खबर लहरिया टीकमगढ़ टीकमगढ़: जब मिड-डे मील व्यवस्था में इतनी कमियां तो कैसे दूर होगा कुपोषण?

टीकमगढ़: जब मिड-डे मील व्यवस्था में इतनी कमियां तो कैसे दूर होगा कुपोषण?

पिछले कुछ सालों से भारत में कुपोषण को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हुई है। अक्तूबर 2019 में जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत 117 देशों में से 102वें स्थान पर था जबकि वर्ष 2018 में भारत 103वें स्थान पर था। कुपोषण को दूर करने के लिए भारत सरकार की तरफ से तमाम योजनाएं और कार्यक्रम संचालित हैं जिसमें से एक मिडडेमील कार्यक्रम भी है जो सरकारी स्कूलों में लागू है।

मिड-डे मील कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1995 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में की गई थी। इसके पश्चात् वर्ष 2004 में कार्यक्रम में व्यापक परिवर्तन करते हुए मेनू आधारित पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ की गई। इस योजना के तहत न्यूनतम 200 दिनों हेतु निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 300 कैलोरी ऊर्जा एवं 8-12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 ग्राम कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान है। यह कार्यक्रम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत आता है।

भोपाल डेस्क रिपोर्ट 30 जून 2021 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के 56 लाख से ज्यादा बच्चों को स्कूल बंद होने की वजह से मिड्डे मील की राशि उपलब्ध नही हो पाई। इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से इस मामले की कार्यवाही करने की बात की थी। दरअसल शिवराज सरकार द्वारा कोरोना की पहली लहर में प्रदेश के 56 लाख 80 हज़ार बच्चों को मिड्डे मील का लाभ दिया गया था। जहां उनके बैंक खाते में खाद्य सुरक्षा भत्ता के अंतर्गत 137 करोड़ की रकम डाली गई थी।

वहीं कोरोना की दूसरी लहर के बीच प्रदेश के इन्हीं बच्चों के खाते में 138 करोड़ रुपये की राशि नहीं डाली गई है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों को सूखा राशन घर-घर पहुंचाने का फैसला किया था जिसके लिए 65 लाख स्कूली बच्चों के हिसाब से 285 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। वही, डाल, चीनी, चिक्की के पैकेट बांटे गए थे लेकिन विवाद की वजह से इसको बीच में ही रोक दिया गया था। अब इसकी जांच कराई जा रही है।

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केंद्र सरकार द्वारा मई 2021 में मध्य प्रदेश समेत देश के सभी राज्यों को 1200 करोड़ रुपये ज्यादा देने की घोषणा की थी जिनके तहत 1-8 तक पढ़ने वाले 11 लाख स्कूलों के 11 करोड़ बच्चों को इसका फायदा मिलना था। केंद्र साकार ने दूसरे राज्यों को यह पैसा देना शुरू कर दी लेकिन मध्य प्रदेश को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है।

इस मामले को लेकर हम पहुंचे टीकमगढ़ जिले के शासकीय प्राथमिक शाला स्कूल जो शहर के अनगढ़ा मोहल्ले में है। दूसरा स्कूल शासकीय प्राथमिक शाला, बजरंग खेरा। अनगढ़ा की संध्या खरे शाला प्रभारी ने बताया कि यहां पर कुल 97 बच्चों का नाम लिखा हुआ है। मिडडेमील में सूखा राशन प्रति बच्चे को 100 ग्राम गेहूं के हिसाब से और बाकी सामाग्री के लिए उनके अविभावकों के बाइक खाते में पैसे दिए जा रहे है। फरवरी 2021 तक का मिडडेमील दिया जा चुका है। मार्च अप्रैल मई तक का उठान मिल चुका है राशन का, जल्दी बांट देंगे। जुलाई से इधर का राशन नहीं आया है। इसी तरह से बजरंग खेरा के प्रभारी शिक्षक ने बताया कि उनके यहां 65 बच्चों के नाम दर्ज हैं। अप्रैल तक का मिडडे मील के तहत दिया जाने वाला राशन बांटा जा चुका है। मई से इधर का अभी नहीं आया।

इस मामले को लेकर दोनों स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके माता-पिता से बात की गई तो किसी भी बच्चे को पैसा नहीं मिला। राशन भी समय समय पर नहीं दिया गया। कोरोना के चलते कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है।

ऋचा द्विवेदी, क्वालिटी मॉनिटर, मध्यान्ह भोजन योजना का कहना है कि अप्रैल 2020-2021 तक का राशन बच्चों को बांटा जा चुका है। जिनको मध्यान्ह भोजन सामाग्री का पैसा नहीं मिला उस पर जांच करके कार्यवाही की जा सकती है।

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