यूपी में समय से पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी है। जहां मई-जून में तेज गर्मी पड़ती थी अब बीच बीच में तेज बारिश देखने को मिल रही है। बाँदा जिले के नरैनी ब्लाक के अंतर्गत आने वाले पिपरहरी गांव में बरसात के मौसम की शुरुआत के साथ ही लोगों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं। कारण है गांव की ज्यादातर नालियों का जाम होना, जिससे बारिश का पानी और घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर जमा होने का डर है।
रिपोर्ट – गीता, लेखन – सुचित्रा
गांव निवासी गोविंद चौहान बताते हैं कि आमतौर पर 15 जून के आसपास मानसून आने से पहले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नालियों तथा नालों की सफाई कराई जाती है ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल सके और लोगों को परेशानी न हो। लेकिन पिपरहरी गांव में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। उनका कहना है कि गांव में लगभग हर 50 मीटर की दूरी पर नालियां जाम हैं। अगर समय रहते नालियों की सफाई नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में पूरे गांव को जलभराव, गंदगी और लोगों को संक्रमण बीमारियों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
बरसात में बच्चों के गिरने का डर
गोविंद के अनुसार उनके मोहल्ले के पास एक तालाब है। पहले वहां का रास्ता समतल था और नालियां साफ रहती थीं, जिससे पानी आसानी से निकल जाता था। लेकिन अब तालाब का भीटा धंस गया है, सड़क बीच से ऊंची हो गई है और नालियां पूरी तरह चोक (बंद) हो चुकी हैं। नतीजतन नाली का पानी रास्ते में भरने लगा है। बरसात के दौरान जब तालाब भर जाता है तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसी रास्ते से बच्चे स्कूल जाते हैं। ऐसे में फिसलकर गिरने और सीधे तालाब में जाने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और सचिव से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और सचिव से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नालियों में भरा कचरा
गांव की रामलली कहती हैं “बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और ऐसे में नालियों में पानी की निकासी लगभग असंभव हो जाएगी। गांव के कई हिस्सों में नालियां टूटी हुई हैं और कूड़े-कचरे से भरी पड़ी हैं। कई स्थानों पर नालियों का पानी अभी से रुका हुआ है, जिसके कारण हल्की बारिश में भी पानी सड़कों पर फैलने लगता है।”
उन्होंने कहा कि “बारिश के दौरान पानी घरों तक पहुंच जाता है। गांव में सफाई कर्मी है और कभी-कभी आता है। लेकिन वह केवल सड़कों पर झाड़ू लगाकर चला जाता है। नालियों की लगातार सफाई कई साल से हुई नहीं है।”
वहीं राम नारायण यादव का कहना है कि अभी मानसून की शुरुआत हुई है और लगातार बारिश भी नहीं हुई है। यदि दो दिन लगातार बारिश हो जाए तो गांव में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे लोगों के आवागमन पर असर पड़ेगा और स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों तथा मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
घर के पास गंदगी और बदबू
राम नारायण ने बताया कि जब नालियों का पानी बाहर नहीं निकल पाएगा तो घरों के आसपास गंदा पानी जमा होने लगेगा। इससे घरों में सीलन बढ़ेगी और कच्चे मकानों की दीवारों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा रुके हुए पानी में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ेगी, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाएगा।
पाइप लाइन के जरिए गन्दा पानी घरों तक
उन्होंने आगे कहा कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन अभी तक नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। उनका कहना है कि यदि जलभराव की स्थिति बनी तो गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंच सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।
वह कहते हैं कि उनके गांव की प्रधान चंदा देवी है फिलहाल तो उनके 5 साल पूरे हो गए हैं, कार्यकाल खत्म ही हो गया। लेकिन विकास के नाम पर कोई सही काम नहीं हुआ। सफाई कर्मी आता है कभी साल या 6 महीने में नाली साफ़ होती है लेकिन नाली के बाहर कूड़ा निकाल कर रख देता है और फिर धीरे-धीरे वही कूड़ा नालियों में पहुंच जाता है इसलिए वह नालियां पूरी तरह से जाम हो गई है।
प्रधान पति ने ग्रामीणों को भी गंदगी का जिम्मेदार ठहराया
खबर लहरिया की रिपोर्टर गीता ने ग्राम प्रधान चंदा देवी से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। हालांकि कुछ समय पहले उनके पति चंद्रपाल ने इस मुद्दे पर कहा था कि गांव में सफाई कर्मी नियमित रूप से सफाई करता है। उनका कहना है कि गांव की आबादी लगभग चार हजार है और कई बार ग्रामीण स्वयं भी नालियों में कचरा डाल देते हैं। ऐसे में केवल सफाई कर्मी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे नालियों में कूड़ा-कचरा न डालें।
खंड विकास अधिकारी ने सफाई का दिया आश्वासन
इस संबंध में नरैनी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित सफाई कर्मी से जवाब मांगा जाएगा और नालियों की सफाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जहां नालियां टूटी हुई हैं, वहां निर्माण कार्य के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और बजट उपलब्ध होने पर मरम्मत या निर्माण कराया जाएगा।
पिपरहरी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि बरसात अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है और समस्याएं सामने आने लगी हैं। ऐसे में यदि जल्द ही नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत नहीं कराई जाए नहीं, तो आने वाले दिनों में गांव को जलभराव, गंदगी, बीमारियों और दुर्घटनाओं जैसी कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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