देश की राजधानी दिल्ली में 10 से 13 अक्टूबर तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हुए। पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठन सड़कों पर उतरे। इसके बाद कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने भी इसी मुद्दे पर मार्च निकाला। इन प्रदर्शनों के बीच जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की खबर सामने आई।
CJP के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस का मार्च
10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कुछ छात्र संगठन जैसे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा, अध्यक्ष नेहा बोरा) समेत कुछ संगठनों ने SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालाँकि CJP के संस्थापक समेत उनके कुछ कार्यकर्ताओं को फ़्लाइट से ही हिरासत में ले लिया गया जिसके बाद अन्य युवाओं ने ही प्रदर्शन का जिम्मा उठा लिया। साथ ही आइसा छात्र संगठन, योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, दीपांकर भट्टाचार्य डटे रहे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच और जवाबदेही तय हो। पर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इसमें संगठनों के कार्यकर्ता और लीडरशिप भी शामिल थे।
इसके बाद 11 अक्टूबर को दोबारा आंदोलन शुरू किया लेकिन इसी दौरान प्रदर्शनकारियों को फिर से हिरासत में लिया गया।इस पूरे घटनाक्रम में एक और गंभीर बात सामने आई कि 11 अक्टूबर को प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कई पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें भी हिरासत में लेने की कोशिश की गई।
इसके अगले दिन 12 अक्टूबर को कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी इसी मुद्दे पर दिल्ली में मार्च निकाला। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेता इस मार्च में शामिल हुए। ‘चलो दिल्ली’ और लोकतंत्र बचाने की मांग के साथ निकाले गए इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों ने SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल भी उठाए।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलने का समय भी मांगा था। दोनों नेताओं ने पत्र लिखकर कहा कि वे चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं उनके सामने रखना चाहते हैं। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने उनसे मुलाकात करने से इनकार कर दिया।
राहुल गांधी द्वारा कहा गया था कि विपक्ष 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट जाएगा और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपेगा।
Yesterday, the nation’s young came out in Delhi to peacefully protest. They came with love in their hearts, not hatred or anger. They were beaten, both by cops and BJP goons.
This is not the India we want.
Tomorrow, we will march to the Supreme Court as Indians, united beyond party, gender, caste, community and state.
Youth, all opposition parties, civil society groups, all those who believe in democracy and stand by the Constitution of India, will walk with us.
We will submit a memorandum to the Chief Justice on behalf of the nation, demanding an end to vote chori, halting of SIR and the resignation of Gyanesh Kumar.
Narendra Modi, Amit Shah, Ajit Doval and Mohan Bhagwat cannot silence India’s voice. These cowards cannot intimidate us. They will have to step aside.
We will march together, with love, brotherhood and patriotism.
Daro mat.
Tomorrow, all of India will march to the Supreme Court.
कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफ़रत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा।
ऐसा भारत हम नहीं चाहते।
कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।
देश का युवा, तमाम विपक्षी दल, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले, भारत के संविधान के साथ खड़े सभी लोग हमारे साथ चलेंगे।
हम देश की ओर से मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपेंगे। हमारी माँग है – वोट चोरी बंद हो, SIR पर रोक लगे और ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें।
नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजित डोभाल और मोहन भागवत भारत की आवाज़ को दबा नहीं सकते। ये कायर हमें डरा नहीं सकते। इन्हें पीछे हटना ही होगा।
हम सब साथ चलेंगे – मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति के साथ।डरो मत।
कल पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा।
#ChaloDilli
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 11, 2026
CJP और कांग्रेस की मांगें कितनी एक जैसी हैं?
CJP और कांग्रेस के प्रदर्शनों का मुख्य मुद्दा एक ही है। दोनों ही SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के नाम हटने या मताधिकार प्रभावित होने की आशंका है। दोनों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।
हालांकि, दोनों के प्रदर्शन करने का तरीका अलग है। कांग्रेस एक प्रमुख राजनीतिक दल है और INDIA गठबंधन के साथ इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी स्तर पर उठा रही है। वहीं CJP सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। उसके साथ छात्र संगठनों और दूसरे प्रदर्शनकारियों ने भी विरोध दर्ज कराया है।
लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों के बीच अब संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी SIR के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। हरियाणा के करनाल में हुई बैठक में संगठन द्वारा फैसला लिया गया है कि 23 अक्टूबर को देशभर में जिला और तहसील स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। SKM ने SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को समर्थन देने की बात भी कही है।
इस तरह SIR को लेकर विरोध अब अलग-अलग संगठनों तक पहुंच रहा है। लेकिन इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष और मतदाता सूची में बदलाव से प्रभावित लोगों के अनुभव भी इस बहस का अहम हिस्सा हैं।
जंतर-मंतर का इतिहास: बड़े आंदोलनों की अहम जगह
दिल्ली का जंतर-मंतर सिर्फ एक सड़क या धरना स्थल नहीं रहा है। दरअसल बीते तीन दिनों के आंदोलन के दौरान ही अचानक एक खबर आई, कि जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है। साथ ही प्रदर्शन के लिए नई जगहों का नाम भी दिया गया है। रामलीला मैदान, बुराड़ी का मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी (CBD) ग्राउंड।
हालाँकि आज यानी 13 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले की सुनवाई होने वाली है।
