खबर लहरिया Hindi भाजपा नेता ने किया ऐ. आई. का झूठा इस्तेमाल: अभिजीत दीपके के खिलाफ फैलाई झूठी अफवाह

भाजपा नेता ने किया ऐ. आई. का झूठा इस्तेमाल: अभिजीत दीपके के खिलाफ फैलाई झूठी अफवाह

10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, और उनके साथी सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दस को पुलिस ने दिल्ली में उनके प्लेन लैंड होते ही हिरासत में लेलिया था –

CJP के संस्थापक और कार्यकर्ता (फोटो साभार: CJP)

जिसके बाद अगले 24 घंटे तक उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126/170 के तहत एहतियाती गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक उन्हें 50,000 रूपए के ज़मानत बांड लेकर  छोड़ा है, जिसकी शर्त यह है की उन्हें सार्वजनिक जीवन में एक साल के लिए अच्छे बर्ताव करना होगा। 

कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर दीपके ने लिख कर इस बात को ठुकरा दिया और कहा की उन्होंने कोई बैल बांड नहीं भरी है. पुलिस की इस बात को झुठलाने पर भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने एक फोटो डाल कर कहा की दीपके झूठ बोल रहे हैं. फोटो तथाकथित तौर पर एक ‘बैल बांड’ थी, जिस पर अभिजीत दीपके का नाम और हस्ताक्षर के साथ मंज़ूरी थी कि वह एक साल तक अच्छे व्यवहार पर बाहर छूट रहे हैं. इस फोटो पर विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट का भी हस्ताक्षर था और इस पर भारत का राजकीय प्रतीक अशोक स्तम्भ भी था. 

दूसरे यूज़र्स ने उस फोटो को देखते ही उससे ऐ. आई. से बना हुआ पहचान लिया क्योंकि फोटो में बने हुए अशोक स्तम्भ के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ नहीं बल्कि ‘ससममेव जयते’ लिखा था. 

X के दूसरे यूज़र्स  ने जब यह बात X के ऐ. आई. ग्रोक को पूछा तो उसने लगातार उस नकली फोटो को असली करार दिया। हद तब हो गई जब यूज़र्स ने ग्रोक से उसी तस्वीर को दुबारा बनाने के लिए कहा तो ग्रोक ने वही तस्वीर हूबहू बना दी. इससे यह साबित होता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तत्कालीन होने वाली घटनाओं का सही आंकलन न करके, तथ्यों का जोड़-तोड़ कर लोगों की बीच झूट फैलाने की क्षमता रखता है. 

भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता का एक झूठा तथ्य सामने लाना तो अमानवीय है ही साथ ही साथ उनका टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल करके लोगों के बीच अराजकता फैलाना नेता के रूप में एक गैरज़िम्मेदारी भी है. 

लेखन – वृंदा 

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