बुंदेलखंड का चित्रकूट क्षेत्र पिछड़ा कहलाता है और चित्रकूट का मानिकपुर इलाका पाठा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। लेकिन चित्रकूट के पाठा इलाके में एक ऐसी जगह भी है, जहां पहुंचने का रास्ता घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और गहरी खाइयों के बीच से होकर गुजरता है। रास्ते में जंगल का सन्नाटा और वन्यजीवों का डर जरूर महसूस होता है, लेकिन जैसे ही पहाड़ों के बीच से पानी की आवाज सुनाई देती है, सारी थकान और डर पीछे छूटने लगता है। यही है धारकुंडी।
रिपोर्ट व लेखन – नाज़नी
देखने में भले ही यह क्षेत्र कठिन और पिछड़ा नजर आए, लेकिन इन्हीं पहाड़ों ने अपने भीतर प्रकृति की ऐसी खूबसूरती छिपा रखी है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।
‘धार’ और ‘कुंडी’ से बना धारकुंडी
धारकुंडी नाम भी यहां के प्राकृतिक स्वरूप से जुड़ा माना जाता है। ‘धार’ यानी पानी की धारा और ‘कुंडी’ यानी जलकुंड। पहाड़ों के बीच से बहता पानी एक स्थान पर इकट्ठा होकर कुंड का रूप लेता है। इसी प्राकृतिक संरचना से इस जगह का नाम धारकुंडी पड़ा। धारकुंडी का संबंध धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं से भी बताया जाता है। सरकारी पर्यटन विवरण के मुताबिक यहां स्थित कुंड जमीन की सतह से करीब 100 मीटर नीचे है।
बारिश में बदल जाता है धारकुंडी का रूप
बरसात के दिनों में जब पहाड़ों से पानी उतरता है, तो धारकुंडी का पूरा रूप बदल जाता है। गर्मियों में शांत नजर आने वाली चट्टानें बारिश के मौसम में पानी की धाराओं से भर जाती हैं। रास्ते के दोनों तरफ हरियाली और घनी हो जाती है जबकि झरनों से गिरते पानी की आवाज जंगल की खामोशी को लगातार तोड़ती रहती है।
चित्रकूट से करीब 50 किलोमीटर दूर पहाड़ों और जंगलों के बीच स्थित धारकुंडी बरसात के मौसम में खास तौर पर आकर्षक हो जाती है। बारिश के बाद पहाड़ों से छोटी-बड़ी जलधाराएं नीचे उतरती हैं। कहीं चट्टानों के बीच से पानी की पतली धार बहती दिखाई देती है तो कहीं यही पानी झरने का रूप ले लेता है।
चारों तरफ फैली हरियाली, चट्टानों से टकराते पानी की आवाज और पहाड़ों के बीच बहती धाराएं ऐसा दृश्य बनाती हैं, जैसे जंगल ने बारिश के मौसम में अपनी कोई छिपी हुई तस्वीर सामने रख दी हो। इसी नजारे को देखने के लिए पर्यटक यहां पहुंचते हैं और कुछ देर के लिए प्रकृति के बीच ठहर जाते हैं।
खूबसूरती के साथ जंगल का डर भी
धारकुंडी की खूबसूरती जितनी आकर्षित करती है, यहां तक पहुंचने का रास्ता उतना ही रोमांच पैदा करता है। जंगल के बीच से गुजरते रास्ते में ऊंचे-नीचे पहाड़, गहरी खाइयां और घना जंगल दिखाई देता है।
कई जगह वन्यजीवों को लेकर चेतावनी भी दिखाई देती है। कहीं अजगर से सावधान रहने की सूचना मिलती है तो कहीं जंगल की खामोशी ही यह एहसास करा देती है कि यहां इंसानों से ज्यादा प्रकृति का राज है। लेकिन शायद यही रोमांच लोगों को और ज्यादा आकर्षित करता है।
कोई झरने के लिए आता है, कोई सुकून के लिए
धारकुंडी पहुंचने वाले लोगों की वजह अलग-अलग है। कोई झरने और पहाड़ों को देखने आता है, कोई कुंड में जाता है, तो कोई आश्रम और साधना स्थल देखने पहुंचता है। कई लोग ऐसे भी हैं जो बस कुछ घंटे जंगल के बीच प्रकृति के साथ बिताना चाहते हैं।
दरभंगा से आई बिंदु ने बताया कि वह पहली बार धारकुंडी आई हैं। अभी वह पूरी तरह नीचे भी नहीं उतरी हैं, लेकिन दूर से ही झरने और आसपास का नजारा देखकर उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।
