मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में शिक्षा को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। नए स्कूल खुल रहे हैं, स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा रहे हैं और बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद प्राथमिक शिक्षा में दाखिल के आंकड़ों में गिरावट देखने को मिल रही है। यह सच्चाई नीति आयोग द्वारा जारी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) 2024–25 के रिपोर्ट में सामने आई।
मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा में GER यानी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो घटकर 76.3 प्रतिशत पर आ गया है। इसका मतलब सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का दाखिला का प्रतिशत कम हो गया है जो कि देश के सबसे कम स्तरों में से एक है। दस साल पहले यह करीब 109.3 प्रतिशत था, जिससे स्पष्ट है कि प्राथमिक शिक्षा में नामांकन लगातार कम हुआ है।
देश के आंकड़ों में सबसे ख़राब स्थिति मध्य प्रदेश की
आंकड़े बताते हैं कि यह देश के किसी भी बड़े राज्य में सबसे बड़ी गिरावट है। इस मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति केवल बिहार (77.2%), गुजरात (79.6%), उत्तर प्रदेश (83.1%) और राजस्थान (88.3%) जैसे राज्यों के समकक्ष या उनसे भी बदतर हो चुकी है।

देश में 2024–25 के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) रिपोर्ट में दिखाए गए आंकड़ों का प्रतिशत (फोटो साभार: नीति आयोग)
मध्य प्रदेश अभिभावक संघ के महासचिव प्रबोध पंड्या ने कहा कि प्राथमिक स्तर पर GER का लगभग 109.3% से घटकर 76.3% पर आ जाना केवल एक सांख्यिकीय बदलाव नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में अभिभावक संघ के महासचिव प्रबोध पंड्या कहते हैं “मध्य प्रदेश भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है और यहाँ बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित हैं। यहाँ एक प्रतिशत का बदलाव भी लाखों नहीं तो सैकड़ों हजारों बच्चों को औपचारिक प्राथमिक नामांकन से बाहर कर देता है या उनकी गिनती ठीक से नहीं हो पाती। लगातार गरीबी, सीमित स्कूली बुनियादी ढांचे, उच्च बाल-बस्ती दर या सामाजिक बाधाओं (लिंग, जाति और बाल श्रम) वाले क्षेत्रों के और भी पिछड़ जाने का खतरा है।”
नामांकन में गिरावट का कारण
मध्य प्रदेश अभिभावक संघ के महासचिव प्रबोध पंड्या ने नामांकन के घटने की वजह बताते हुए 3 कारण बताये। जो इस प्रकार हैं –
1. पैमाना (Scale) – बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं
GER में इतनी बड़ी गिरावट का मतलब है कि पहले की तुलना में अब कम बच्चे प्राथमिक स्कूलों में नामांकित हैं। यह केवल कुछ जिलों या क्षेत्रों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे राज्य स्तर पर दिखाई देने वाला बदलाव है। यदि प्राथमिक स्तर पर ही बच्चे स्कूलों से दूर हो रहे हैं, तो आगे की कक्षाओं में नामांकन और भी कम हो सकता है।
2. समानता (Equity) – कमजोर वर्गों पर सबसे अधिक असर
शिक्षा में गिरावट का असर सभी पर समान रूप से नहीं पड़ता। ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब परिवारों, अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों और दूरदराज के इलाकों के बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ता है। जब नामांकन घटता है, तो अक्सर सबसे पहले यही वर्ग शिक्षा से बाहर होता है। इससे शिक्षा में असमानता बढ़ने का खतरा पैदा होता है और समाज के कमजोर वर्ग विकास की दौड़ में पीछे रह जाते हैं।
3. नीतिगत प्रभाव (Policy Implications)
GER में लगातार गिरावट यह संकेत देती है कि शिक्षा से जुड़ी वर्तमान नीतियों और योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार को यह समझना होगा कि बच्चे स्कूलों तक क्यों नहीं पहुँच रहे हैं या क्यों पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं। इसके लिए स्कूलों की उपलब्धता, शिक्षकों की संख्या, शिक्षा की गुणवत्ता, आर्थिक सहायता और ड्रॉपआउट रोकने वाली योजनाओं की दोबारा समीक्षा करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा सरकारी स्कूलों के बजाय निजी स्कूलों में बच्चों की रूचि, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के विलय या बंद होने की प्रक्रिया, आर्थिक और सामाजिक कारणों से बच्चों का पढ़ाई से दूर होना और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों की चिंता भी नामांकन में गिरावट की कमी कारण हो सकता है।
प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के वर्ष 2024–25 के आंकड़े
UDISE (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) + 2024–25 के अनुसार—
इन आंकड़ों से साफ है कि प्राथमिक शिक्षा तक पहुँच तो काफी बेहतर हुई है, लेकिन उच्च कक्षाओं तक पहुँचते-पहुँचते बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा से दूर हो जाते हैं।



