खबर लहरिया Blog A Passport is Not Proof of Indian Citizenship:क्या पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं? विदेश मंत्रालय के बयान से क्यों मचा विवाद 

A Passport is Not Proof of Indian Citizenship:क्या पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं? विदेश मंत्रालय के बयान से क्यों मचा विवाद 

24 जून 2026 की शाम से सोशल मीडिया में एक सवाल लगातार चर्चे में है। खबरों में कहा जा रहा है कि पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है तो फिर कोई व्यक्ति कैसे साबित करेगा कि वह भारत का नागरिक है? इसी सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: एआई)

इंडिया टुडे के रिपोर्ट अनुसार विदेश मंत्रालय ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर बताया कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा के लिए एक अधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराना है। इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण पत्र नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गया अगर पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है तो और क्या है? हालाँकि यह भी सच है कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। पासपोर्ट के पीछे भी यह लिखा होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति है और जरुरत पड़ने पर सरकार इसे वापस ले सकती है। 

सोशल मीडिया पर छाई बहस 

जानेमाने लेखक और पुरस्कृत विजेता जावेद अख्तर ने अपने एक्स पर इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘बेतुका’ बताया। उन्होंने लिखा “विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज़ है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को बिना पूरी तरह आश्वस्त हुए ही यह यात्रा दस्तावेज़ दे रहे हैं कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है?? यह तो सरासर बेतुका है।” 

वकील और कांग्रेस के पूर्व नेता कपिल सिब्बल ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। लिखा है कि “विदेश मंत्रालय, 24 जून 2026: “पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का दस्तावेज नहीं।” तो फिर नागरिकता का प्रमाण कौन सा दस्तावेज है? विदेश मंत्रालय मेरी नागरिकता पर संदेह कर सकता है, मुझे मेरे वोट से वंचित कर सकता है। नतीजा: भाजपा चुनाव जीतती है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में जाएगा!”

शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे एक्स पर लिखते हैं कि “अगर विदेश मंत्रालय मानता है कि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज़ नहीं है: 1) पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस क्या जाँच करती है? 2) क्या हमारा देश गैर-भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज़ के रूप में पासपोर्ट देता है? 3) क्या इस घोषणा से अन्य देशों के मन में यह संदेह पैदा नहीं होगा कि क्या गैर-भारतीयों को भारतीय पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज़ के रूप में मिलते हैं? अपनी बेहद उलझी हुई विदेश नीति के अलावा विदेश मंत्रालय और कितना हास्यास्पद हो सकता है?”

नागरिकता के नियम और दस्तावेज 

इसी बीच नागरिकता से जुड़े दूसरे दस्तावेजों पर पर भी चर्चा शुरू hoगई। सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं सिर्फ दस्तावेज का पहचान है। वहीं वोटर आईडी भी नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं माना जाता। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पहचान, पते के सत्यापन और मतदान के अधिकार के लिए किया जाता है। नागरिकता क़ानून के अनुसार 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाले लोग जन्म से भारतीय नागरिक माने जाते हैं। इसके बाद जन्म लेने वालों के लिए माता-पिता की नागरिकता से जुड़े अलग-अलग नियम लागू होते हैं। 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्मे व्यक्ति को जन्म से नागरिकता तभी मिलेगी, जब दोनों माता-पिता भारतीय हों या एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। 

पासपोर्ट सेवाओं में सुधार और आकंडे 

इंडिया टुडे के रिपोर्ट अनुसार विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सवाओं से जुड़े नए आकंडे भी जारी किए हैं। मंत्रालय के अनुसार साल 2025 में करीब 1.5 करोड़ पासपोर्ट और दूसरी संबंधित सेवाएँ दी गई जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट शामिल है। मंत्रालय का कहना है कि अब पुलिस सत्यापन में लगने वाले समय को छोड़ दें तो सामान्य तौर पर छह कार्यदिवस के भीतर पासपोर्ट जारी किया जा रहा है। पासपोर्ट सेवा केंद्रों में लोगों का औसत समय भी घटकर 45 मिनट से कम रह गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह सुधार इसलिए संभव हुआ क्योंकि पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है।

पासपोर्ट क्या है? क्यों इस्तेमाल किया जाता है? 

पासपोर्ट भारत सराकर की ओर से जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेश यात्रा के दौरान किया जाता है। किसी भी दूसरे देश में जाने के लिए वीज़ा इसी पासपोर्ट पर जारी किया जाता है इसलिए विदेश यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के लिए यह जरुरी होता है। जब कोई भारतीय नागरिक विदेश में होता है, तब उसकी पहचान और राष्ट्रीयता से जुड़ी जानकारी का सबसे प्रमुख सरकारी दस्तावेज पासपोर्ट ही माना जाता है। इसमें व्यक्ति का नाम, जन्मतिथि, फोटो और दूसरी जरूरी जानकारी दर्ज होती है, जिससे उसकी पहचान की पुष्टि की जाती है।

1 जुलाई से बढ़ जाएगी पासपोर्ट की फीस 

दूसरी तरफ 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाना और उससे जुड़ी कई सेवाओं का इस्तेमाल करना महंगा होने वाला है। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं की नई फीस तय कर दी है। इसी 1 जुलाई से लागू होगी। 

जिन लोगों को जल्दी पासपोर्ट चाहिए और वे तत्काल सेवा का विकल्प चुनते हैं उन्हें भी अब ज़्यादा पैसे देने होंगे। 36 पेज वाले तत्काल पासपोर्ट की फीस 3,500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए कर दी गई है। वहीं 60 पेज वाले तत्काल पासपोर्ट के लिए अब 6,000 रुपए चुकाने होंगे जबकि पहले इसकी फीस 4,000 रुपए थी। अगर पासपोर्ट खो जाए या खराब हो जाए या दोबारा जारी कराना हो तब भी यही नई दरें लागू होंगे। 36 पेज वाले पासपोर्ट के री-इश्यू के लिए अब 5,000 रुपए और 60 पेज वाले पसपोर्ट के लिए 6,000 रुपए देने होंगे। 

वहीं जिन पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने वालों पर भी नई फीस लागू होंगे। 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपए से बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दी गई है। वहीं 60 पेज वाले पासपोर्ट के लिए अब 3,500 रुपये देने होंगे, जबकि पहले इसकी फीस 2,000 रुपये थी। यानी 1 जुलाई के बाद पासपोर्ट से जुड़ी लगभग सभी सेवाओं के लिए लोगों को पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

 

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