यूजीसी (UGC) के नए नियम के समर्थन में आज 11 फरवरी को दिल्ली के जंतर मंतर पर महा आंदोलन प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आंदोलन में नगीना सांसद चन्द्रशेखर आजाद भी होंगें। इससे पहले 10 फरवरी को लखनऊ में हुए यूजीसी नियम के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी विधायक पल्ल्वी पटेल को हिरासत में लिया गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
यूजीसी (UGC) के नए नियम के समर्थन में SC, ST और OBC समुदाय के छात्र, कई सामाजिक संगठन, राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाने के बाद शुरू हुआ। इससे पहले ugc नियम 13 जनवरी को अधिसूचित होने के बाद से ही सवर्ण वर्ग के छात्रों और समुदाय के लोगों ने यूजीसी नियम लागू करने के विरोध में सड़कों पर उतर कर धरना प्रदर्शन किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रही याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नियमों पर रोक लगा दी है। अब इस केस की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
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सपा विधायक पल्लवी पटेल हिरासत में
यूजीसी नए नियम लागू करने के समर्थन में लखनऊ में प्रदर्शन कर रही सपा विधायक पल्लवी पटेल को हजरतगंज पुलिस ने 10 फरवरी को हिरासत में लिया। पल्ल्वी पटेल अपना दल (कामेरावाड़ी) की नेता और सिराथू विधानसभा सीट से विधायक हैं। पल्लवी पटेल को मंगलवार 10 फरवरी को हजरतगंज में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस द्वारा जबरन गाड़ी में ले जाते हुए वीडियो वायरल हो गया।
उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव के उन्मूलन हेतु लाए गए UGC विनियम, 2026 के समर्थन में लखनऊ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही विधायक बहिन पल्लवी पटेल जी को पुलिस द्वारा बेक़दरी से हिरासत में लिया जाना अत्यंत निंदनीय है।
एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह की कार्रवाई न… pic.twitter.com/PFBRIEjHyA
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) February 10, 2026
मीडिया से बात करते हुए पल्लवी पटेल ने कहा, “हम विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि एक जनहित के मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। हमें सरकार से जवाब चाहिए। समानता को बढ़ावा देने वाले यूजीसी विनियम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और एक संसदीय समिति की सिफारिश के बाद लागू किए गए थे। तो फिर समाज के एक वर्ग के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इन विनियमों पर प्रतिबंध क्यों लगा दिया?”
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प्रदर्शन कर रहे 100 लोगों पर एफआईर
एमपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ के हजरतगंज थाने में सुहेल देव आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश पासी और उनके करीब 100 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन सभी पर प्रतिबंधित इलाके में प्रदर्शन करने और नारेबाजी करने का आरोप है। यह घटना 8 फरवरी को हुई जब लखनऊ में विधानसभा के सामने बिना अनुमति के प्रदर्शन किया गया।
इस मामले पर लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “लखनऊ में यूजीसी के समर्थन में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लगभग 100 लोगों के खिलाफ फर्जी आरोपों में FIR दर्ज किया जाना, जबकि अभी कुछ ही दिन पहले यूजीसी के विरोध के नाम पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “कब्र खोदने” जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए। उनके अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ “कब्र खोदने” जैसे नारे लगाए गए, जातिगत गालियां दी गईं और खुली नफरत फैलाई गई, लेकिन इसके बावजूद किसी पर FIR दर्ज न होना सरकार के दोहरे मापदंड को उजागर करता है।
लखनऊ में यूजीसी के समर्थन में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लगभग 100 लोगों के खिलाफ फर्जी आरोपों में FIR दर्ज किया जाना, जबकि अभी कुछ ही दिन पहले यूजीसी के विरोध के नाम पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “कब्र खोदने” जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए, उन्हें जातिगत गालियाँ दी…
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) February 10, 2026
यूजीसी (UGC) नियम
UGC ने अपने नए नियमों को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ (UGC Equity Regulations 2026) नाम दिया है। इन नियमों का मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में SC, ST और OBC छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना है। इसके लिए संस्थानों में अलग-अलग समितियां बनाने, हेल्पलाइन शुरू करने और निगरानी टीमें गठित करने के निर्देश दिए गए थे ताकि इन वर्गों के छात्रों की शिकायतों पर सुनवाई हो सके। पहले इस नियम में सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में बराबरी और जवाबदेही बढ़ेगी।
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