छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक बार फिर धर्मांतरण के मामले उठ रहे हैं। कांकेर जिले के पीढ़ापाल अनुसूचित क्षेत्र में मुरागांव में 26 ग्राम सभाओं द्वारा सामूहिक रूप से सभा की गई जिसमें कुछ विशेष कदम उठाए गए –
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्राम सभा द्वारा आरोप लगाया गया कि गांवों में अवैध चर्च चल रही है और अवैध प्रार्थनाएं की जा रही हैं और पादरियों द्वारा लोगों को स्वास्थ देवा के नाम पर बहला फुसला कर धर्मांतरण किया जा रहा है।
इसी कारण से इस सामूहिक बैठक में 26 ग्राम सभाओं द्वारा यह निर्णय लिया गया कि ईसाई चर्च, प्रार्थना सभा और पादरियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। इसपर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसी के साथ ही जिसने धर्म परिवर्तन किया (मतांतरित)है उसे अनुसूचित क्षेत्र में जमीन न देने की बात कही गई। साथ ही जो मतांतरित आरक्षण का लाभ ले रहे हैं उसकी डी-लिस्टिंग का भी संकल्प लिया गया।
ये भी देखें – साल 2025 में धर्मांतरण के आरोप से निशाना बने ईसाई समुदायों की चिंताजनक स्थिति
ग्राम सभाओं द्वारा यह भी आरोप लगाया कि देवी देवताओं, आस्था, अस्मिता और विकास पर हमला हो रहा है। सामाजिक सद्भाव कमजोर हो रहा है इससे गांवों में तनाव बढ़ रहा है। बैठक में पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के पेसा गांवों में ईसाइयों, धर्मांतरित व्यक्तियों को जमीन नहीं देने का फैसला लिया।
इस ग्राम सभा के बैठक में ग्राम सभा अध्यक्ष, सरपंच, पंच, गायता, पटल, ठाकुर, भूमियार, माँझी, सिरहा, पेन पुजारी और सर्व समाज के प्रमुख लोग शामिल हुए जिसकी अध्यक्षता ग्राम सभा अध्यक्ष मुरागांव द्वारा की गई।
इस बैठक में मतांतरित व्यक्तियों के प्रमाण पत्र निरस्त करने और शासकीय कर्मचारियों के मतांतरण की सूचना प्रशासन को देने का निर्णय लिया गया।
ये भी देखें – छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मामले में कानून हुआ सख्त
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
