खबर लहरिया Blog Weather Update/Climate Change: दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश में मानसून में देरी, जानें 7 जुलाई तक कैसा रहेगा मौसम

Weather Update/Climate Change: दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश में मानसून में देरी, जानें 7 जुलाई तक कैसा रहेगा मौसम

इस साल उत्तर भारत में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में अभी तक गर्मी और लू से लोग परेशान हैं। जहां अब तक मानसून इन इलाकों में आ जाना चाहिए था वहां अभी तक तेज बारिश नहीं हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है जलवायु परिवतर्न। एक तरफ पहाड़ी और दक्षिणी इलाकों में तेज बारिश ने तबाही मचा रखी है वहीं दूसरी ओर लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। यह सिर्फ भारत की बात नहीं है गर्मी की चौंकाने वाली तस्वीरें यूरोप देश से सामने आई जहां सड़कें और रेड लाइट पिघलती हुई नज़र आई। 

भीषण गर्मी में लोगों हाल (फोटो साभार: खबर लहरिया)

उत्तर भारत में मानसून में देरी की वजह 

भारतीय मौसम विज्ञान के अनुसार इस साल मानसून आने में देरी हुई है। दिल्ली, एनसीआर इलाकों में 27 जून तक मानसून आ जाना चाहिए था लेकिन नहीं आ पाया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी का तापमान बढ़ने से मौसम के पुराने पैटर्न बदल रहे हैं। इसके कारण बारिश लाने वाले सिस्टम जैसे बंगाल की खाड़ी का कम दबाव क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) काफी कमजोर हो जाता है या देर से बनता है। जब यह सिस्टम सही समय पर मजबूत नहीं बनता, तो मानसून की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। 

जलवायु परिवर्तन की वजह से हवा और समुद्र का तापमान भी असंतुलित हो रहा है। इससे मानसून की हवाओं का समय और दिशा दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालाँकि आने वाले दो दिनों में मौसम में बदलाव की आशंका है। 

उतर प्रदेश मौसम अपडेट 

यूपी में आज 30 जून को कई जगहों पर बादल, हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएँ चलने की संभावना है। मौसम विभाग लखनऊ ने अगले 2–3 दिन में मानसून के आने की सम्भावना जताई है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। 

दिल्ली मौसम अपडेट 

दिल्ली-एनसीआर में इस समय तेज गर्मी और उमस से परेशान है लेकिन मौसम में भी हल्का बदलाव देखने को मिल रहा है। दिल्ली मौसम विभाग के अनुसार लोगों को गर्मी से जल्द राहत मिल सकती है। आज 30 जून को हल्की बारिश, धूलभरी आंधी और तेज हवाएं चल सकती हैं। 2 जुलाई के बाद से मानसून पूरी तरह सक्रिय होने की उम्मीद है। इससे तापमान में कमी आएगी और मौसम सुहावना हो जाएगा।

बिहार का मौसम अपडेट 

बिहार के कुछ इलाकों में मानसून ने कदम रख दिया है। कुछ इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है तो वहीं कैमूर, शेखपुरा और नालंदा समेत कई जिलों में कम बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अगले दो-तीन दिनों में मौसम विभाग की ओर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पटना मौसम विभाग के अनुसार 1 जुलाई से लेकर 7 जुलाई तक मानसून बिहार में पहुँच जायेगा। 

भीषण गर्मी से फ़्रांस में 1300 से अधिक मौतें 

भारत देश के अलावा भीषण गर्मी की तस्वीरें यूरोप देश से भी सामने आई जिसके आंकड़ें चौंकाने वाले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने यूरोप को पृथ्वी का सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया X पर जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता जताते हुए लिखा “यहाँ तापमान दुनिया के औसत से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहा है। अभी 13 करोड़ 50 लाख (150 मिलियन) लोग भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं, सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, स्कूल बंद हैं और बिजली ग्रिड पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ रहा है।

क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से आने वाली हीटवेव (लू) अब लगभग हर साल आ रही है।” 

उन्होंने बताया कि 21 जून के बाद से यूरोप में ज़्यादा तापमान की वजह से 1300 से ज़्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई है।

यूरोप में भीषण गर्मी के चलते पिघल रही सड़कें

बढ़ते तापमान की वजह जलवायु परिवर्तन 

बीबीसी की 19 फरवरी 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण विश्व के ग्लेशियर पहले से कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन में ग्लेशियर का पिघलना सबसे बड़ा कारण है।

ग्लेशियर (glaciers) क्या है?

बड़े बर्फ के पर्वत जिसे पर्वतीय ग्लेशियर कहा जाता है। बर्फ की जमी हुई नदियाँ दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए मीठे पानी के संसाधन के रूप में कार्य करते हैं। यदि वे पूरी तरह पिघल जाएं तो वैश्विक समुद्र-स्तर को 32 सेमी (13 इंच) तक बढ़ाने के लिए पर्याप्त पानी को रोकते हैं।

ग्लेशियर पिघलने की गति बढ़ती जा रही है। पिछले एक दशक में, ग्लेशियरों का नुकसान 2000-2011 की अवधि की तुलना में एक तिहाई से भी ज़्यादा रहा है। इसका असर पूरे विश्व में पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन को लेकर विषेशज्ञों का बयान

दैनिक जागरण की 16 जुलाई 2025 की रिपोर्ट में मौसम वैज्ञानिक समरजीत चौधरी कहते हैं कि मानसून की गतिविधियां काफी हद तक समुद्र की गतिविधियों पर निर्भर करती है। इसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम के पैटर्न (दोहराव) में भी बदलाव देखे जा रहे हैं। मानसून की असंतुलित बारिश के लिए हम जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार मान सकते हैं। सामान्य तौर पर मानसून उत्तर पश्चिमी बंगाल, गैंजेटिक प्लेन, पूर्वी उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली तक बारिश देता है। यदि वजह इस साल भी है। 

बढ़ते तापमान का लोगों पर असर 

जब गर्मी ज्यादा बढ़ जाती है, तो लोगों को दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। तेज धूप और गर्म हवाओं की वजह से शरीर जल्दी थक जाता है और कमजोरी महसूस होती है। कई लोगों को लू (हीट स्ट्रोक), सिरदर्द, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

गर्मी बढ़ने से रातें भी गर्म हो जाती हैं, जिससे अच्छी नींद नहीं आती। नींद पूरी न होने से अगले दिन काम करने की क्षमता कम हो जाती है और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर इसका असर ज्यादा होता है क्योंकि उनका शरीर तापमान को आसानी से सहन नहीं कर पाता।

इसके अलावा, पानी की खपत बढ़ जाती है और कई जगहों पर पानी की कमी भी महसूस होने लगती है। कुल मिलाकर, ज्यादा गर्मी लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों को प्रभावित करती है।

 

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