दिल्ली के चाँदनी चौक के व्यापारी और छतरपुर जिला में भी हर दिन अलग-अलग इलाकों में सब्जी बाजार लगता है ताकि लोगों को पास में ही ताज़ी सब्जियां मिल सकें लेकिन यहां नगर पालिका की कार्रवाई के चलते महिलाओं और किसानों को बार-बार हटाया जा रहा है। बिना पहले बताए उनकी सब्जियां फेंक दी जाती हैं और कहा जाता है कि यहां बाजार नहीं लग सकता। इन पथ विक्रेताओं पर इस तरह के अत्याचार न हो इसके लिए देश की संसद में मई 2014 को एक अधिनियम पारित किया गया। जिसे ‘पथ विक्रेता अधिनियम 2014’ कहा गया।
रिपोर्टिंग – आलीमा, लेखन – रचना
सड़कों के किनारे लगने वाले ठेले और रेहड़ी-पटरी बाजार हम सभी ने देखे हैं। यहीं से लोग रोज़मर्रा की सब्जियां, कपड़े और छोटे-छोटे सामान खरीदते हैं। ये दुकानदार सड़कों पर दुकान लगाकर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं लेकिन इन लोगों की ज़िंदगी इतनी आसान नहीं है। इन्हें अक्सर गालियां सुननी पड़ती हैं जबरन हटाया जाता है और कई बार बिना सूचना के उनकी दुकानें उजाड़ दी जाती हैं। कई जगह तो बुलडोज़र चलने की खबरें भी सामने आई हैं जबकि नियम के अनुसार पहले नोटिस देना जरूरी होता है।
बड़े शहरों से छोटे जिलों तक वही हालात
यह समस्या सिर्फ एक जगह की नहीं है। दिल्ली के चाँदनी चौक के व्यापारी भी ऐसी परेशानियों से जूझ रहे हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में भी हर दिन अलग-अलग इलाकों में सब्जी बाजार लगता है ताकि लोगों को पास में ही ताज़ी सब्जियां मिल सकें लेकिन यहां नगर पालिका की कार्रवाई के चलते महिलाओं और किसानों को बार-बार हटाया जा रहा है। बिना पहले बताए उनकी सब्जियां फेंक दी जाती हैं और कहा जाता है कि यहां बाजार नहीं लग सकता। सब्जी बेचने वाली उमा कुशवाहा बताती हैं कि वे सब्जी खरीदकर बाजार में बेचती हैं। एक दिन उन्होंने 1500 – 1600 रुपये की सब्जी खरीदी थी लेकिन नगर पालिका ने उन्हें दुकान लगाने नहीं दिया। उनका कहना है कि अगर प्रशासन पहले बता दे या कोई जगह तय कर दे तो उनकी सब्जी खराब नहीं होगी।
वे कहती हैं “मैं मानती हूं कि ट्रैफिक होता है लेकिन हम लोगों का रोजमर्रा का यही जीवन है यहां लोग कमाने खाने वाले हैं। जो पैसे आज मिलते हैं उसी से हम लोग रात को सब्जी खरीदते हैं फिर सुबह बेजते हैं। अगर यह प्रशासन के जो लोग हैं यह हमें एक दिन पहले बता दें या हमें कोई जमीन चिन्हित कर दें कि आप लोग यहां पर बाजार लगाइए तो हमारी सब्जी खराब नहीं होगी। फिर इससे उनका भी काम चलेगा और हमारा जीवन भी।”
“सरकार की तानाशाही हम गरीबों के ऊपर ही चल रही है”
कल्लू अहिरवार किसान हैं और कई किलोमीटर दूर से सब्जियां लेकर यहां बेचने आते हैं। वे सुबह खेत से ताज़ी सब्जियां तोड़कर बाजार पहुंचते हैं लेकिन नगर पालिका के कर्मचारी उन्हें सड़क किनारे दुकान लगाने नहीं दे रहे हैं। कल्लू अहिरवार का कहना है कि जब वे करीब 40 किलोमीटर दूर से सब्जियां लेकर आए हैं तो उन्हें अपनी सब्जी बेचने से क्यों रोका जा रहा है। वहीं किसान कल्लू अहिरवार कहते हैं कि अगर उन्हें दुकान लगाने नहीं दी जाती तो उनकी सारी मेहनत बेकार हो जाती है। उन्होंने बताया कि बाजार में बेचने के लिए लगाई हुई सभी सब्ज़ी को फेंक दे जाती है। उनका कहना है कि न तो प्रशासन कोई जगह बताता है और न ही यहां दुकान लगाने देता है। ऐसे में गरीब लोग आखिर जाएं तो कहां जाएं?
