छत्तीसगढ़ के पारधी समुदाय के हजारों परिवार आज भी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कभी वंशावली नहीं है, कभी ज़मीन के दस्तावेज़ नहीं हैं, तो कभी सरकारी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं। जाति प्रमाण पत्र न होने का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई, छात्रवृत्ति, आरक्षण, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर पड़ रहा है। सवाल यह है कि जो समुदाय दशकों पहले स्थायी जीवन अपना चुका है, उसकी पहचान का संकट अब तक क्यों खत्म नहीं हुआ?
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