खबर लहरिया Blog Education: शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव की नई कहानी

Education: शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव की नई कहानी

ओमप्रकाश और ऋषि कुमार बौद्ध द्वारा गांव में छोटी से भीम पाठशाला के माध्यम से बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है। दोनों युवाओं का ये उद्देश्य है उन बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना जो आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक कारणों से पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। 

रिपोर्ट – नाजनी रिज़वी, लेखन – रचना 

फोटो साभार: खबर लहरिया 

क्या किसी गांव की तस्वीर केवल एक छोटी से पाठशाला से बदल सकती है? क्या कोई अपने सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं? लेकिन हां ऐसा हो सकता है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रसिन गांव के दो युवा ओमप्रकाश और ऋषि कुमार बौद्ध एक प्रेरणादायक पहल के जरिए बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। दोनों युवा अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ वे गांव में पाठशाला भी चला रहे हैं जहां बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। दोनों युवाओं का ये उद्देश्य है उन बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना जो आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक कारणों से पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। 

ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। कई परिवारों में माता पिता स्वयं अधिक पढ़ लिख नहीं पाए होते और वे मेहनत मजदूरी करके घर चलाते हैं जिसके कारण बच्चों को घर पर पढ़ाई का जरुरी मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। ऐसे में भीम पाठशाला जैसे प्रयास बच्चों के लिए अतिरिक्त सहयोग और सीखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन जाते हैं। 

फोटो साभार: खबर लहरिया                                                 

“शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं”

समाज में शिक्षा के लिए काम करना आसान नहीं है। बहुत से लोग अपनी व्यक्तिगत तरक्की के बारे में सोचते हैं, बहुत कम ऐसे सोचने वाले होते हैं जो अपने समय और संसाधनों का उपयोग दूसरों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगाते हैं। ओमप्रकाश और ऋषि कुमार बौद्ध का यह प्रयास इसी सोच का उदाहरण है। इस सोच को समझने के लिए इस विषय में दोनों युवाओं से बात की गई। वे मानते हैं कि शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाकर पास होने का साधन नहीं है शिक्षा आत्मविश्वास पैदा करने, सोच विकसित करने, जागरूकता और बेहतर भविष्य की नींव है। उनकी पाठशाला में बच्चों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ संविधान की मूल बातें समाजिक समानता, अनुशासन, व्यवहार ज्ञान, सम्मानपूर्वक व्यवहार करना भी सिखाया जाता है। 

बीएससी की पढ़ाई के साथ बच्चों के पढ़ाने का करते हैं काम 

भीम पाठशाला चला रहे ऋषि कुमार बौद्ध इस समय कृषि विषय से बीएससी की पढ़ाई कर रहे हैं। अपनी पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर वे बच्चों को पढ़ाते हैं। उनका कहना है जब स्कूलों की छुट्टियाँ रहती हैं तो सुबह 8 बजे से 10 बजे तक कक्षाएं चलती हैं जबकि स्कूल खुलने के दौरान बच्चे शाम 4 बजे के बाद पाठशाला में आते हैं। वर्तमान में इस पाठशाला में 47 बच्चे पढ़ने आते हैं जिनकी ऊम्र 7 से 13 वर्ष के बीच है। इनमें पाँचवीं से आठवीं तक के विद्यार्थी शामिल हैं। ऋषि कुमार बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में बड़ी संख्या दलित और वंचित समुदायों से आने वाले बच्चे की होती है। संसाधनों के कारण उनकी पढ़ाई कमजोर रह जाती है। इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने और उनके साथियों ने यह प्रयास शुरू किया। 

उनका मानना है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण इलाके के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं। वे कहते हैं कि जब बच्चे पहली बार पाठशाला में आए थे तब कई ऐसे थे जो पाँचवी कक्षा पढ़ने के बावजूद साधारण जोड़ घटाव नहीं कर पाते थे और शब्दों को जोड़कर पढ़ने में भी कठनाई महसूस करते थे। नियमित पढ़ाई और अभ्यास के बाद अब उनमे काफी बदलाव आया है। बच्चे पढ़ाई में रुचि लेने लगे हैं और पहले की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। 

फोटो साभार: खबर लहरिया                                         

ओमप्रकाश जिन्होंने बीए की पढ़ाई पूरी कर ली है बताते हैं कि बच्चों को पढ़ाने से बड़ी चुनौती उन्हें नियमित रूप से पाठशाला तक लाना होती है। कई बार माता-पिता का पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता इसलिए उन्हें घर-घर जाकर बच्चों और उनके परिवारों से बात करनी पड़ती है। कुछ बच्चे बकरी चराने जाते हैं, कुछ परिवार के बच्चे मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते हैं और कई लड़कियों को घरेलू कामकाज के ज़िम्मेदारियों में व्यस्त कर दिया जाता है। ऐसे हालात में बच्चों को शिक्षा से जोड़कर रखना आसान नहीं होता। 

उन्होंने बताया कि कई परिवार इतने कमजोर आर्थिक हालात में रहते हैं कि बच्चों के लिए किताबें, कॉपियाँ और अन्य जरुरी चीजें खरीद पाना भी संभव नहीं होता। ऐसे में बच्चों की मदद के लिए वे और उनके साथी चंदा इकट्ठा कर जरुरत की चीजें उपलब्ध कराते हैं। वे कहते है इस काम से उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है। गांव के लोग भी उनके प्रयासों का सराहना करते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा के लिए किया गया हर छोटा प्रयास समाज में बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है। 

फोटो साभार: खबर लहरिया                                                  

बच्चों को कैसा लगता है पाठशाला 

पाठशाला में पढ़ने वालों बच्चों के साथ बात करने पर वे कहते हैं यहां आने के बाद उनके पढ़ाई में काफी सुधार हुआ है। कक्षा सातवी के छात्र कुलदीप के मुताबिक सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं लेकिन पहले पढ़ाई को अच्छी तरह से समझ नहीं पाते थे। “जब से हम यहां पढ़ने आने लगे हैं तब से पढ़ाई आसान लगने लगी है। अब हमें सवाल हल करने आने लगा है बीस तक के पहाड़ा याद हो गया है और इमला भी बेहतर लिखते हैं। अभी भी कुछ गलतियाँ हो जाती है लेकिन पहले ज़्यादा होती थी। हमें अच्छे से मिला मिलाकर पढ़ने आ गया है।” 

कक्षा 6वीं की छात्रा मानवी ने बताया कि यहां पढ़ाई अच्छी होती है और वो यहां मन लगाकर पढ़ती है। कई बार होता है कि उनके साथ पढ़ने वाले बच्चे नहीं आते तो वे खेलते हैं तो हम भी खलने लग जाते हैं लेकिन फिर सर समझाते हैं कि पढ़ाई ज़्यादा जरुरी है फिर वो वापस आ जाते हैं। 

“इस पहल की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे चलाने वाले युवा स्वयं छात्र हैं। अपनी पढ़ाई व्यक्तिगत ज़िम्मेदारियों के बीच समय निकालकर वे समाज के बच्चों के लिए काम कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं मजबूत सोंच कुछ कर पाने की चाह होनी चाहिए और सामाजिक जिम्मेदारी की निभाने वाली सोच रखनी चाहिए। यह प्रयास बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के अलावा समाज में समान अवसर और सामाजिक समानता को भी मजबूत करते हैं। भीम पाठशाला की यह कहानी बताती है कि जब युवा शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाते हैं तो पूरा समुदाय आगे बढ़ने लगता है”  – रेपोर्टर नाज़नी रिज़वी 

 

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our  premium product KL Hatke

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *