हर बदलते दौर के बीच सावन की यह परंपरा आज भी कायम है। प्रयागराज के इस मेले में बिकती हरी चूड़ियां सिर्फ कांच नहीं, बल्कि संस्कृति, यादें और मौसम की खुशबू अपने साथ लिए हुए हैं। प्रयागराज में लगे ग्राम शिल्प महोत्सव मेले में सावन की रौनक साफ दिखाई दे रही है। पूरे महीने चलने वाले इस मेले में सबसे ज्यादा भीड़ चूड़ी की दुकानों पर नजर आ रही है, जहां महिलाएं हरी चूड़ियां और हरे कंगन खरीदने पहुंच रही हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि सावन में हरी चूड़ियां पहनना सिर्फ एक सजावट नहीं, बल्कि पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। हरियाली से भरे इस मौसम में हरी चूड़ियां, हरी साड़ी और हरे कंगन शुभ माने जाते हैं।
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