देशभर में 12 फरवरी 2026 को चार श्रम संहिताओं और अन्य नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत बंद और हड़ताल का आह्वान किया। इस आंदोलन को किसान, छात्र और युवा संगठनों का समर्थन मिला और छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश व पंजाब सहित कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। यूनियनों का आरोप है कि नई नीतियां मजदूरों और किसानों के अधिकार कमजोर करती हैं, इसलिए इन्हें वापस लेने की मांग की जा रही है।
12 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में देशभर में भारत बंद और हड़ताल की गई है। इस हड़ताल का आह्वान देश की 10 बड़ी ट्रेड यूनियनों ने किया है जिन्हें किसान संगठनों, छात्र और युवा संगठनों का भी समर्थन मिला है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट के पक्ष में हैं। विरोध का मुख्य कारण चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड), बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और हाल में किए गए मुक्त व्यापार समझौते हैं। आज देश के कई अलग-अलग राज्यों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली है जिनमें छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं। बता दें केंद्र सरकार की चार श्रम संहिताओं और अन्य नीतियों के विरोध में आज 12 फरवरी को देश की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों और 100 से अधिक जन संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया है।
नए लेबर कोड और यूनियनों का विरोध
दरअसल सरकार ने 21 नवंबर 2025 से देश में चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। इनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता 2020 शामिल हैं। ये चारों कानून पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह लागू किए गए हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा था कि इनसे करीब 40 करोड़ मजदूरों और कर्मचारियों को फायदा होगा। सरकार का दावा है कि ये कानून मजदूरों के हित में हैं, लेकिन ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों का कहना है कि इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और बड़े उद्योगपतियों को फायदा मिलेगा। इसी कारण आज देश के कई राज्यों में इन कानूनों के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन किए गए हैं। यूनियनों की मांग है कि पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए और मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय की जाए। इस विरोध प्रदर्शन में निजीकरण और किसान नीति विरोधी बिल भी शामिल है।
बता दें इससे पहले भी चार श्रम कोड के विरोध में मज़दूरों द्वारा प्रदर्शन और हड़ताल किए गए हैं और इस बिल को रद्द करने की मांग की गई है।
छत्तीसगढ़ में विरोध प्रदर्शन
चार श्रम संहिता बिल के विरोध में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में जोरदार प्रदर्शन किए गए। इसी क्रम में दुर्ग जिले के भिलाई शहर में भी मजदूर संगठनों ने विरोध जताया। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति के कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनकी मुख्य मांग है कि चारों श्रम कोड बिल वापस लिए जाएं। इस आंदोलन में एसीसी सीमेंट कंपनी के मजदूरों के साथ-साथ अनुसुइया नगर, सेक्टर-9 और भिलाई की कई औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे सुबह पांच बजे से ही हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
विरोध प्रदर्शन में शामिल मजदूर बस्ती की रहने वाली संजना ने कहा कि वे चार श्रम कोड बिल का विरोध इसलिए कर रही हैं क्योंकि इसमें महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल अनदेखे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि “जब महिलाएं दिन में ही पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, तो अगर उनसे 12-12 घंटे काम कराया जाएगा तो रात में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर महिलाएं इतने लंबे समय तक काम करेंगी तो बच्चों की देखभाल और परवरिश कैसे हो पाएगी जबकि देखा जाए तो यह जिम्मेदारी भी महिलाओं पर ही होती है।”
संजना ने आगे कहा कि नए-नए कानून लाकर किसानों को भी परेशान किया जा रहा है। मजदूर और किसान देश की रीढ़ हैं लेकिन सबसे ज्यादा मुश्किलें भी इन्हीं दोनों वर्गों को झेलनी पड़ रही हैं। इसी वजह से वे ऐसे श्रम कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
वहीं रायगढ़ जिले में भी ट्रेड यूनियनों ने इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत जिले के छाल क्षेत्र में चार यूनियनों के सदस्य धरना देंगे, जिसके कारण कोल इंडिया की कोयला खदानों का कामकाज बंद रहने की बात कही गई है। रायगढ़ वही क्षेत्र है जहां बड़ी मात्रा में कोयला खदान बड़ता जा रहा है।
संगठनों द्वारा की गई मुख्य मांगे
– चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करने की मांग।
– ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने की मांग।
– बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग।
– SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग।
– मनरेगा की बहाली की मांग।
– विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को रद्द करने की मांग।
बिहार में विरोध प्रदर्शन
इस बिल के विरोध में बुलाए गए देशव्यापी भारत बंद का असर बिहार की राजधानी पटना में साफ नजर आया। बंद के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित रहने की संभावना है, क्योंकि नगर निगम के कर्मचारी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं। वहीं बैंकिंग सेवाओं पर भी इसका असर दिखा। सुबह से ही कई बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी काम छोड़कर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। डाकबंगला चौराहे पर ऐक्टू और अन्य संगठनों के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए।
इस आंदोलन में ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (AIBEA) के समर्थन से पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक सहित कुल 11 बैंकों के कर्मचारी शामिल हुए। वाम दलों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर इस बंद का आह्वान किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नए लेबर कोड से न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसे अधिकार कमजोर होंगे। उनका यह भी आरोप है कि 8 घंटे काम करने का अधिकार और यूनियन बनाने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा मुश्किल बनाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में भी विरोध प्रदर्शन
केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रमिक कानूनों को लागू कराने और अन्य मांगों को लेकर आज यानी 12 फरवरी 2026 को देशभर में आम हड़ताल का ऐलान किया है जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिखेगा। इस हड़ताल से सरकारी और निजी बैंकों, बीएसएनएल, बीमा कंपनियों, डाक विभाग और अन्य केंद्रीय दफ्तरों का काम प्रभावित रहने की संभावना है। हालांकि रेलवे सेवाएं सामान्य रहने की उम्मीद जताई गई है। इस आंदोलन में आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक और बीमा कर्मचारी संगठन, केंद्रीय कर्मचारी संगठन और बीएसएनएल से जुड़े संगठन शामिल हैं। भोपाल में कर्मचारी होशंगाबाद रोड स्थित डाक भवन के सामने एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे जहां रैली और सभा का आयोजन भी किया जाएगा।
पंजाब में भी विरोध प्रदर्शन
ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर पंजाब में भी देखने को मिला जहां आम आदमी पार्टी ने 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के भारत बंद को अपना समर्थन दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पार्टी का कहना है कि श्रम और कृषि सुधारों के नाम पर केंद्र सरकार ने मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ फैसले लिए हैं। मोगा जिले में पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों ने ट्रेड यूनियनों के साथ एकजुटता दिखाते हुए बस सेवाएं रोक दीं और गेट के बाहर रैली निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच भारत बंद की घोषणा होने से उनके आंदोलन को और बल मिला और उन्होंने इसे समर्थन देने का फैसला किया।
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