खबर लहरिया Blog बिहार में बन रहा यह डिजिटल श्मशान घाट क्यों है इतना खास? 

बिहार में बन रहा यह डिजिटल श्मशान घाट क्यों है इतना खास? 

बिहार में अंतिम संस्कार की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर काम शुरू किया है। राज्य में 40 जगहों पर शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं जिनमें से करीब 20 अब अपने अंतिम निर्माण चरण में हैं। उत्तरी बिहार में 12 और दक्षिणी बिहार में 8 शवदाह गृह तैयार हो चुके हैं और कुछ जल्द शुरू होने वाले हैं।  

रिपोर्ट – सुमन, लेखन – रचना 

बैकुंठ द्वार (फोटो साभार: सुमन)                

इन्हीं में पटना जिले का बांस घाट भी शामिल है। जहां पहले से श्मशान घाट मौजूद है लेकिन अब एक नया, आधुनिक और डिजिटल सुविधाओं से लैस शवदाह गृह बनाया जा रहा है। इस नए श्मशान में लोग अंतिम संस्कार के लिए पहले से ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। साथ ही गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं ताकि आस्था भी बनी रहे और सफाई भी कायम रहे। लोगों से मिली जानकारी के अनुसार इसमें करीब 4.5 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 89.40 करोड़ रुपये है जो पुराने 1.24 एकड़ वाले श्मशान घाट से लगभग तीन गुना बड़ा है।

ऊपर तस्वीर में देख सकते हैं कि श्मशान घाट में आने-जाने के लिए दो बड़े और खास गेट बनाए गए हैं। एक गेट का नाम “मोक्ष द्वार” है और दूसरे का “बैकुंठ द्वार”। ये दोनों ही गेट काफी भव्य और ध्यान खींचने वाले हैं। खासकर “मोक्ष द्वार” करीब 42 फुट ऊंचा बनाया गया है जिस पर ओम का प्रतीक चिन्ह लगा है। यह चिन्ह कांच से बनाया गया है जो इसे और आकर्षक बनाता है। गेट पर साफ तौर पर “मोक्ष द्वार” लिखा हुआ है जिसे देखकर लोगों को एक आध्यात्मिक एहसास भी होता है।                     

नीचे फोटो में दिख रहा यह ऑफिस श्मशान घाट के अंदर बनाया गया है जहां नगर निगम के कर्मचारी बैठेंगे। अभी यहां स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है लेकिन ऑफिस की पूरी बिल्डिंग तैयार हो चुकी है। यह सुविधा इसलिए बनाई गई है ताकि अगर किसी को कोई दिक्कत हो या किसी तरह की जानकारी चाहिए तो लोग सीधे यहां आकर संपर्क कर सकें और आगे की प्रक्रिया आसानी से पूरी कर सकें।     

श्मशान घाट के अंदर ऑफ़िस (फोटो साभार: सुमन)

फोटो में आप “प्रतीक्षालय” लिखा हुआ साफ देख सकते हैं। श्मशान घाट में लोगों की सुविधा के लिए दो प्रतीक्षालय बनाए गए हैं। प्रतीक्षालय नंबर 1 और नंबर 2। यहां वे लोग बैठ सकते हैं जो अपने परिजन का शव लेकर आते हैं और अंतिम संस्कार से पहले इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए पूरा कमरा तैयार किया गया है हालांकि अभी यह बंद है और इसमें ताला लगा हुआ है। जैसे ही यह शुरू होगा लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

प्रतीक्षालय नंबर 1, मोक्ष द्वार से थोड़ा आगे बाईं तरफ बनाया गया है। इसके बाहर बड़ा सा बोर्ड लगा है जिस पर साफ लिखा है “प्रतीक्षालय नंबर 1” ताकि लोगों को इसे ढूंढने में कोई दिक्कत न हो।

प्रतीक्षालय (फोटो साभार: सुमन)               

अब हम आपको अंदर की ओर जो व्यवस्था है उसके बारे में बताते हैं जहां अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की गई है। श्मशान घाट में एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार करने की सुविधा बनाई गई है जिसके लिए अलग-अलग तरीके से इंतजाम किए गए हैं।

सबसे पहले बात करें परंपरागत तरीके की। फोटो में आप देख सकते हैं कि सीमेंट से बनी 8 चिताएं (चबूतरे) तैयार की गई हैं जहां एक साथ 8 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। यानी अगर कई परिवार एक साथ आते हैं और अपने रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहते हैं तो उनके लिए पूरी व्यवस्था मौजूद है। यह जगह कार्यालय के ठीक सामने बनाई गई है ताकि लोगों को आसानी हो।

यहां लकड़ी की भी पूरी व्यवस्था रखी गई है जिससे लोगों को बाहर से लकड़ी खरीदने की जरूरत न पड़े। पास में लकड़ियां सलीके से रखी गई हैं जैसा कि फोटो में भी देखा जा सकता है। परिवार के लोग यहीं चिता पर शव रखकर पूरे विधि-विधान और पूजा-पाठ के साथ अंतिम संस्कार कर सकते हैं। इस स्थान की पहचान के लिए एक बोर्ड भी लगाया गया है जिस पर “परंपरागत अंतिम संस्कार स्थल” लिखा है ताकि लोगों को इसे ढूंढने और समझने में कोई परेशानी न हो।                      

चबूतरे (फोटो साभार: सुमन)