मध्य प्रदेश के कटनी जिले से आईं माया गुप्ता भी पहली बार यहां पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अभी तो शुरुआत ही हुई है, लेकिन यहां आकर उन्हें काफी सुकून महसूस हो रहा है। दूर से दिखाई देता झरना उन्हें बेहद खूबसूरत लगा।
रीवा से अपने परिवार के साथ आए गोली दर्शन के साथ धारकुंडी घूमने पहुंचे। उनके साथ आए आदित्य ने बताया कि वह पहले भी यहां आ चुके हैं लेकिन बरसात में धारकुंडी का नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देता है। पहाड़ों के बीच चारों तरफ से गिरता पानी इस जगह को बेहद खूबसूरत बना देता है।
सतना से आईं सुशीला बताती हैं कि वह अक्सर परिवार के साथ यहां आती रहती हैं। उनका कहना है कि बच्चे यहां खूब आनंद लेते हैं और इस उम्र में उन्हें भी ऐसी खूबसूरत जगह घूमने का मौका मिल जाता है। इस बार भी पूरा परिवार और रिश्तेदार एक साथ यहां पहुंचे हैं।
जब खूबसूरती खतरे में बदल जाती है
बारिश धारकुंडी को खूबसूरत जरूर बनाती है लेकिन यही बारिश कभी-कभी खतरा भी पैदा कर देती है। वर्ष 2022 में तेज बारिश के दौरान धारकुंडी आश्रम में पहाड़ों से अचानक पानी आने और जलभराव की खबर सामने आई थी।
इसलिए यहां की खूबसूरती को देखने के साथ सावधानी भी जरूरी है। पहाड़ों और जंगल के बीच बहते पानी का आकर्षण जितना बड़ा है उसका तेज बहाव उतना ही खतरनाक हो सकता है।
धारकुंडी को सिर्फ एक झरना या पर्यटन स्थल समझना शायद इसके पूरे रूप को समझना नहीं होगा। यहां खूबसूरती भी है और जंगल का डर भी। पहाड़ रास्ता कठिन बनाते हैं लेकिन उन्हीं पहाड़ों से उतरता पानी इस जगह की सबसे बड़ी पहचान बन जाता है।
धारकुंडी में खूबसूरती भी है और ताकत भी। जंगल आकर्षण भी है और जोखिम भी। पहाड़ रास्ता रोकते भी हैं और उन्हीं पहाड़ों से उतरता पानी इस जगह की पहचान भी बनाता है। शायद यही धारकुंडी का सबसे बड़ा आकर्षण है। यहां प्रकृति को सिर्फ देखा नहीं जाता बल्कि उसके पूरे रूप को महसूस किया जाता है। जो लोग यहां आते हैं वे पहले जंगल और उसके सन्नाटे के बीच से गुजरते हैं। कहीं-कहीं मन में डर भी होता है फिर धारकुंडी की बहती धार उस डर को अपने साथ बहा ले जाती है। इसके बाद महसूस होता है—चारों तरफ सिर्फ सुकून ही सुकून है।
चित्रकूट के धारकुंडी कैसे पहुंचे
चित्रकूट के धारकुंडी बस का रास्ता
सतना से धारकुंडी के लिए सीधी बस उपलब्ध होने की जानकारी जिला प्रशासन की वेबसाइट पर दी गई है। अगर आप चित्रकूट से जा रहे हैं तो स्थानीय बस/टैक्सी से धारकुंडी जाने की उपलब्धता पहले पता कर लेना बेहतर है, क्योंकि यह सामान्य पर्यटन मार्ग की तरह नियमित सार्वजनिक परिवहन वाला रास्ता नहीं है।
ट्रेन से आने वालों के लिए
चित्रकूट आने के लिए सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन चित्रकूट धाम कर्वी है। यह स्टेशन देश के कई प्रमुख शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा है। स्टेशन से आगे धारकुंडी के लिए टैक्सी या स्थानीय वाहन लेना सुविधाजनक रहेगा। सतना से धारकुंडी के लिए सीधी बस उपलब्ध होने की जानकारी जिला प्रशासन की वेबसाइट पर दी गई है। अगर आप चित्रकूट से जा रहे हैं तो स्थानीय बस/टैक्सी से धारकुंडी जाने की उपलब्धता पहले पता कर लेना बेहतर है, क्योंकि यह सामान्य पर्यटन मार्ग की तरह नियमित सार्वजनिक परिवहन वाला रास्ता नहीं है।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’



