सरकार गांवों और शहरों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने तथा बुनियादी सुविधाओं का दावा करती है लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। प्रयागराज जिले की शंकरगढ़ नगर पंचायत के वार्ड नंबर 1 का बोर स्टाटर और सीमिट वाली टंकी पिछले 1 महीने (जून 2026) से खराब है। वहीं 8 वार्ड नंबर में भी पिछले 3 महीने (अप्रैल 2026) से यही स्थिति है। इसकी वजह से करीब एक हजार की आबादी पानी के लिए रोज संघर्ष करने को मजबूर है।
रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – सुचित्रा
पानी के लिए भटकने को मजबूर
स्थानीय निवासी उर्मिला बताती हैं कि उनके घर के सामने नगर पंचायत की पेयजल योजना के तहत बोर और दो हजार लीटर क्षमता की सीमेंट की टंकी बनाई गई थी। इसी टंकी से लगभग 100 घरों के लोग पानी भरते थे। क्षेत्र में आदिवासी, चिकवा सहित विभिन्न समुदायों के लोग रहते हैं। करीब एक महीने से यह समस्या बनी हुई है। पूरे मोहल्ले में पीने के पानी का संकट गहरा गया है। महिलाओं को डिब्बे लेकर इधर-उधर पानी की तलाश में भटकना पड़ रहा है जबकि पानी के कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।
पानी न मिलने से घर के काम प्रभावित
सीता देवी कहती हैं कि उनके वार्ड में पानी का यही एकमात्र स्रोत था। यहां न हैंडपंप है और न ही नल की सुविधा। मजबूरी में लोगों को दूसरे वार्ड की टंकी से पानी भरने जाना पड़ता है जहां सुबह लंबी कतार लग जाती है। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी पानी नहीं मिल पाता। इससे बच्चों के स्कूल जाने में देर हो जाती है और मजदूरी करने वाले लोगों का काम भी प्रभावित होता है। उनका कहना है कि पानी के अभाव में खाना तक नहीं बन पाता जिससे पूरे परिवार की दिनचर्या प्रभावित हो जाती है।
महिलाओं पर ज्यादा असर
घर के काम अक्सर महिलाऐं संभालती है इसकी वजह से पानी भरने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की अधिकतर होती है। कुछ महिलाऐं बताती हैं कि पति सब काम पर चले जाते हैं तो ये सब हमें ही देखना पड़ता है।
राजकली बताती हैं कि उनके परिवार में प्रतिदिन करीब 50 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें लगभग एक किलोमीटर दूर जाकर 15-15 लीटर के डिब्बे उठाकर लाने पड़ते हैं। भारी वजन ढोने से हाथ और कमर में दर्द रहने लगा है। उन्होंने बताया कि उनका ऑपरेशन भी हो चुका है, इसलिए अधिक वजन उठाने से परेशानी और बढ़ जाती है। उनका कहना है कि जब टंकी चालू थी तब घर के पास ही आसानी से पानी मिल जाता था, लेकिन अब न कोई जनप्रतिनिधि और न ही कोई अधिकारी उनकी समस्या देखने आता है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कोई सुध नहीं लेता।
कन्हैया लाल उर्फ छोटू का कहना है कि वार्ड नंबर 8 का बोर पूरी तरह खराब हो चुका है और उसका रीबोर कराया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वे कई बार नगर पंचायत में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार वार्ड की दोनों पानी की टंकियां पिछले करीब दस साल पहले लगाई गई थी।
फिलहाल जिन लोगों के निजी बोर हैं, वही जरूरतमंदों को पीने का पानी दे रहे हैं। नगर पंचायत महीने में केवल दो बार पानी का टैंकर भेजती है, जो पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि यदि जल्द स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो लोगों की परेशानी और बढ़ जाएगी।
आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं
रवि का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपना बोर भी नहीं करवा सकते। मजबूरी में दूसरे लोगों के यहां पानी मांगने जाना पड़ता है, लेकिन कई बार वहां भी पानी भरने नहीं दिया जाता। उन्होंने नगर पंचायत से जल्द स्थायी पेयजल व्यवस्था कराने की मांग की है।
जल्द ही मरम्मत का आश्वासन
वार्ड की सभासद पूजा साहू ने बताया कि वार्ड नंबर 1 में खराब पड़े बोर और स्टार्टर को ठीक कराने के लिए उन्होंने 16 जून को लिखित शिकायत दी थी। उनका कहना है कि पिछले लगभग 40 दिनों तक नगर पंचायत में न अधिशासी अधिकारी (ईओ) थे और न ही बाबू, जिसके कारण मरम्मत का कार्य नहीं हो सका। अब अधिकारी कार्यभार संभाल चुके हैं और जल्द ही बोर की मरम्मत कराकर पानी की व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।
वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष पार्वती कोटार्य ने बताया कि शंकरगढ़ नगर पंचायत के 8 वार्डों में लगभग दस वर्ष पहले पेयजल योजना के तहत प्रत्येक वार्ड में दो-दो बोर और पानी की टंकियां बनाई गई थीं। समय के साथ कुछ बोर और टंकियां खराब हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि जिन स्थानों से शिकायतें मिली हैं, वहां मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। जिन मोहल्लों में पानी की अधिक समस्या है, वहां फिलहाल टैंकर के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में भूजल काफी गहराई पर होने के कारण हैंडपंप सफल नहीं हो पाते और कई जगह साढ़े तीन सौ फीट तक बोरिंग करनी पड़ती है।
चैयरमैन पार्वती कोटार्य का कहना है की हमारे नगरपंचायत में 12 वार्ड है। आज से दस साल पहले पेय जल योजना से बोर करवाया गया और टंकी बनाई गई। हर वार्ड में दो टंकी बनी पूरी टंकी लगभग 24 बनाई गई है। इससे पहले कोई यहां बाबू ईओ नहीं थे। पिछले महीनें ही 16 जून को आए हैं। उन्होंने कहा कि अब नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी (ईओ) और बाबू की तैनाती हो चुकी है, इसलिए लंबित कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भूजल काफी गहराई पर होने के कारण हैंडपंप अक्सर सफल नहीं हो पाते और कई स्थानों पर लगभग साढ़े तीन सौ फीट तक बोरिंग करनी पड़ती है। जिन मोहल्लों में पेयजल की समस्या है, वहां फिलहाल टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति कराई जा रही है।
फ़िलहाल लोगों को उम्मीद है है कि जल्दी ही उन्हें इस समस्या से राहत मिलेगी।
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