फोटो में आप देख सकते हैं कि “लकड़ी शवदाह ग्रह 1” लिखा हुआ है। इसी तरह यहां “लकड़ी शवदाह ग्रह 2” और “लकड़ी शवदाह ग्रह 3” भी बनाए गए हैं। यानी कुल तीन लकड़ी शवदाह स्थल हैं। हर एक में एक साथ दो शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है इस हिसाब से यहां एक समय में 6 शवों के अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध है।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए की गई है जो कम खर्च में अपने रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। यहां स्टील का एक ढांचा (चैंबर) बना हुआ है जिसमें नीचे लकड़ी लगाई जाती है और उसके ऊपर शव रखा जाता है। फिर ऊपर से भी लकड़ी रखकर इसे अंदर की ओर सरका दिया जाता है जिससे कम समय में करीब एक घंटे के अंदर अंतिम संस्कार पूरा हो जाता है।

इसमें कम लकड़ी लगती है जिससे खर्च भी कम होता है और लोगों की आस्था के अनुसार लकड़ी से अंतिम संस्कार भी हो जाता है। बाहर से देखने पर आपको स्टील का ढांचा नजर आएगा जिसमें थोड़ी गहराई दी गई है ताकि प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सके। कुल मिलाकर अगर एक साथ 6 परिवार यहां आते हैं तो उनके लिए यह सुविधा एक साथ उपलब्ध है। अब आगे बढ़ते हैं और बाकी व्यवस्थाएं देखते हैं।            

लकड़ी की भी व्यवस्था (फोटो साभार: सुमन)

फोटो में आप विद्युत शवदाह गृह लिखा हुआ देख सकते हैं। यानी यहां बिजली के जरिए अंतिम संस्कार की सुविधा दी गई है। ऐसे कुल दो विद्युत शवदाह स्थल बनाए गए हैं और हर एक में एक साथ दो शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इस तरह यहां एक समय में 4 शवों का अंतिम संस्कार संभव है।इन जगहों को पूरी तरह से कवर किया गया है अंदर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगा है और सुरक्षा के लिए ताला भी लगाया गया है ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।

फोटो में ऊपर की ओर जाते लंबे पाइप भी दिख रहे हैं। इनका काम यह है कि जब अंदर अंतिम संस्कार होता है तो उससे निकलने वाला धुआं सीधे ऊपर की तरफ चला जाए। इससे आसपास धुआं नहीं फैलता और पर्यावरण भी कम प्रदूषित होता है।                       

विद्युत शवदाह गृह (फोटो साभार: सुमन)

फोटो में आप देख सकते हैं कि यहां स्विमिंग पूल की तरह बड़े-बड़े तालाब बनाए गए हैं। इनमें गंगा नदी का पानी लाया जाता है क्योंकि बांस घाट गंगा किनारे स्थित है। इसी पानी में लोग अपने परिजनों की अस्थियां विसर्जित कर सकते हैं। इसके लिए साफ तौर पर “अस्थि विसर्जन” का बोर्ड भी लगाया गया है। पास में ही “स्नान गृह” की भी व्यवस्था की गई है जहां लोग स्नान कर सकते हैं।                  

अस्थि विसर्जन स्थल (फोटो साभार: सुमन)

यहां एक अलग ब्लॉक बनाकर ऑफिस तैयार किया गया है। इस ऑफिस में लोगों के जरूरी कागज़ जैसे जन्म या मृत्यु से जुड़े सर्टिफिकेट, आसानी से बन सकेंगे ताकि उन्हें इधर-उधर भटकना न पड़े।

साथ ही अगर किसी को पहले से अंतिम संस्कार के लिए स्लॉट बुक करना है तो उसकी ऑनलाइन सुविधा भी यहां उपलब्ध होगी। इसके लिए एक वेबसाइट भी बनाई गई है, जिसकी जानकारी यहीं से दी जाएगी ताकि लोग आसानी से बुकिंग कर सकें और पूरी प्रक्रिया बिना परेशानी के पूरी हो सके।      

ऑनलाइन सुविधा के लिए ऑफिस (फोटो साभार: सुमन)

काम कर रहे लोगों से बातचीत में पता चला कि अभी श्मशान घाट का काम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मेंटेनेंस इंचार्ज राकेश कुमार जिन्हें आप फोटो में देख सकते हैं उन्होंने बताया कि वे पिछले 3 साल से इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं। जब इसकी शुरुआत हुई थी तब से ही यहां काम कर रहे हैं। फिलहाल उन्हें मेंटेनेंस की जिम्मेदारी दी गई है और अभी कई छोटे-बड़े काम बाकी हैं जैसे पेड़-पौधे लगाना, टूटी-फूटी चीजों को ठीक करना, पेंटिंग करना आदि। उन्होंने बताया कि पहले यहां रोज 70 से 80 लोग काम करते थे लेकिन अब काम लगभग अंतिम चरण में है इसलिए 8 से 10 लोग ही रोज काम कर रहे हैं।     

मेंटेनेंस इंचार्ज राकेश कुमार (फोटो साभार: सुमन)

राकेश कुमार ने यह भी बताया कि 26 मार्च 2026 को इस श्मशान घाट का ऑनलाइन उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। इसके बाद 28 तारीख को वे खुद सुबह करीब 10 बजे यहां पहुंचे थे। उन्होंने करीब 5 मिनट रुककर पूरे काम को देखा इसकी तारीफ की और इसे पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बताया।

हालांकि अभी तक इस श्मशान घाट को आधिकारिक तौर पर किसी विभाग को सौंपा नहीं गया है इसलिए यह पूरी तरह चालू नहीं हुआ है। उम्मीद है कि अगले 1–2 महीने में यानी मई तक यह शुरू हो जाएगा। फिलहाल जो लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं वे अभी पुराने श्मशान घाट का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

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