इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। वहीं सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर 12 जुलाई 2026 तक चुनाव करा लिए जाएंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख़
पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल किया कि आखिर चुनाव तय समय के अंदर क्यों नहीं कराए जा रहे हैं और क्या आयोग संवैधानिक समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी कर पाएगा?
यह मामला याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा। याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 243E के तहत पंचायतों के कार्यकाल को अधिकतम पांच साल तक ही सीमित करता है जो उनकी पहली बैठक से गिना जाता है। इस समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता इसलिए कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना जरूरी है।
पंचायत चुनाव को लेकर सरकार की तैयारी
लखनऊ में 18 मार्च 2026 को एक वार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में तीन स्तरीय पंचायती राज चुनाव 12 जुलाई तक पूरा किया जाएगा। सरकार ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पालन किया जाएगा। राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगली कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग का गठन कर दिया जाएगा और इसके बाद 12 जुलाई 2026 तक पंचायत चुनाव करा लिए जाएंगे।
मंत्री के मुताबिक ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे सभी पदों का कार्यकाल 12 जुलाई तक है इसलिए उससे पहले ही चुनाव पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी साफ कहा है कि चुनाव कराने में कोई बड़ी दिक्कत नहीं दिख रही है और सरकार के साथ राज्य निर्वाचन आयोग भी पूरी तैयारी में है।
चुनाव की तारीख तय करने की जिम्मेदारी किसकी
पंचायत चुनाव को लेकर सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग के वकील की ओर से दलील दी गई कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12-BB के मुताबिक यह जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। सरकार का दायित्व है कि वह राज्य चुनाव आयोग के परामर्श से प्रधान के आम चुनाव या उपचुनाव की तारीख तय करने वाली अधिसूचना जारी करे।
कोर्ट ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से साफ जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि 19 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के आधार पर क्या आयोग समय पर चुनाव पूरा करा सकता है या नहीं? साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि हालात को देखते हुए चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले हो जाने चाहिए थे।
अगली सुनवाई की तारीख तय
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट अब 25 मार्च को दोपहर 2 बजे फिर से सुनवाई करेगा। यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिविजन बेंच ने दिया है। हाईकोर्ट की टिप्पणी और पंचायतों के कार्यकाल की समय सीमा को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यूपी में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया मई-जून में ही पूरी करानी पड़ेगी। अब नजर 25 मार्च की अगली सुनवाई पर है जब सरकार और निर्वाचन आयोग को अपनी स्थिति साफ करनी होगी।
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