वे कहते हैं “सरकार की तानाशाही हम गरीबों के ऊपर ही चल रही है हम लोग सरकारी नौकरी वाले तो नहीं है कि बगैर कमाए पैसा आ जाएगा यह लोग तो इस तरह से करते हैं जैसे यह लोग सब्जी नहीं खरीदते हैं। हम लोग चाहते हैं कि हम लोगों को बाजार लगाने के लिए एक जगह चिन्हित कर दीजाए।”
खरीद दार भी परेशान
रिपोर्टिंग के दौरान कुछ खरीद दारों से भी बात की गई बाजार में खरीदारी करने आई रईसा बेगम बताती हैं कि पहले पास में ही बाजार लग जाता था और पैदल आकर सब्जी मिल जाती थी। अब कई दिनों से बाजार ठीक से नहीं लग पा रहा है। दुकानदारों को सब्जी खोलने तक नहीं दी जाती। इससे बेचने वाला भी परेशान है और खरीदने वाला भी। उनका कहना है कि ये किसान दूर-दूर से ताज़ी सब्जी लाते हैं लेकिन नगर पालिका की कार्रवाई से आम जनता को भी परेशानी हो रही है।
प्रशासन का पक्ष, नगर पालिका सीएमओ से मिली जानकारी।
इस मामले में नगर पालिका की सीएमओ माधुरी शर्मा का कहना है कि उन्हें कलेक्टर के निर्देश मिले हैं कि सड़कों पर लगने वाले बाजारों को मंडी में शिफ्ट किया जाए। उनका कहना है कि सड़कों पर बाजार लगने से ट्रैफिक जाम होता है, एक्सीडेंट भी होते हैं लोग गाड़ियां नहीं निकाल पाते बहुत ज्यादा जाम की स्थिति बनी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। स्कूल बसों और अन्य वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है। इसी वजह से नगर पालिका लोगों को हटाने की कार्रवाई कर रही है। हालांकि दुकानदारों का कहना है कि अगर उन्हें पहले से तय जगह दे दी जाए तो वे खुशी-खुशी वहां बाजार लगाएंगे।
‘पथ विक्रेता अधिनियम 2014’
इन पथ विक्रेताओं पर इस तरह के अत्याचार न हो इसके लिए देश की संसद में मई 2014 को एक अधिनियम पारित किया गया। जिसे ‘पथ विक्रेता अधिनियम 2014’ कहा गया। इस अधिनियम को 10 साल पूरे हो गए हैं लेकिन पथ विक्रेताओं की स्थिति ज्यों की त्यों बनी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के जिले वाराणसी में हाकर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने बैठक आयोजित की। जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगपत्र भेजा गया। हाकर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी पूरे देश में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का एक संयुक्त मंच है जोकि पूरे देश के अलग-अलग राज्यों में पथ विक्रेताओं के मुद्दे पर काम करती है।
दिल्ली के चांदनी चौक में भी रेहड़ी-पटरी वालों द्वारा किया गया मार्च
इसी कड़ी में दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में 25 फरवरी को स्ट्रीट वेंडर्स यानी रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाकर सामान बेचने वाले लोगों ने प्रदर्शन मार्च निकाला। यह मार्च Indian Hawkers Alliance के बैनर तले आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 को सही तरीके से लागू किया जाए और उन्हें काम करने के लिए तय जगह दी जाए। प्रदर्शन कर रहे वेंडर्स का कहना है कि कानून होने के बावजूद उन्हें बाजार लगाने के लिए स्थायी जगह नहीं दी जाती। वे जहां भी दुकान लगाते हैं वहां से उन्हें हटा दिया जाता है। उनका आरोप है कि कई बार उनसे घूस भी मांगी जाती है। वेंडर्स ने कहा कि वे नियमों के तहत तय शुल्क देने को तैयार हैं लेकिन रिश्वत नहीं देंगे।
जैसे ऊपर भी बताया है कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 का उद्देश्य शहरों में रेहड़ी-पटरी वालों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके काम को नियमों के दायरे में लाना है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस कानून को कागजों तक सीमित न रखा जाए बल्कि जमीन पर भी सही तरीके से लागू किया जाए ताकि उनके रोजगार की सुरक्षा हो सके।
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हालांकि इस प्रदर्शन पर व्यापारी संगठनों की ओर से आपत्ति जताई गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और चांदनी चौक नागरिक मंच के महासचिव ने आरोप लगाया कि मार्च के दौरान “जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है” जैसे नारे लगाए गए। व्यापारी संगठनों का कहना है कि कुछ लोग सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर अब प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 को कैसे और कब पूरी तरह लागू किया जाएगा।
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