्य की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
पिछले कुछ चुनावों में केरल की राजनीति दो बड़े गठबंधनों के बीच ही घूमती रही है लेकिन इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस गठबंधन उत्साह में है जबकि एलडीएफ अपने कामकाज के दम पर जनता का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश कर रहा है। अब सबकी नजर नतीजों पर है जो यह तय करेंगे कि केरल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – INC 63 0 63
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – सीपीआई(एम) 26 0 26
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग – आईयूएमएल 22 0 22
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – सीपीआई 8 0 8
केरल कांग्रेस – केईसी 7 0 7
क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी – आरएसपी 3 0 3
भारतीय जनता पार्टी – भाजपा 3 0 3
राष्ट्रीय जनता दल – आरजेडी 1 0 1
भारतीय क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी – आरएमपीओआई 1 0 1
केरल कांग्रेस (जैकब) – केईसी (जे) 1 0 1
कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी केरल राज्य समिति – सीएमपीकेएससी 1 0 1
स्वतंत्र – IND 4 0 4

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। 140 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 71 सीटों का आंकड़ा जरूरी होता है, और इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ ने बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी का रास्ता साफ कर लिया है। केरल में हमेशा की तरह इस बार भी मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच रहा। एक तरफ कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ था तो दूसरी ओर सीपीआई-एम के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एलडीएफ मैदान में था। दोनों गठबंधनों ने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा लेकिन जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में फैसला सुनाया। चुनाव से पहले केरल की कमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के हाथों में थी, जो साल 2016 से लगातार राज्य की सत्ता संभाल रहे थे। 2021 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर केरल की उस पुरानी परंपरा को तोड़ा था जिसमें हर पांच साल बाद सरकार बदल जाती थी। लेकिन इस बार मतदाताओं ने फिर से बदलाव का रास्ता चुना और करीब 10 साल बाद सत्ता की बागडोर कांग्रेस गठबंधन के हाथों में जाती दिख रही है। इन नतीजों से साफ है कि केरल की जनता ने लंबे समय बाद एक बार फिर नई सरकार को मौका देने का मन बनाया है।

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026: बागदा से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार मधुपरना ठाकुर ने आरोप लगाया कि “मुस्लिम बूथों पर तृणमूल कांग्रेस का पिछड़ना संभव नहीं है; इससे संकेत मिलता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है,” क्योंकि भाजपा पश्चिम बंगाल में मजबूत बढ़त बनाए हुए है।

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममताबनर्जी ने अपनी पार्टी के मतगणना एजेंटों से मतगणना स्थल न छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हिम्मत मत हारिए, सूर्यास्त के बाद हम जीतेंगे।”

पश्चिम बंगाल के बाराबनी स्थित देवभूमि कार्यालय में आग लगने से लेकर क्षेत्र तक का क्षेत्र-अंगूठे में मच गया। अवशेषों को देखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बल (सीएएफ) ने भौतिक स्थिति को बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज करने की कोशिश की। 

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के दौरान कोलकाता में टीएमसी के एक अस्थायी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई।

चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों से कई राज्यों की तस्वीरें काफी हद तक साफ हो गई हैं। असम और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी बढ़त हासिल की है और दोनों राज्यों में पार्टी को स्पष्ट जीत मिल रही है। वहीं तमिल में टीवीके ने बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई थी और सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरकर सामने आई है।

केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ़ को जनता का समर्थन मिल रहा है और गठबंधन की भारी जीत बढ़ रही है। दूसरी ओर पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी कि मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और वहां उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।

पश्चिम बंगाल में रात दस बजे तक के आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी 184 पार्टी की जीत दर्ज की गई थी, जबकि 23 पार्टी की बढ़त बनी हुई थी। वहीं कांग्रेस ने 64 वें क्वार्टर में जीत हासिल की और 16 वें राउंड में आगे चल रही थी। इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर सीट पर देखने को मिला, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।

तमिल में भी अविश्वासी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यहां कोलाथुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को टीवी के प्रतियोगी जनरल बाबू ने हरा दिया। इस जीत के बाद तमिल की राजनीति में टीवी की झलक और मजबूती दिखाई दे रही है।

वहीं असम में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से दमदार प्रदर्शन किया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक पार्टी 81 पर जीत दर्ज की गई थी और एक सीट पर आगे चल रही थी। दूसरी ओर कांग्रेस ने 18 वें स्थान पर जीत हासिल की, जबकि एक सीट पर उसे बढ़त मिली थी। इन सब से साफ है कि असम में बीजेपी ने अपनी पकड़ बना ली है।

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