महोबा के पनवाड़ी गांव नैपुरा में एक लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां एक मृत आंगनबाड़ी सहायिका के घर 28 मार्च को नोटिस भेजा गया। बताया जा रहा है कि आंगनबाड़ी में ताला लगे होने से सहायिका के घर कारण बताओ नोटिस भेजा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस आंगनबाड़ी सहायिका के घर नोटिस भेजा गया उसकी मौत 16 महीनें पहले 2024 में ही हो गई थी। नोटिस मिलने के बाद मृत आंगनबाड़ी सहायिका के पति चिंता में है और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – सुचित्रा

मृत आंगनबाड़ी सहायिका पार्वती के पति किशन लाल हाथ में कारण बताओ नोटिस हाथ में लिए हुए (फोटो साभार: श्यामकली)
क्या है पूरा मामला
खबर लहिरया ने सोशल मीडिया पर वायरल इस खबर की सच्चाई जानने की कोशिश की। पहले पूरा मामला क्या है समझ लेते हैं। गांव की मृत आंगनबाड़ी सहायिका पार्वती के पति किशन लाल ने बताया कि 1 नवंबर 2024 को उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने (किशन लाल) पत्नी की मौत के 8 दिन बाद यानी 9 नवंबर को ही बाल विकास परियोजना कार्यालय और बैंक में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिए थे। इसके बावजूद, 28 मार्च 2026 को उनके घर एक नोटिस पहुंचा। इस नोटिस में लिखा था कि आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला, इसलिए जवाब दिया जाए। इसके साथ ही पार्वती पर बच्चों को भोजन और शिक्षा से वंचित करने का आरोप लगाया गया है। यह नोटिस 26 फरवरी 2026 की तारीख में जारी किया गया था।

मृत आंगनबाड़ी सहायिका पार्वती को बाल विकास परियोजना द्वारा जारी किया गया कारण बताओ नोटिस (फोटो साभार: श्यामकली)
“नोटिस भेजना यानी मरे हुए की हंसी उड़ाना” – किशन लाल
खबर लहरिया से बातचीत करते हुए किशन लाल ने बताया कि पत्नी की मौत के बाद सारे कागज जमा कर दिए थे और डेथ सर्टिफिकेट बाल विकास में जमा कर दिए थे। इसके बावजूद नोटिस दिया गया। मरे हुए आदमी को नोटिस भेजना हंसी उड़ाना गलत बात है न। नोटिस में कहा गया कि काम पर नहीं आती है नौकरी से निकाल दिया जायेगा।
नोटिस मिलने के बाद डर
कारण बताओ नोटिस मिलने पर आंगनबाड़ी सहायिका का परिवार परेशान हो गया। किशन लाल का कहना है कि उन्हें डर है कहीं उनके ऊपर कोई कार्रवाई या पैसे की वसूली न कर दी जाए। अब पत्नी की मौत हो चुकी है तो नौकरी पर कौन जायेगा? हमने तो 2, तीन दिन पहले यानी 1 अप्रैल को डीएम गजल भारतद्वाज को ज्ञापन दिया है। डीएम ने जाँच के आदेश दिए हैं। वर्तमान में अभी जाँच चल रही है।
जरुरी दस्तावेज लीक करने का आरोप – बाल विकास परियोजना
बाल विकास परियोजना अधिकारी यासमीन ने बताया कि 26 फरवरी 2026 को निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला था, इसलिए उन्होंने अपने सुपरवाइजर से नोटिस तैयार करने को कहा था। संबंधित दस्तावेजों के आधार पर नोटिस तैयार किया गया था। हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने यह नोटिस किसी को दिया नहीं था और यह ऑफिस में ही रखा हुआ था। उन्हें यह नहीं पता कि यह नोटिस बाहर कैसे पहुंच गया।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें पनवाड़ी का चार्ज लिए हुए करीब 3 महीने ही हुए हैं और कई केंद्र एक साथ होने के कारण पूरी जानकारी नहीं थी। पहले के कर्मचारियों की गलती से रजिस्टर में मृत सहायिका का नाम नहीं हटाया गया था। अधिकारी यासमीन ने इसे साजिश बताया और कहा नोटिस को बाहर पहुंचने में कोई साजिश हो सकती है। फिलहाल विभाग की ओर से जांच की जा रही है कि यह नोटिस संबंधित व्यक्ति तक कैसे पहुंचा?
इस तरह के मामले उदाहरण है किस तरह से सरकारी कार्रवाई में बिना जाँच पड़ताल के काम किया जाता है। क्या नोटिस भेजने से पहले कर्मचारी के बारे में पता करने की कोशिश नहीं की गई? सीधा नोटिस भेज दिया गया। आज एक कॉल से जानकारी मिल जाती है तो क्या बाल विभाग ने नोटिस भेजने से पहले यह जरुरी नहीं समझा या ध्यान नहीं दिया? इन सब का असर उस व्यक्ति पर पड़ा जिसने अपने को खोया। इस तरह से किशन लाल की मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा। उन्हें अभी भी चिंता है कि कहीं प्रशासन उन्हें परेशान न करें?
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