रिपोर्ट के मुताबिक कुल 242 जातियों में से 135 जातियां ऐसी हैं जो ‘कंप्रेहेंसिव बैकवर्डनेस इंडेक्स’ के औसत से भी ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सामान्य वर्ग के मुकाबले करीब 2.7 गुना ज्यादा पिछड़ा है जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की स्थिति और भी खराब है।
तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए एक बड़े सामाजिक-आर्थिक सर्वे ने राज्य में जातिगत और आर्थिक असमानता की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। सर्वे में पाया गया है कि सामान्य कैटेगरी की तुलना में एससी और एसटी समुदाय के लोग तीन गुना ज्यादा पिछड़े हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कुल 242 जातियों में से 135 जातियां ऐसी हैं जो ‘कंप्रेहेंसिव बैकवर्डनेस इंडेक्स’ के औसत से भी ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सामान्य वर्ग के मुकाबले करीब 2.7 गुना ज्यादा पिछड़ा है जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की स्थिति और भी खराब है। ये सामान्य वर्ग से लगभग तीन गुना ज्यादा पिछड़े पाए गए हैं।
सर्वे में यह भी सामने आया है कि इन 135 बेहद पिछड़ी जातियों की आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का करीब 67 प्रतिशत यानी लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। सरकार ने इन हालात को समझने के लिए ‘बैकवर्ड इंडेक्स स्कोर’ भी जारी किया है जो अलग-अलग जातियों की स्थिति को साफ तौर पर दिखाता है।
सर्वे के आंकड़ों में सबसे ज्यादा पिछड़ी स्थिति एससी वर्ग की दक्कल जाति की सामने आई है जिसका स्कोर 116 दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी तरफ कापू जाति सबसे कम पिछड़ी पाई गई जिसका स्कोर सिर्फ 12 है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोनम प्रभाकर ने इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में इस तरह का सामाजिक और आर्थिक अंतर गंभीर स्थिति को दिखाता है।
कंप्रेहेंसिव बैकवर्डनेस इंडेक्स’ क्या है?
कंप्रेहेंसिव बैकवर्डनेस इंडेक्स’ (CBI) एक ऐसा पैमाना है जिससे यह समझा जाता है कि कोई जाति या समुदाय कितना पीछे है – जैसे शिक्षा, कमाई, नौकरी और रहने की स्थिति के आधार पर। यानि आसान भाषा में यह एक स्कोर होता है जो बताता है कि किसकी हालत कितनी कमजोर या पिछड़ी हुई है।
बैकवर्ड इंडेक्स स्कोर’ क्या है?
बैकवर्ड इंडेक्स स्कोर’ का मतलब है किसी जाति या समुदाय के पिछड़ेपन को नंबर या अंक में दिखाना। आसान भाषा में बात करें तो यह एक स्कोर होता है जिससे पता चलता है कि कौन-सा समूह शिक्षा, नौकरी, कमाई और सुविधाओं के मामले में कितना पीछे है जितना ज्यादा स्कोर उतना ज्यादा पिछड़ापन।
वर्गों की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा पिछड़ी मानी गई 135 जातियों में 69 पिछड़ा वर्ग (बीसी), 41 अनुसूचित जाति (एससी) और 25 अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जातियां शामिल हैं। इन समुदायों की हालत कई स्तरों पर कमजोर दिखती है चाहे शिक्षा हो या रोजगार – ये लोग पीछे हैं।
राज्य की आबादी
आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी करीब 17.43 प्रतिशत है जो लगभग 61.84 लाख लोगों के बराबर है वहीं अनुसूचित जनजाति (एसटी) की हिस्सेदारी 10.45 प्रतिशत यानी करीब 37.06 लाख है। अगर जातियों की बात करें तो सबसे बड़ी आबादी मादिगा (एससी) की है जो राज्य की करीब 10.3 प्रतिशत यानी 36.58 लाख है। इसके बाद शेख मुस्लिम (बीसी-ई) 7.9 प्रतिशत मुदिराज (ओबीसी) 7.4 प्रतिशत और लंबाड़ी/बंजारा (एसटी) 6.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आते हैं।
उन जातियों की समस्या जो पिछड़ेपन का सामना करती हैं
– रोजगार और शिक्षा के अवसरों में पीछे
– आर्थिक रूप से स्थाई नहीं होते
– स्वास्थ्य सुविधा और बुनियादी नागरिक सुविधाओं तक पहुंच नहीं
– लोगों के पास खूद से खुद की ज़मीन नहीं
– छोटे और भीड़भाड़ वाले जगहों या घरों में रहना
– शौचालय या साफ पानी की व्यवस्था नहीं, 13.3%परिवारों के पास शौचालय नहीं
– पिछड़ी जातियों के 78% से ज्यादा परिवारों की सालाना आय करीब 1 लाख रुपये है।
– करीब 21.2% लोगों को घर में नल का पानी नहीं मिलता।
– 5.8% परिवारों के पास सही बिजली कनेक्शन नहीं है।
सर्वे की प्रक्रिया
यह सर्वे नवंबर 2024 में शुरू किया गया था जिसमें टीमों ने करीब 50 दिनों तक घर-घर जाकर जानकारी जुटाई। इसके बाद करीब दो महीने और डेटा इकट्ठा किया गया ताकि तस्वीर और साफ हो सके। इस पूरे सर्वे में राज्य के लगभग 3.5 करोड़ परिवारों को शामिल किया गया जो कुल परिवारों का करीब 97 फीसदी हिस्सा है। इसमें 242 जातियों को 42 अलग-अलग मानकों पर परखा गया जिनमें उनकी आय, रोजगार, पढ़ाई, जमीन, घर की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं शामिल थीं।
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