खबर लहरिया Blog Yamuna Floods: बाढ़ को मनोरंजन बना आपदा से लड़ रहे लोग पर सुरक्षा?

Yamuna Floods: बाढ़ को मनोरंजन बना आपदा से लड़ रहे लोग पर सुरक्षा?

आज सुबह 7 बजे तक यमुना नदी का जलस्तर 205.71 दर्ज़ किया गया है व धीरे-धीरे जलस्तर में गिरावट भी देखने को मिल रही है।

                                          घटा मस्जिद, बाढ़ग्रस्त इलाके की सांकेतिक फोटो

Delhi News: राजधानी दिल्ली में बढ़ते यमुना नदी के जलस्तर ने राज्य के कई इलाकों को डूबो दिया है। वहीं लोग बाढ़ को मनोरंजन की तरह ले उससे तरने की कोशिश करते हुए दिख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, आज सुबह 7 बजे तक यमुना नदी का जलस्तर 205.71 दर्ज़ किया गया है व धीरे-धीरे जलस्तर में गिरावट भी देखने को मिल रही है। बढ़े हुए जलस्तर ने लोगों के घर व कारोबार को पानी में मिला दिया है। अब वे बाढ़ग्रस्त इलाके बनकर रह गए हैं। दिल्ली सरकार द्वारा बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिसकर्मियों को भी तैनात किये गए हैं। हम भी कुछ बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायज़ा लेने फील्ड पहुंचे और जानने की कोशिश की कि जो जानकारी बाढ़ग्रस्त लोगों को लेकर दी जा रही है, बात वही है या कुछ और भी।

हमने देखा कि लोग घर डूब जाने की वजह से दुःखी भी थे पर वह बाढ़ को मनोरंजन की तरह देख उसका मज़ा भी उठा रहे थे। अब पानी को देखते रहने से या शोक मनाने से पानी तो खत्म होगा नहीं, तो लोगों ने इस आपदा के बुरे समय को निकालने के लिए बाढ़ को ही मनोरंजन का ज़रिया बना लिया पर यह तरीका कितना सुरक्षित है या सही है या गलत है, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

अगर मुख्य धारा की मीडिया कवरेज की बात की जाए तो उसमें कहीं भी बाढ़ से होने वाली गंदगी और लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल नहीं उठाये गए। बस यह दिखाया गया कि कितने लोग विस्थापित हुए और कितने नहीं। वहीं छोटे दुकानदार जिनका दैनिक खर्चा उनकी दुकान से चलता था, इस बारे में भी ज़िक्र होता नहीं दिखा। हाँ, पक्ष-विपक्ष ज़रूर एक-दूसरे पर तंज करते हुए नज़र आते रहे।

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यह फोटो दिल्ली के दरियागंज इलाके की घटा मस्जिद की है। यह इलाका भी यमुना नदी के बढ़े पानी की वजह से बाढ़ग्रस्त हो चुका है। फोटो में यूं तो दिल्ली पुलिस के लगाए बैरिकेड दिखाई दे रहे हैं जो यह संकेत देते हैं कि उस तरफ नहीं जाना पर क्योंकि वहां कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं है तो स्थानीय लोग नियमों को अनदेखा करते हुए मनोरंजन व कोताहल कर रहे हैं लेकिन इसमें दोष किसे दिया जाए?

यमुना का पानी काफी समय से कई इलाकों में इकठ्ठा होने की वजह से काफी ज़्यादा गंदा भी हो रखा है। लोग पानी को देखर आतुर हैं। वे अपने परिवार, बच्चो को लेकर पानी में मनोरंजन करते हुए खुश नज़र आ रहे हैं। फोटो में एक व्यक्ति अपने दो या तीन साल के बच्चे के साथ बाढ़ वाले पानी में नहाते हुए दिखाई दे रहा है और ख़ुशी से फोटो के लिए पोज़ कर रहा है। उनके मन में यह ख्याल नहीं है कि यह पानी उनके लिए व बच्चे के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

फोटो में यह बच्चा गले तक पानी में डूबा हुआ है और अपने साथी दोस्तों के साथ पानी में अलग-अलग करतब करता हुआ नज़र आ रहा है। उनके लिए यह पानी बाढ़ से ज़्यादा एक मनोरंजक तालाब है जिसे शायद उन्होंने कभी नहीं देखा। शायद यही वजह है कि वह उसे देख जीभर करके उसका उपयोग कर रहे हैं और खुश हो रहे हैं। लोग इस दौरान अलग-अलग पोज़ में तस्वीरें भी खिंचवा रहे हैं उनकी याद के लिए।

कई जगहों पर पानी गुठनों तक तो कहीं कमर तक भरा हुआ है। लोग सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करते हुए नज़र आ रहे हैं। किसी को कोई रोकने या टोकने वाला भी नहीं है।

बात चाहें, बच्चों की हो या बुज़ुर्गों की, सब पानी को देखकर एक तरफ खुश है तो एक तरफ दुःखी भी हैं। रिक्शाचालक हो या ऑटो चालक, लोग उनकी सहायता से बाढ़ग्रस्त इलाकों को देखने जा रहे हैं मानों यह बाढ़ग्रस्त इलाका न हो बल्कि कोई टूरिस्ट प्लेस हो।

युमना के पानी में कई छोटे दुकानदारों की दुकानें डूब चुकी है। कारोबार चौपट हो चुका है। कमाई किये हुए दिन बीत गए हैं। लोगों से बात की तो वह भी यही कहते कि धंधा चौपट है क्या करें। घर भी पानी में समाया हुआ है। कमाई नहीं है  और ऊपर से इलाके में जमा हुआ गंदा पानी जो बीमारी को दावत दे रहा है।

इस तरफ न लोग सोच रहे हैं और न ही कोई और। नेटिज़न्स कहते हैं, लोग क्राइसिस में भी मज़ा ढूंढ़ ही लेते हैं और दिल्ली में भी इसी कहावत का स्वरूप नज़र आ रहा है। शायद लोग, आपदा को हंसकर-खेलकर गुज़ारने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि सब तो पानी में डूबा हुआ ही है। शोक मनाने से आपदा तो नहीं जायेगी पर शायद ख़ुशी से इसे निकाल देने से कुछ समय के लिए हिम्मत ज़रूर से बंध जायेगी पर सुरक्षा का सवाल वहीं का वहीं है। इस तरफ कौन देखेगा?

लोग कहेंगे, अरे! इतना तो लोगों को खुद भी समझ होनी चाहिए पर जो नासमझ बने उसका क्या? और जो नासमझ बनते आ रहे हैं उनका क्या?

फोटोज़ – संध्या (खबर लहरिया के लिए)

 

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