खबर लहरिया Blog कोरोना महामारी लेकर आई नयी मुसीबतें- कहीं महंगाई, कहीं रोज़गार जाने का बढ़ा खतरा

कोरोना महामारी लेकर आई नयी मुसीबतें- कहीं महंगाई, कहीं रोज़गार जाने का बढ़ा खतरा

जहाँ एक तरफ इस समय हमारा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, वहीँ दूसरी ओर दिन पर दिन मेंहगे हो रहे फल सब्ज़ियों से आम जनता परेशान हो चुकी है। पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील में आए दिन फलों और सब्जियों के दामों में बढ़ोत्तरी और गिरावट हो रही है। यहाँ कभी तो फल-सब्ज़ियों के दाम गिर जाते हैं , तो दूसरे ही दिन फिर इनका रेट आसमान छूने लग जाता है।

इस समय बदलते मौसम के कारण कई लोग बीमार भी पड़ रहे हैं, ऐसे में हर कोई फल खरीदना चाह रहा है लेकिन जिस प्रकार से इनके दाम बढ़ रहे हैं, गरीब लोगों के लिए यह सब खा पाना मुश्किल सा हो गया है। जब तक लॉकडाउन नहीं लगा था, तब तक फल इतने महंगे नहीं थे, लेकिन 14 अप्रैल को लॉकडाउन लगने के बाद से सभी चीज़ों के दाम दोगुने हो गए हैं। लोगों की मानें तो जो सेब, संतरा पहले 50-60 रूपए प्रति किलो बिक रहा था, उसका रेट अब 100-200 रूपए प्रति किलो हो गया है।

अचानक दोगुना हुआ फलों का दाम-

पन्ना के फल व्यापारी विनोद कुशवाहा के मुताबिक़ कुछ फल, सब्ज़ियों के बढ़े हुए वर्तमान दाम इस प्रकार हैं-
1.सेब- 180 रुपए प्रति किलो
2. संतरा- 180 रुपए प्रति किलो
3. अनार- 123 रुपए प्रति किलो
4. अंगूर- 30 रुपए प्रति पाव

सब्ज़ियों के रेट में आई है गिरावट-

बाबूलाल ने हमें बताया कि अचानक दोबारा लगे लॉकडाउन के कारण सरकार ने फलों के दाम बढ़ा दिए हैं। क्योंकि डॉक्टर इस समय हर बीमारी में अनार व सेब खाने को बोलता है, इसलिए सरकार ने इन फलों की कीमत बढ़ाने का फैसला किया है। जहाँ एक तरफ फलों के दाम बढ़े हैं, वहीँ दूसरी तरफ कई सब्ज़ियों के रेट में भारी गिरावट देखने को मिली है। जहाँ हफ्ता भर पहले देखा गया था कि बैंगन 40 रूपए प्रति किलो, टमाटर 20 रूपए प्रति किलो और खीरा- ककड़ी 40 रूपए प्रति किलो बिक रहा था, वहीँ वर्तमान में टमाटर का रेट 5 रूपए प्रति किलो एवं थोक का भाव 2 रूपए प्रति किलो पहुँच चुका है।इसके साथ खीरा-ककड़ी भी 10 रूपए प्रति किलो के रेट में बिक रहा है।

जहाँ सब्ज़ियों के दामों में अचानक से आई गिरावट से आम जनता को कुछ राहत मिली है, वहीँ किसानों का कहना है कि अगर इस दर से सब्ज़ियों के रेट गिरते रहे, तो उन्हें काफी दिक्कतें आ सकती हैं। कई किसानों की मानें तो इतने कम पैसे में न ही उनका घर खर्च निकल पाएगा और न ही खेती-बाड़ी का खर्च निकल पाएगा।

ललितपुर में लॉकडाउन लगने से ठप्प हुआ सब्ज़ी का व्यापार-

कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला है ललितपुर ज़िले के महरौनी ब्लॉक में जहाँ कई किसानों एवं सब्ज़ी विक्रेताओं ने सब्ज़ियों के दाम गिरने के कारण उनका खर्चा न चल पाने की शिकायत की है। खिरिया भारन्जू गाँव की रश्मि ने हमें बताया कि वो लोग खुद ही खेत में सब्ज़ी उगाते हैं, और फिर बाज़ार में बेचते हैं। यह लोग जो सब्ज़ियां पहले 50-60 रूपए प्रति किलो की हिसाब से बेचते थे, वही सब्ज़ियां अब 10 रूपए प्रति किलो में बिक रही हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण फिलहाल इन लोगों के पास रोज़गार का कोई दूसरा ज़रिया भी नहीं बचा है, ऐसे में इनका अपने बच्चों का पेट पालन करना दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। इसी गाँव के निवासी भदौरा ने हमें बताया कि वो एक एकड़ के खेत में टमाटर की खेती करते हैं लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण वो कहीं बाहर जाकर अपनी सब्ज़ियां नहीं बेच पा रहे हैं। इसके साथ ही ललितपुर ज़िले में सब्ज़ियों के दाम गिरने के कारण उन्हें सब्ज़ियों को बेचकर ज़्यादा पैसे भी नहीं मिल पा रहे।

कई सब्ज़ी विक्रेताओं ने सब्ज़ियां न बिकने के कारण, उनके ख़राब होने की शिकायत भी की। इन लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण लोग रोड पर सब्ज़ी बेच रहे लोगों से कुछ भी खरीदने से कतरा रहे हैं, क्योंकि लोगों को इन सब्ज़ी विक्रेताओं से कोरोना से संक्रमित होने का खतरा है। ऐसे में इन विक्रेताओं की ज़्यादातर सब्ज़ियां ख़राब हो रही हैं और इनकी महीनों की मेहनत भी बेकार जा रही है। इन लोगों को बस यही चिंता है कि आने वाले दिनों में अगर लॉकडाउन बढ़ा या संक्रमण का खतरा बढ़ा, तब ये लोग कैसे अपना घर-खर्च चलाएंगे।

किसानों का कहना है कि इस वर्ष का लॉकडाउन लोगों के लिए अत्यधिक परेशानियां लेकर आया है, क्योंकि पिछले वर्ष जब लॉकडाउन लगा था तब तो लोगों से उधार मांग कर जैसे-तैसे परिवार का पेट पालन कर लिया था, लेकिन इस बार तो कोई भी उधार देने को भी नहीं तैयार है। जो पैसे जोड़ कर खेत में सब्ज़ियां लगाई थीं, वो सब्ज़ियां भी अब बर्बाद हो चुकी हैं।

जहाँ एक तरफ कई किसान सब्ज़ियों के रेट गिरने से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, वहीँ खरीददार फलों के बढ़ते दामों से परेशान हैं। ऐसे में लोग जो पहले से कोरोना महामारी के कारण रोज़ नयी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उनके सामने रोज़गार और महंगाई भी नयी मुसीबत बनकर खड़ा हो गया है। इस समय ज़रूरी यह है कि सरकार इस महामरी से निपटने के साथ-साथ इन मामलों की तरफ भी ध्यान दे और गरीबों को कुछ सुविधा उपलब्ध कराये।

इस खबर को खबर लहरिया के लिए अनीता और राजकुमारी द्वारा  रिपोर्ट एवं फ़ाएज़ा हाशमी द्वारा लिखा गया है।