देखा जाए तो दशकों से यह जगह लोगों के गुस्से, मांगों और सरकार के खिलाफ विरोध की आवाज का हिस्सा रही है। यहां राजनीतिक दलों के साथ किसान, छात्र, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और अलग-अलग अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन जुटते रहे हैं।
BBC में छपी एक लेख के अनुसार, 1960 के दशक के आखिरी वर्षों से लेकर 1980 के दशक तक दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए बोट क्लब एक प्रमुख जगह हुआ करता था। बाद में सुरक्षा और राजनीतिक कारणों से प्रदर्शनों को संसद और राजपथ के आसपास से दूसरी जगहों पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान जंतर-मंतर एक ऐसे स्थान के रूप में उभरा, जहां लोग संसद के करीब रहकर अपनी मांग उठा सकते थे।
31 जनवरी 2003 के दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश संख्या 309 का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने 2015 में लोकसभा को बताया था कि जंतर-मंतर पर पांच हजार से ज्यादा लोगों के जुटने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। वहां प्रदर्शनकारियों के वाहन लाने पर भी पाबंदी थी। इसके बावजूद यह जगह देश के कई बड़े आंदोलनों का केंद्र बनी रही।
जैसे जंतर-मंतर के प्रमुख आंदोलन –
- नर्मदा बचाओ आंदोलन – नर्मदा घाटी में बांधों के कारण विस्थापन और पुनर्वास के सवालों को लेकर आंदोलनकारियों ने दिल्ली में भी अपनी आवाज उठाई। यह आंदोलन आदिवासियों, किसानों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों से जुड़ा रहा।
- अन्ना हजारे का लोकपाल आंदोलन (2011) भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लोकपाल कानून की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन हुआ। दिल्ली में इस आंदोलन ने बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा और राजनीतिक बहस को प्रभावित किया।
- निर्भया मामले के बाद विरोध (2012) दिल्ली में एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा और यौन हिंसा के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए। दिल्ली के अलग-अलग स्थानों के साथ जंतर-मंतर भी विरोध की प्रमुख जगहों में शामिल रहा।
- वन रैंक, वन पेंशन आंदोलन (2015) – पूर्व सैनिकों ने अपनी पेंशन से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यह आंदोलन लंबे समय तक चला और जंतर-मंतर पर धरना देने वाले पूर्व सैनिकों की तस्वीरें चर्चा में रहीं।
- तमिलनाडु के किसानों का आंदोलन (2017) सूखा, कर्ज और किसानों की आर्थिक परेशानियों को लेकर तमिलनाडु के किसान दिल्ली पहुंचे। उन्होंने अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान खींचने के लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
- पहलवानों का आंदोलन (2023) भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। पहलवानों के धरने ने खेल संस्थाओं में जवाबदेही और महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा पर बहस खड़ी की।
- नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ आंदोलन – CAA और नागरिकता से जुड़े सवालों पर दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। जंतर-मंतर पर भी इस कानून के विरोध में लोग जुटे।
- अब इस जंतर-मंतर में CJP द्वारा किया गया प्रदर्शन भी इसमें शामिल हो सकता है।
प्रदर्शन का अधिकार और सार्वजनिक जगहों पर पाबंदियां
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले संगठनों की मांगें अलग-अलग रही हैं। किसी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, किसी ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों की बात की, तो किसी ने महिलाओं की सुरक्षा और नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए। इन आंदोलनों में एक बात समान रही लोग अपनी मांगों को सरकार और देश के सामने रखना चाहते थे।
अब जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले के बाद सवाल सिर्फ एक जगह का नहीं है। सवाल यह भी है कि अगर विरोध करने के लिए नई जगहें तय की जाती हैं, तो क्या वहां पहुंचकर लोग अपनी बात सरकार और आम लोगों तक पहुंचा पाएंगे?
जंतर-मंतर ऐसी जगह रही है जहां लोग अपनी मांगों को लेकर धरना देते थे। उनकी आवाज मीडिया से होते हुए सरकार तक पहुंचती थी। लेकिन अगर प्रदर्शन की जगह शहर से दूर कर दी जाए, तो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना कितना आसान रह जाएगा? इसका एक उदाहरण छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी देखने को मिलता है।
रायपुर में पहले बूढ़ा तालाब के पास धरना-प्रदर्शन होते थे। यह जगह शहर के मुख्य हिस्से में थी, जहां लोगों की आवाजाही रहती थी। लेकिन बाद में धरना स्थल को शहर से दूर नया रायपुर के तूता में शिफ्ट कर दिया गया। अब प्रदर्शन करने वालों को अपनी मांगें उठाने के लिए शहर से दूर जाना पड़ता है। ऐसी जगह पर आम लोगों की आवाजाही कम होने के कारण प्रदर्शन की बात भला कितने लोगों तक पहुंच पाएगी?
जब धरना स्थल ऐसी जगह पर हो जहां न आम लोगों की आवाजाही हो और न ही प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान देने वाले कोई लोग, तो फिर आंदोलन का असर कितना रह जाता है? कहीं ऐसा तो नहीं कि लोग अपनी बात कहने के लिए इकट्ठा तो होते हैं, लेकिन उनकी आवाज उन्हीं तक सीमित रह जाती है। आखिर विरोध प्रदर्शन का मकसद सिर्फ एक जगह इकट्ठा होना नहीं है। मकसद अपनी मांगों को लोगों और सरकार तक पहुंचाना भी है।
CJP के कार्यकर्ता फिर से हिरासत में
इसी बीच आज 13 अक्टूबर को CJP के कार्यकर्ता आशुतोष रांका, सौरभ और टीम के अन्य सदस्य जंतर मंतर पर अपना विरोध दिखाने पहुंचे। जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। CJP के प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, 12 अक्टूबर को पार्टी के प्रतिनिधि संसद मार्ग पुलिस थाने में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति और तारीख मांगने पहुंचे थे। इसी दिन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का आदेश सामने आया। इसके विरोध में 13 अक्टूबर की सुबह CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका, सौरव दास, राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और पार्टी के अन्य सदस्य तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
We are not going to bow down to your dictatorial orders! https://t.co/TZZVGxVEdb
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) October 13, 2026
CJP ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का हवाला देते हुए कहा कि लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार है।
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