बिहार के पटना में एक जनरल कास्ट के टीचर द्वारा एक दलित और नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। पटना जिले के धनरूआ थाना के अंतर्गत आने वाले एक गांव का मामला सामने आया है जहां एक दलित परिवार की 7 वर्षीय नाबालिक लड़की के परिवार द्वारा आरोप लगाया गया है कि उसकी लड़की के साथ स्कूल के गणित टीचर द्वारा डेढ़ महीने से लगातार लड़की के साथ बलात्कार करने की कोशिश की गई और फिर बलात्कार जैसी घटना को दो बार अंजाम दिया गया।
रिपोर्ट – सुमन, लेखन – रचना
परिवार वालों का आरोप है कि काफी मेहनत के बाद पुलिस द्वारा केस दर्ज किया गया लेकिन उचित कार्रवाई करने में काफी लापरवाही बरती गई है। यह भी आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज करवाने के समय पोक्सो एक्ट के साथ-साथ एससी एसटी एक्ट भी पुलिस द्वारा नहीं लगाया गया और साथ ही पुलिस उनका सहयोग भी नहीं कर रही है। यह मामला 25 मई 2026 को धनरूआ थाना में दर्ज किया गया था। लड़की पक्ष का आरोप है कि इस मामले में अब तक केवल पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है जबकि अन्य संबंधित धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं। उनका यह भी कहना है कि मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई धीमी गति से आगे बढ़ रही है। आरोपी अविनाश राय टीचर डीएवी पब्लिक स्कूल नाम के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते है।
महिला का बयान और पूरा मामला
नाबालिक लड़की की मां अपने बयान में बताती है कि “स्कूल की छुट्टी के दौरान स्कूल से होमवर्क मिलता है और मैंने अपनी बेटी को कहा कि होमवर्क कर लो तो उसने कहा कि मुझे होमवर्क नहीं करना मुझे स्कूल नहीं जाना है। स्कूल में अच्छे लोग नहीं रहते हैं सब गंदे लोग रहते हैं।” उसके बाद बहुत ही प्यार से पूछने पर लड़की ने बताया कि स्कूल के जो गणित के टीचर है उसके द्वारा लड़की के साथ गंदा काम किया जाता है और उसने बलात्कार जैसी घटना को दो बार अंजाम दिया है। इस बात को सुनते ही परिवार जन परेशान होकर सीधे एसपी के पास पहुंचे।
महिला ने बताया कि 24 मई 2026 को वे एसपी कार्यालय पहुंचे थे लेकिन वहां उन्हें एसपी से नहीं मिलने दिया गया। उसी दौरान धनरूआ थाना का एक पुलिसकर्मी वहां मौजूद था। उसने महिला से कहा कि आप थाने जाइए आपका काम हो जाएगा। इसके बाद 25 मई 2026 को महिला धनरूआ थाना पहुंची। वहां करीब उन्हें करीब एक से दो घंटो तक बैठा कर रखा गया। बाद में थाना प्रभारी आए और उनका बयान दर्ज किया और मामला दर्ज करने की कार्यवाही की गई।
26 मई 2026 को लड़की का मेडिकल कराया गया और 27 मई को मेडिकल रिपोर्ट तैयार हो गई। लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रिपोर्ट की कॉपी नहीं दी। जब रिपोर्ट मांगी तो कहा गया कि रिपोर्ट उनके पास है और ऐसे मामलों में लड़की पक्ष को मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी जाती है। महिला कहती है “मैं जानना चाहती हूं कि जब मेरी बेटी के साथ इतनी गंभीर घटना हुई है तो मुझे मेडिकल रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई? मैंने बीए की पढ़ाई की है मेरी समझ से इस तरह के मामले में लड़की के परिवार के पास सभी जरुरी दस्तावेज और सबूत होने चाहिए। लेकिन हमें रिपोर्ट नहीं दी गई। इसके बाद पूरा मामला ठंडा पड़ गया और हमें समझ नहीं आया कि पुलिस आख़िर इस मामले में क्या कार्यवाही कर रही है।”
मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया
महिला ने बताया कि काफी कोशिश के बाद भी उन्हें रिपोर्ट नहीं दिया गया जिसके बाद डॉक्टर से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि रिपोर्ट तो आई है और रिपोर्ट में है कि आपकी बेटी के साथ बलात्कार हुआ है। वे कहती हैं “इसे सुनकर मानो मैं पूरी हिल सी गई थी ये घटना एक मां को तोड़कर रख देता है हम बच्चे को पढ़ने के लिए स्कूल भेज रहे थे और लड़की के साथ यह सब हो गया। स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और टीचर ने अपने स्टाफ रूम में बुलाकर के मेरी बेटी के साथ ऐसा काम किया है तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कि पूरे स्कूल में किसी ने इस कारनामे को देखा नहीं होगा। मैं चाहती हूं की प्रिंसिपल पर केस हो और प्रिंसिपल को कड़ी से कड़ी सजा मिले और ऐसे स्कूलों को बंद करवा देना चाहिए जहां पर ऐसी छोटी-छोटी लड़कियों के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं। आज मेरी लड़की के साथ हुआ कल को किसी और के साथ ये हो सकता है। मेरी बेटी ने बताया है कि जब वह तीसरी क्लास में पढ़ने जा रही थी जब इसका एडमिशन हुआ था तो वहां की कुछ लड़कियों के परिजन द्वारा उस स्कूल से नाम कटवा लिया है।”
महिला ने बताया कि उनके इस केस में पोक्सो के साथ-साथ एससी एसटी एक्ट भी लगना चाहिए लेकिन पुलिस ने ये एक्ट नहीं लगाया है। उनका आरोप है “मैं एससी समाज से आती हूं और जिस व्यक्ति ने यह काम किया है वह जनरल कास्ट से आता है और थाना प्रभारी भी जनरल कास्ट से बिलॉन्ग करता है तो कहीं यह तो नहीं है कि जनरल कास्ट होने की वजह से इस केस में एससी एसटी एक्ट नहीं लगाया गया है।”
नाबालिग लड़की द्वारा बताया गया बयान
नाबालिक लड़की से रिपोर्टर सुमन की बातचीत हुई काफी सारी बातें करने के बाद लड़की ने बताया कि वह दूसरी क्लास में पढ़ती थी तो बहुत ही अच्छा था सारे टीचरों का जो स्वभाव था वह बहुत अच्छा था क्योंकि वहां पर सब महिला टीचर थी। टीचरों ने ही उसे बताया था कि गुड टच बेड टच क्या होता है। वह जब तीसरी क्लास में गई तो वहां पर सारे टीचर पुरुष है उसमें से जो गणित के टीचर हैं वह उसके साथ गंदा काम करते थे।
उसने बताया कि टीचर लड़की को स्टाफ़ रूम में बुलाया और जब वे अपने दोस्तों के साथ गई तो दोस्तों को वापस जाने को कह दिया गया। जब वो अकेली थी तो टीचर द्वारा उसे बहुत डाँटा गया। फिर जब दूसरी बार गई तो गाल को छूने लगा जो उसे सही न लगा। जब लड़की ने कहा कि सर ये तो बेड टच है तो टीचर ने स्केल को लाइटर से गर्म करके उसके हाथों को जलाने की कोशिश की और मुंह बंद कर दिया। लड़की ने बताया कि उसे धमकी दिया गया कि अगर इस बारे में किसी को बताया तो तुम्हारे मम्मी पापा को मार देंगे। लड़की के अनुसार उसके सिर को कई बार दीवाल से भी टकराया जिससे लड़की को कई चोटें भी आई। इसके बाद लड़की के साथ हुए बलात्कार को भी उसने बताया।
मामले को हल्के में लिया गया
महिला का आरोप है कि 25 मई को मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने आरोपी को गिरफ़्तार नहीं किया। करीब 20 से 25 दिन बाद आरोपी ने खुद थाने में सरेंडर किया। उनका आरोप है कि सरेंडर के बाद भी पुलिस ने उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी। उन्हें अब तक मेडिकल जांच का रिपोर्ट भी नहीं दिया गया और इस मामले में एससी एसटी एक्ट भी नहीं लगाया।
