खबर लहरिया Blog Chhattisgarh: मांग न पूरी होने पर 1 जुलाई से स्कूलों में बंद हो सकता है मध्यान भोजन 

Chhattisgarh: मांग न पूरी होने पर 1 जुलाई से स्कूलों में बंद हो सकता है मध्यान भोजन 

                                

छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले मध्यान भोजन योजना प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के गांधी मैदान में आयोजित बैठक में जिले भर के मध्यान भोजन रसोईया पहुंचे। मध्यान भोजन रसोईया कल्याण संयुक्त संघ की बैठक के बाद रसोईयों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार को चेतावनी दी है।

फोटो साभार: पत्रिका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संघ का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो 1 जुलाई 2026 से सरकार स्कूलों में मध्यान भोजन बनाने का काम बंद कर दिया जाएगा। इससे हजारों विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन पर असर पड़ सकता है। 

धमतरी के आयोजित बैठक में जिले भर से रसोईया कर्मियों ने अपनी परेशानी सामने रखी। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से हर साल 16 जून से 30 जून तक की अवधि का मानदेय नहीं दिया गया है। संघ के अनुसार लंबे समय से कम मानदेय पर काम कर रहे रसोईयों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है और उनके मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले में करीब 2600 रसोईयाँ कार्यरत हैं जिनके सामने भुगतान में देरी के कारण आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 

नई दुनिया के रिपोर्ट अनुसार संघ के संरक्षक हीराचंद यादव प्रदेश अध्यक्ष राजराज कश्यप और मेघराज कोशल ने कहा है कि वर्ष 1995 से मध्यान भोजन योजना से जुड़े रसोईया कर्मियों को अब तक न तो स्थाई दर्जा मिला है और न ही सम्माजनक मानदेय। उनका आरोप है कि कई जगहों पर स्वयं सहायता समूहों या स्थानीय स्तर के फैसलों के कारण वर्षों से काम कर रहे रसोईयों को हटाया जा रहा है। वहीं छात्रों की संख्या कम होने के कारण बताकर भी कई कर्मियों की सेवाएँ समाप्त की जा रही है। 

रसोईया संघ ने सरकार से कलेक्टर दर के अनुसार मानदेय, अंशकालिक कर्मचारियों को पूर्णकालिक दर्जा सेवा सुरक्षा और लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। संघ का कहना है कि यदि मांगों पर जल्द और सकारात्मक फैसला नहीं होता है तो आंदोलन को और प्रदेश भर में फैलाया जाएगा। 

 

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