खबर लहरिया Blog Banda News: 8 लाख का मिनी सचिवालय बना भूसा रखने का गोदाम, छोटे कमरे से चल रही ग्राम पंचायत

Banda News: 8 लाख का मिनी सचिवालय बना भूसा रखने का गोदाम, छोटे कमरे से चल रही ग्राम पंचायत

बाँदा के महुआ ब्लॉक में स्थित एक मिनी सचिवालय की हालत एक दम जर्जर है। यहां करीब 12 हजार की आबादी और लगभग 4,500 मतदाता हैं। इतनी बड़ी ग्राम पंचायत होने के बावजूद पंचायत का पूरा काम आज भी एक छोटे से पंचायत भवन के कमरे से संचालित हो रहा है। जानकारी के मुताबिक इस सचिवालय का निर्माण कार्य बसपा पार्टी के काल (2011) में शुरू किया गया था लेकिन सरकार बदल जाने के कारण अधूरा ही रह गया। गांव में सचिवालय का निर्माण इसलिए किया जाता है ताकि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन, मनरेगा, आवास, पंचायत से जुड़े दस्तावेज और अन्य सरकारी कार्य एक ही स्थान पर बेहतर व्यवस्था के साथ हो सके। लेकिन सचिवालय की जर्जर स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है। 

बांदा जिले के महुआ ब्लॉक के महुआ गांव में बने मिनी सचिवालय की स्थिति (फोटो साभार: गीता)

रिपोर्ट – गीता, लेखन – सुचित्रा 

महुआ गांव के ग्राम प्रधान बेटा लाल बताते हैं कि सचिवालय का निर्माण कार्य साल 2011-12 में बसपा (बहुजन समाज पार्टी) सरकार के दौरान शुरू हुआ था। सरकार बदलने के बाद 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आ गई और भवन का काम अधूरा रह गया। इसके बाद सचिवालय निर्माण की जिम्मेदारी किसी और को नहीं दी गई और न ही नई सरकार ने इसकी सुध ली। परिणामस्वरूप भवन में बाउंड्री वॉल, शौचालय, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं बन सकीं। रखरखाव न होने के कारण भवन धीरे-धीरे जर्जर हो गया।

पंचायत भवन के छोटे कमरे से हो रहा काम

गांव के निवासी गोरेलाल बताते हैं कि ग्राम पंचायत का पूरा काम आज भी पंचायत भवन के एक छोटे से कमरे से संचालित होता है, जहां पंचायत सहायक बैठते हैं। ग्रामीण अपने जरूरी काम वहीं करवा लेते हैं। यदि कोई काम वहां नहीं होता तो ब्लॉक कार्यालय चले जाते हैं। चूंकि महुआ में ही ब्लॉक कार्यालय भी है, इसलिए लोगों को सचिवालय की कमी ज्यादा महसूस नहीं होती।

भूसा रखने के काम आ रही इमारत

ग्राम प्रधान का कहना है कि भवन लंबे समय से खाली पड़ा था और उसकी खिड़कियां व दरवाजे भी टूट चुके हैं। इसलिए फिलहाल इसमें गौशाला के लिए इकट्ठा किया गया भूसा रखा जाता है, ताकि वह बारिश में खराब न हो। उनके अनुसार इस समय भवन किसी अन्य उपयोग के योग्य नहीं है।

ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप 

एक ओर लाखों रुपये का सचिवालय बेकार पड़ा है, वहीं दूसरी ओर पंचायत का काम छोटे से कमरे में चल रहा है, जहां ग्रामीणों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन का उपयोग शुरू कर दिया जाता तो गांव के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलतीं। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय प्रक्रियाओं के कारण सरकारी धन से बना यह भवन बदहाली का शिकार हो गया। सचिवालय के बाहर कूड़े का ढेर लगा रहता है और आसपास के लोग वहीं कचरा फेंक देते हैं।

बांदा जिले के महुआ ब्लॉक के महुआ गांव में बने मिनी सचिवालय की स्थिति (फोटो साभार: गीता)

मरम्मत कर बारात घर बनाने का प्रस्ताव

ग्राम प्रधान बेटा लाल का कहना है कि सचिवालय की मरम्मत कर उसे बारात घर में बदलने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। बजट मिलते ही भवन की बाउंड्री वॉल, मुख्य गेट, शौचालय और पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। साथ ही टूटे हुए खिड़की-दरवाजों की मरम्मत कर भवन को पूरी तरह तैयार कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को बारात और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इसका उपयोग मिल सके।

जब उनसे पूछा गया कि यह काम कब तक पूरा होगा, तो उन्होंने बताया कि फिलहाल अगले छह महीने का कार्यकाल। उन्होंने कहा कि वह सदर विधायक से बजट की मांग करेंगे और स्वीकृति मिलते ही सचिवालय की मरम्मत का कार्य जल्दी ही शुरू कराया जाएगा।

महुआ गांव का यह सचिवालय सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में लापरवाही की एक मिसाल बनता दिख रहा है। जिस भवन को ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए बनाया गया था, वह वर्षों से बेकार पड़ा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी इस भवन की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई और इसे इतने वर्षों तक यूं ही बदहाल क्यों छोड़ दिया गया? 

 

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