महिला के अनुसार उन्होंने एक और आवेदन देकर स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्यवाही करने और स्कूल को बंद करवाने की मांग की थी लेकिन उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। तब मजबूरी में जुलाई में उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी बात लोगों के सामने रखी। सोशल मीडिया में मामला सामने आने के बाद भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे संपर्क किया और महिला का समर्थन किया। उन्होंने स्कूल के खिलाफ कार्यवाही और स्कूल बंद को बंद करने की मांग की और थाना प्रभारी से इस संबंध में बात की। इसके बाद यह मामला चर्चे में आया।। उनका आरोप है कि अब उन्हें गलत ठहराने की कोशिश की जा रही है।
अभी यह केस चल ही रहा है और केस कोर्ट पर नहीं पहुंचा है। चार सीट फाइल नहीं हुई है। “मैं किसी को भी छोडूंगी नहीं मेरी बेटी के साथ जिसने भी किया है वह तो जेल जाएगा और मैं चाहती हूं स्कूल का सीसीटीवी कैमरे चेक किए जाए और ऐसा कितनी लड़कियों के साथ हुआ है वह भी देखा जाए। पुलिस ने भी एससी एसटी एक्ट नहीं लगाया। मुझे इंसाफ चाहिए अपराधी को उम्र कैद या फांसी की सजा हो और स्कूल बंद हो।” अभी तक महिला से कुछ संस्था के लोग मिलने आए थे और कुछ समाजसेवी उनका सहयोग कर रहे हैं जिसकी वजह से यह केस हाइलाइट है।
थाना प्रभारी द्वारा क्या कहा गया
धनरूआ थाना प्रभारी अमित कुमार ने मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अहा कि यह घटना 25 मई है और जब महिला थाने पहुंची थी उस समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे। लेकिन जैसे ही उन्हें जानकारी मिली महिला के सामने ही आवेदन लिखा गया और फिर उसी आधार पर आगे की कार्यवाही शुरू की गई। थाना प्रभारी के अनुसार घटना के बाद आरोपी फ़रार था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और दबाव बनाने के लिए उसकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया। बाद में आरोपी ने स्वयं सरेंडर कर दिया। इस तरह के मामले पेचीदे होते हैं इसलिए जांच में सावधानी बरतनी पड़ती है इसी कारण जांच से जुड़ी रिपोर्ट को भी लड़की के परिवार वालों को नहीं दिया गया ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो। वहीं आरोपी के सरेंडर के करीब 22 दिन बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और फिलहाल मामला न्यायालय में चल रहा है।
एससी एसटी एक्ट नहीं लगाए जाने के सवाल पर थाना प्रभारी ने कहा कि उस समय उलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्यवाही की गई थी और एसएफएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया था। अगर लड़की पक्ष इसके लिए अलग से आवेदन देता है तो उसके आधार पर आगे की क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी। स्कूल प्रिंसिपल के मामले पर कहा कि वरिष्ठ अधिकरियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यदि जांच में स्कूल या प्रबंधन की भूमिका सामने आती है तो उस पर भी कार्यवाही की जाएगी।
वहीं लड़की की मां के अनुसार डर के कारण लड़की का स्कूल जाना बंद करवा दिया गया है। इस साल उसका किसी भी स्कूल पर नाम नहीं लिखा है। लड़की काफी डरी हुई है और मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। अगर ये सभी स्थिति ठीक हो जाती है तो अगले साल लड़की का स्कूल में एडमिशन कराया जाएगा।
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