खबर लहरिया Hindi विलुप्त हो रहे महोबा के देसावरी पान को बचा रही हैं अंकिता, राष्ट्रपति से भी मिला सम्मान

विलुप्त हो रहे महोबा के देसावरी पान को बचा रही हैं अंकिता, राष्ट्रपति से भी मिला सम्मान

महोबा की पहचान माने जाने वाला देसावरी पान धीरे-धीरे अपनी चमक खो रहा था। पान की कम उम्र और सीमित बाजार इसकी सबसे बड़ी चुनौती थी लेकिन महोबा की अंकिता चौरसिया ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। साल 2022 में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्हें पान से बने अलग-अलग उत्पादों के बारे में जानकारी मिली। तभी उन्होंने तय किया कि वह देसावरी पान को नई पहचान देंगी। आज अंकिता देसावरी पान से कई तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की खासियत यह है कि ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। कुछ उत्पादों की शेल्फ लाइफ करीब 6 महीने तक है। इन उत्पादों में सौंफ, मेवा और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। दावा है कि इन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। अंकिता के उत्पाद अब महोबा से निकलकर दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे शहरों तक पहुंच रहे हैं। अंकिता को उनके काम के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में 3 मई को उनके नए प्रतिष्ठान का उद्घाटन जिला अधिकारी ने किया। अंकिता कहती हैं कि उनके इस सफर में परिवार, खासकर उनके पिता का सहयोग सबसे बड़ी ताकत रहा है। उनका सपना है कि वह अपने माता-पिता के साथ-साथ पूरे महोबा का नाम रोशन करें।

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