खबर लहरिया Blog LPG Shortage: गैस सिलेंडर को लेकर बढ़ी चिंता, देश के कई राज्यों में LPG को लेकर लगी कतारें 

LPG Shortage: गैस सिलेंडर को लेकर बढ़ी चिंता, देश के कई राज्यों में LPG को लेकर लगी कतारें 

                                                

11 मार्च 2026 तक की जानकारी के अनुसार भारत में तेल और LPG गैस की स्थिति, विशेषकर पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव के कारण बहुत ही संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच चल रहे युद्ध के बीच भारत के कई हिस्सों में रसोई गैस (एलपीजी) को लेकर चिंता बढ़ गई है।

फोटो साभार: PTI

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारतीय तेल बाजार कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है लेकिन LPG की कीमतों में वृद्धि हुई है। देश के लगभग राज्यों से LPG की कीमत में बढ़ोत्तरी की खबर आ रही है। 

चिंता क्यों बढ़ी? 

पिछले कुछ दिनों से देशभर में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ जगहों पर सप्लाई को लेकर खबरें आईं, होटल-रेस्टोरेंट संगठनों ने भी चिंता जताई, जिससे लोगों के मन में सवाल और डर उठने लगे है कि कहीं देश में गैस की कमी न होने लगे। क्योंकि लोगों के मन से अभी भी कोविड के समय की स्थिति का डर गया नहीं है। 

उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। 9 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कम्पनियों को घरेलू उपभोक्ताओं को पहले गैस देने का निर्देश दिया है। अब से नया गैस सिलेंडर बुक करने के लिए 25 दिन का गैप होना जरुरी कर दिया है। पहले बुकिंग का गैप 21 दिनों का होता था। 

उत्तर प्रदेश 

लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे कई शहरों में गैस एजेंसियों की हालत खराब है। हालात ऐसे हैं कि सप्लाई आने के बाद भी कई जगहों पर चार-पांच दिन तक गैस की डिलीवरी शुरू नहीं हो पा रही है जिससे एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। यही समस्या सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के बांदा और मध्य प्रदेश के छतरपुर जैसे इलाकों में भी लोग गैस को लेकर काफी परेशान हैं। 

कमला पाल श्रीवास्तव ने बताया कि वे सुबह से गैस सिलेंडर के लिए दुकान के बाहर बैठे हैं लेकिन सिलेंडर दिया नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा गैस महंगा हो गया है 110 रुपए बढ़ गए हैं। उनका कहना था कि उन्हें किसी ने कुछ नहीं बताया अचानक से सिलेंडर का दाम बढ़ गया है। बता दे अभी कई ऐसे भी लोग हैं जिन्हें सिलेंडर और तेल के दाम बढ़ने का कारण ही नहीं पता है। वे कहते हैं “महंगाई इतनी बढ़ गई है हमारे लिए मुश्किल का दौर चल रहा है, आज तो हमारे घर में खाना भी नहीं बना है।”

बेंगलुरु

बेंगलुरु में भी गैस की सप्लाई को लेकर होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की चिंता बढ़ गई है। कई रेस्टोरेंट्स का कहना है कि उनके पास सिर्फ एक-दो दिन का ही गैस स्टॉक बचा है। होटल एसोसिएशन के मुताबिक अगर जल्दी गैस की सप्लाई ठीक नहीं हुई तो कई जगहों पर किचन बंद करने की नौबत आ सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सबसे पहले घरों में इस्तेमाल होने वाली गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

दिल्ली 

दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में अभी बड़े स्तर पर गैस की कमी की बात सामने नहीं आई है लेकिन लोगों में चिंता जरूर बढ़ी है। इसी वजह से कई लोग जल्दी-जल्दी गैस सिलेंडर बुक करा रहे हैं जिससे कुछ जगहों पर डिलीवरी में थोड़ी देरी की शिकायत भी मिल रही है। सरकार का कहना है कि फिलहाल घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। 

दिक्कत ज्यादा तर कमर्शियल सिलेंडरों में देखी जा रही है जिनका इस्तेमाल होटल और दुकानों में होता है। सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई ठीक रखने के निर्देश दिए हैं। कुल मिलाकर अभी आम लोगों के लिए घरेलू गैस को लेकर बड़ी समस्या की स्थिति नहीं है और सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है।

मध्य प्रदेश 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी गैस सप्लाई को लेकर परेशानी बढ़ने लगी है। मिड डे के रिपोर्ट के मुताबिक यहां कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई कुछ हद तक रोक दी गई है और सिर्फ जरूरी सेवाओं को ही इसकी छूट दी जा रही है। होटल और कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें कमर्शियल सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। 

गैस एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के अनुसार घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी का इंतजार भी पहले से बढ़ गया है और अब लोगों को लगभग 21 से 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसी वजह से कई गैस एजेंसियों के बाहर घरेलू सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें भी देखने को मिल रही हैं।

पंजाब 

कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी कमर्शियल गैस की उपलब्धता सीमित हो गई है। इसका असर मुख्यतः होटल, मॉल और फूड कारोबार पर पड़ रहा है।

