चित्रकूट जिले का रसिन गांव कभी अपनी जल विरासत के लिए प्रसिद्ध था। बुजुर्गों के अनुसार यहां लगभग 80 कुएं और 84 तालाब हुआ करते थे। कहा जाता है कि इन जल स्रोतों का निर्माण परमार वंश के राजाओं ने करवाया था ताकि गांव और सेना को कभी पानी की कमी न हो। लेकिन समय के साथ तालाबों पर अतिक्रमण हुआ, कई तालाब मिट्टी से भर गए और कुएं इतिहास बनकर रह गए। आज स्थिति यह है कि बांध होने के बावजूद किसान पर्याप्त सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं और कई लोग सिर्फ एक फसल उगाने को मजबूर हैं।
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