खबर लहरिया Blog चित्रकूट: महीनों से बंद पड़ा आंगनवाड़ी केंद्र, गाँव के बच्चों की पढ़ाई में आ रही बाधा

चित्रकूट: महीनों से बंद पड़ा आंगनवाड़ी केंद्र, गाँव के बच्चों की पढ़ाई में आ रही बाधा

जब से कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लगा तब से यह केंद्र बंद ही है। ग्रामीणों की मानें तो अब तो सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को भी खोल दिया गया है लेकिन इस आंगनवाड़ी केंद्र को नहीं खोला जा रहा।

जिला चित्रकूट के ब्लॉक रामनगर के गाँव रामनगर में बने आंगनवाड़ी केंद्र में पिछले कई महीनों से ताला लगा हुआ है। लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी से पहले तो यह केंद्र रोज़ाना खुलता था और गाँव के प्राथमिक कक्षा के बच्चे यहाँ पढ़ने भी आते थे, लेकिन जब से कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लगा तब से यह केंद्र बंद ही है। ग्रामीणों की मानें तो अब तो सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को भी खोल दिया गया है लेकिन इस आंगनवाड़ी केंद्र को नहीं खोला जा रहा।

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केंद्र बंद होने के चलते नहीं मिल रहा पोषाहार-

इस गाँव की रहने वाली कई महिलाओं ने हमें बताया कि स्कूल न आंगनवाड़ी केंद्र न खुलने के कारण पहली से पांचवी कक्षा के बच्चे कुछ पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। सुनीता का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्र बंद होने के चलते पहले जो बच्चों और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषाहार मिलता था, वो मिलना भी बंद हो गया है। इसके साथ ही गाँव के बच्चे इंटरनेट या मोबाइल की सुविधा न होने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं। पहले तो आंगनवाड़ी केंद्र में पढ़ाई करके ये बच्चे बहुत कुछ सीख गए थे, लेकिन अब ग्रामीण बच्चे पिछला पढ़ा हुआ भी भूल चुके हैं।

लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से इस केंद्र को खुलवाने की मांग की है, जिसके बाद वो लोग एक-दो दिन के लिए इस केंद्र को खोल भी देती हैं, लेकिन फिर दोबारा यहाँ ताला डाल दिया जाता है।

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बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए केंद्र का खुलना ज़रूरी-

लोगों का कहना है कि इस ग्राम पंचायत में लगभग 50 घरों से बच्चे इस आंगनवाड़ी केंद्र में पढ़ने आते थे, यहाँ तक कि करीब 2 साल पहले यहाँ साफ़-सफाई करवाई गई थी और नया शौचालय भी बनवाया गया था, नए पेड़-पौधे लगाए गए थे और दीवारों पर बच्चों के सीखने के लिए चित्रकला भी करवाई गई थी। लेकिन उसके कुछ ही महीनों बाद इस केंद्र को बंद कर दिया गया। लोगों का कहना है कि अगर इस केंद्र को दोबारा खोल दिया जाए, तो गाँव के बच्चे भी पढ़-लिख सकेंगे और कुछ सीख सकेंगे।

गाँव में मौजूद आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता सुनीता देवी का कहना है कि वो उन्हें अपनी तरफ से केंद्र खोलने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन विभाग की तरफ से न ही उन्हें किसी प्रकार की सुविधा दी जा रही और न ही बच्चों के खान-पान आदि का सामान दिया जा रहा है। जिसके कारण वो इस केंद्र को खोलने में असमर्थ हैं। सुनीता का कहना है कि अगर उन्हें इस केंद्र को स्थायी रूप से खोलने की इजाज़त मिल जाए, तो गाँव के बच्चों का भविष्य भी सुधारा जा सकता है।

गाँव के प्रधान कामता प्रसाद का कहना है कि इस स्कूल की सुचारू रूप से चलाने की ज़िम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की है।

प्रधान की मानें तो वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इस केंद्र को खुलवाया जाए और ग्रामीणों को जो भी सरकारी सुविधाएं मिलनी हैं, वो दिलवाई जाएँ।

इस खबर को खबर लहरिया के लिए सहोद्रा द्वारा रिपोर्ट किया गया है।

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