चित्रकूट को धर्म और अध्यात्म की नगरी कहा जाता है। यहां के हर पहाड़, नदी और घाट से कोई न कोई कहानी जुड़ी हुई है। इन्हीं खास जगहों में से एक है आरोग्यधाम, जहां वर्षों से लोग स्नान करने के लिए पहुंचते रहे हैं। स्थानीय मान्यता है कि पहले यहां के प्राकृतिक जल में स्नान करने से बीमारियां दूर होती हैं। लोगों का विश्वास है कि इस पानी में नहाने से शरीर को ताजगी मिलती है और कई तरह की शारीरिक परेशानियों में राहत महसूस होती है। शायद यही वजह है कि इस जगह को आरोग्यधाम’ नाम मिला है।
रिपोर्ट – नाज़नी, लेखन – सुचित्रा
चित्रकूट का आरोग्यधाम मध्य प्रदेश के सतना जिले में मंदाकिनी नदी के किनारे, रामघाट से करीब 5 किमी दूर पर स्थित है। आरोग्यधाम में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की अच्छी सुविधाएं हैं। यहां सुंदर बगीचे और एक योग केंद्र भी है, जहां लोग योग कर सकते हैं। शाम के समय पर्यटक मंदाकिनी नदी में स्नान करने जाते हैं। हर शाम यहां बड़ी संख्या में लोग नदी में स्नान के लिए पहुंचते हैं।
‘आरोग्य’ का मतलब होता है निरोग यानी स्वस्थ रहना। हालांकि आरोग्यधाम के नाम और यहां के पानी से जुड़ी इन मान्यताओं के पीछे कोई स्पष्ट ऐतिहासिक दस्तावेज या शिलालेख नहीं मिलता, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच इसकी अपनी अलग पहचान है।
आरोग्यधाम लोगों की आस्था से जुड़ा
आरोग्यधाम सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है बल्कि आस्था और पुरानी मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। चट्टानों के बीच बहता ठंडा पानी, चारों तरफ हरियाली और शांत वातावरण यहां आने वाले लोगों को अपनी ओर खींचता है।
‘अमावस्या और रविवार को उमड़ती थी भीड़
70 वर्षीय स्थानीय निवासी राधेश्याम बताते हैं कि वह लंबे समय से जानकीकुंड के पास रहते हैं और आरोग्यधाम को देखते आ रहे हैं। उनके मुताबिक पहले रविवार और अमावस्या के दिन यहां सैकड़ों लोग स्नान करने पहुंचते थे। आसपास के लोग तो अक्सर आते थे, जबकि कई परिवार दूर से भी यहां आते और वर्षों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।
उनका कहना है कि लोगों के लिए यह जगह सिर्फ नहाने की जगह नहीं थी, बल्कि आस्था और स्वास्थ्य से जुड़ी एक खास जगह रही है।
70 किलोमीटर दूर से स्नान करने आती हैं सीमा
बांदा से आईं सीमा बताती हैं कि जब भी उनके रिश्तेदार बाँदा आते हैं तो वह उन्हें आरोग्यधाम जरूर लेकर आती हैं। वह करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय करके यहां नहाने पहुंचती हैं।
सीमा कहती हैं कि परिवार के लोग घर से पूड़ी-सब्जी और दूसरी खाने की चीजें बनाकर लाते हैं। पहले सभी साथ बैठकर खाना खाते हैं और फिर पानी में उतरते हैं। उनके मुताबिक यहां का ठंडा पानी और प्राकृतिक माहौल इतना अच्छा लगता है कि दो-तीन घंटे तक पानी से निकलने का मन नहीं करता।
गर्मी में ठंडे पानी ने दिलाई राहत
कानपुर से आईं करीब 50 वर्षीय जमुना देवी पहली बार आरोग्यधाम पहुंचीं। वह बताती हैं कि पहले चित्रकूट की कई जगहों पर घूम चुकी थीं, लेकिन आरोग्यधाम नहीं आ पाई थीं।
इस बार परिवार ने यहां आने का फैसला किया। गर्मी के बीच जब वह आरोग्यधाम पहुंचीं तो ठंडे पानी में नहाने का मौका मिला। वह कहती हैं कि यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। उनके मुताबिक बच्चे यहां मनोरंजन के लिए खुश होते हैं।
महिलाओं के लिए कपड़े बदलने की व्यवस्था नहीं
आरोग्यधाम में आने वाले लोगों की खुशी के बीच कुछ परेशानियां भी हैं। कानपुर से आईं संचरी देवी बताती हैं कि जगह बहुत अच्छी है, लेकिन महिलाओं के लिए कपड़े बदलने की उचित व्यवस्था नहीं है।
उनके मुताबिक पुरुष कहीं भी कपड़े बदल लेते हैं, लेकिन महिलाओं और लड़कियों को काफी परेशानी होती है। फिलहाल एक महिला ने साड़ियों के पर्दे लगाकर महिलाओं के कपड़े बदलने की जगह बनाई है और इसके लिए 10 से 20 रुपये लेती हैं।
उस महिला ने अपना नाम नहीं बताया। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से जगह घेरकर पर्दे लगाए हैं और यहीं से उनकी रोजी-रोटी चलती है।
लेकिन इसके साथ ही सवाल यह भी है कि क्या इस प्राकृतिक जलस्रोत का सही तरीके से संरक्षण हो रहा है? क्या आने वाले वर्षों में भी यहां पर्याप्त और साफ पानी उपलब्ध रहेगा? और क्या आने वाली पीढ़ियां आरोग्यधाम को उसी रूप में देख पाएंगी, जैसा बुजुर्ग आज याद करते हैं?
आस्था, प्रकृति और पर्यटन का संगम
आरोग्यधाम सिर्फ एक स्नान स्थल नहीं है। यह चित्रकूट की उस स्थानीय विरासत का हिस्सा है, जहां आस्था, प्रकृति और पर्यटन एक साथ दिखाई देते हैं। यहां आने वाले लोगों के लिए यह जगह किसी के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र है, तो किसी के लिए गर्मी में ठंडे पानी और प्राकृतिक माहौल का आनंद लेने की जगह।
पानी से बीमारियां ठीक होने की मान्यता कितनी सही है, इसे लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं हैं। लेकिन लोगों की आस्था और इस जगह से जुड़ी वर्षों पुरानी परंपरा इसकी अपनी अलग पहचान जरूर बनाती है।
अब जरूरत है कि आरोग्यधाम की प्राकृतिक सुंदरता और जलस्रोत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ यहां आने वाले लोगों के लिए महिलाओं के कपड़े बदलने की जगह, साफ-सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की भी व्यवस्था हो। क्योंकि किसी विरासत की पहचान सिर्फ उसकी पुरानी मान्यताओं से नहीं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने से भी होती है।
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