तमिलनाडु 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु में गैस LPG बंद होने से हज़ारों छोटे व्यापारी, आईटी कैंटीन, हॉल और पर्यटन सेवाएँ प्रभावित हैं। लोग खाने के ठेले बचे स्टॉक से काम चला रहे हैं। 

पश्चिम बंगाल 

रॉयटर्स और इंडिया टुडे के रिपोर्टों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल, कोलकाता और आसपास के इलाकों में गैस की मांग करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है। इसी वजह से कई जगहों पर गैस की सप्लाई पर दबाव देखा जा रहा है। ऐसी ही स्थिति हैदराबाद, रांची और गोवा के कुछ शहरों में भी देखने को मिल रही है जहां लोगों को गैस लेने के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और सप्लाई में देरी की खबरें सामने आ रही हैं।

बिहार 

पटना में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर लोगों को काफी परेशानी हो रही है। शहर की कई गैस एजेंसियों में सप्लाई कम आने की वजह से समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग सुबह से ही एजेंसी के बाहर लाइन लगाकर इंतजार कर रहे हैं लेकिन कई बार स्टॉक खत्म हो जाने के कारण उन्हें बिना गैस लिए ही वापस लौटना पड़ रहा है। गैस की कमी की वजह से घर के कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं और लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।

इसी बीच बिहार के गृह मंत्री श्रीमान सम्राट चौधरी ने कहा कि “केंद्र सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं और आपूर्ति में 10% वृद्धि का आदेश दिया है। कालाबाजारी करते पकड़े जाने पर राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।” 

मध्य पूर्व तनाव से तेल बाजार में हलचल 

मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल ले जाने वाले जहाज़ों की आवाजाही अभी भी सामान्य नहीं हो पाई है। इस पर संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया को तेल की सप्लाई जारी रखने का वादा किया था लेकिन इसके बाद भी बहुत कम जहाज़ स रास्ते से गुजरने की हिम्मत कर रहे हैं। the Guardian के अनुसार उनके बयान के बाद सिर्फ दो जहाज़ ही इस रास्ते से गुजरे जिनमें से एक ने सुरक्षा के डर से अपना ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद कर दिया था। युद्ध और हमलों के डर से ज़्यादातर जहाज़ इस इस रास्ते से जाने से बच रहे हैं। इस वजह से दुनिया में तेल की सप्लाई और क़ीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है और कई देश हालत पर नजर भी बनाए रखे हैं। 

बता दें विश्व के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज समुद्री मार्ग से सामान्यतः प्रतिदिन लगभग 100 जहाज खाड़ी से बाहर निकलते या उसमें प्रवेश करते हैं। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के जवाब में ईरान ने प्रभावी रूप से जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और संकट के शुरुआती दिनों में इससे गुजरने की कोशिश कर रहे कम से कम 10 जहाजों पर हमला किया है। 

बीते 9 मार्च 2026 को क्यूम नाम का एक टैंकर जिस पर अमेरिका ने ईरानी तेल ले जाने को लेकर प्रतिबंध लगाए हैं इस रास्ते से खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकल गया है। इसके अलावा सप्ताहांत (सप्ताह के अंत में आने वाला अवकाश) में एलपीजी गैस ले जाने वाले दो जहाज़ भी यहां से गुजरे। डानुटा आई और एचएच ग्लोरी जिन पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं। तीन और सामान वाले जहाज़ भी इस रास्ते से निकले जिनमें एक ईरान के झंडे वाला था और दो ईरानी बंदरगाहों से आए थे। 

इस तनाव का असर तेल बाजार पर भी पड़ा और 9 मार्च को तेल की कीमत करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई जो 2022 के बाद सबसे ज़्यादा है। 

हालांकि बाद में कीमतें गिरकर 90 डॉलर से नीचे आ गईं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके निकलने की कोशिश भी कर रहे हैं। पहले दुनिया के लगभग 20% तेल और बड़ी मात्रा में गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती थी इसलिए इस इलाके में युद्ध का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। 

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और दुनिया के तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद 11 मार्च 2026 को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बड़े शहरों में ईंधन के दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 103.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 90.03 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे कई बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत अभी भी 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा है जबकि इन शहरों में डीजल की कीमत 100 रुपये से नीचे ही बनी हुई है।

सरकार का दावा 

इन सब हालात के बीच केंद्र सरकार और ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि देश में एलपीजी गैस की कोई बड़ी कमी नहीं है। इंडिया टुडे और अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास इतना गैस भंडार मौजूद है कि अगले 25 से 30 दिनों तक लोगों की जरूरत पूरी की जा सकती है। साथ ही रिफाइनरियों को भी गैस का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सप्लाई पर कोई असर न पड़े। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने भी लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई है और कहा है कि देश में ऊर्जा की पर्याप्त व्यवस्था है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर चिंता जरूर बढ़ी है और कुछ जगहों पर लोगों को इंतजार और कतारों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है जिसका असर आने वाले समय में ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई पर पड़ सकता है। फिलहाल हालात पर सरकार और कंपनियां नजर बनाए हुए हैं ताकि आम लोगों को बड़ी परेशानी न हो।

 

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