खबर लहरिया Blog Anokha Mall : लखनऊ के ‘अनोखा मॉल’ से गरीब व्यक्ति मुफ्त में ले सकते हैं सर्दी के कपड़े

Anokha Mall : लखनऊ के ‘अनोखा मॉल’ से गरीब व्यक्ति मुफ्त में ले सकते हैं सर्दी के कपड़े

‘अनोखा मॉल’ राजधानी लखनऊ के रहीम नगर में है। इस अनोखे मॉल से गरीब तबके के लोग जैसे मज़दूर, रिक्शा चालक, बेघर लोग आदि मुफ़्त में सर्दी के कपड़े और जूते ले जा सकते हैं।

                                                                             सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार – सोशल मीडिया)

इस बार शीतलहर का प्रकोप ऐसा था कि हाड़-मांस तक कंपकपी छा गयी थी। ऐसे में आर्थिक रूप से सुदृढ़ परिवार तो हीटर व गर्म कपड़ों से अपने आपको बखूबी सुरक्षित रख रहे थे वहीं वे लोग जिनके पास यह सुविधा भी नहीं है, वह इस सर्दी को किसी न किसी तरह से झेलते हुए नज़र आये। क्यों, क्योंकि न तो उनके पास ऊनि कपड़े खरीदने के लिए उतने पैसे हैं और न ही उनके सिर पर आरामदायक छत है।

ऐसे में गरीब व्यक्तियों के लिए यूपी का एक मॉल सहायता का ज़रिया बना जहां से वे लोग ऊनि कपड़े, जूते, कंबल, जैकेट इत्यादि ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोई भुगतान करने की ज़रुरत नहीं है। अमूमन मॉल में बिक रही चीज़ों की कीमतें इतनी ज़्यादा होती है कि आम व्यक्ति के लिए मॉल से सामान खरीदना या सोचना भी बहुत दूर की बात होती है लेकिन इस मॉल में ऐसा कुछ नहीं है। हम बात कर रहे हैं, यूपी की राजधानी लखनऊ में बसे ‘अनोखा मॉल’ के बारे में।

‘अनोखा मॉल’ (Anokha Mall)  राजधानी लखनऊ के रहीम नगर (Raheem Nagar) में है। इस अनोखे मॉल से गरीब तबके के लोग जैसे मज़दूर, रिक्शा चालक, बेघर लोग आदि मुफ़्त में सर्दी के कपड़े और जूते ले जा सकते हैं।

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ज़रूरतमंदो के लिए खुलता है मॉल

अनोखा मॉल की ख़ासियत ये है कि ये मॉल हर साल दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीने में ज़रूरतमंद लोगों को ठंड से बचाने के लिए खुलता है। 5 सालों से इसकी यही प्रक्रिया रही है।

लोगों की मदद से चलता है मॉल

बता दें, इस नेक काम व मॉल को कई परोपकारी लोगों की मदद से चलाया जाता है। अनोखे मॉल की शुरुआत तकरीबन 5 साल पहले हुई थी। इसकी शुरुआत डॉ. अहमद रज़ा ख़ान (Dr. Ahmed Raza Khan) ने की थी। इस मॉल में लोग अपने हिसाब से गरीब लोगों के लिए कपड़े, स्कूल यूनिफ़ॉर्म, जूते आदि दान करके जाते हैं। इन्हीं चीज़ों को ज़रूरतमंद लोगों को मुफ्त में बांटा जाता है।

डॉ. अहमद रज़ा ख़ान बताते हैं, अनोखा मॉल को ज़रूतमंद लोगों को कड़ाके की ठंड बचाने के लिए खोला गया था। आगे बताया कि शरूआत में बहुत कम लोगों ने इस काम के लिए कपड़े दान किये लेकिन जैसे ही लोगों को इस मॉल के मकसद के बारे में पता चला तो दान देने वालों की कमी नहीं हुई। शुरू में उन्हें इसके संचालन में थोड़ी कठिनाई भी आई थी।

दान करने वालों का रखा जाता है रिकॉर्ड

डॉ. अहमद रज़ा ख़ान ने बताया कि दानदाताओं के साथ-साथ कपड़े लेने वालों का भी सही तरह से रिकॉर्ड रखा जाता है। आगे कहा, “ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद करने वाले मॉल का अनुचित लाभ न उठा सके। अतीत में, कुछ लोग यहां से कपड़े ले गए थे और उन्हें बाजार में बेच दिया था।”

वह बताते हैं कि अधिकतर दानदाता डॉक्टर्स हैं।

इसके आलावा वह यह भी सुनिश्चित करते हैं कि कपड़े साफ़ और पहनने योग्य हो।

4 कर्मचारियों की मदद से संचालित होता है मॉल

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. खान ने बताया, “मॉल चार कर्मचारी की सहायता से रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित किया जाता है। पिछले साल लगभग 3,000 से 4,000 लोगों ने मॉल से कपड़े लिए थे।”

लखनऊ का यह अनोखा मॉल, सच में नाम की तरह अनोखा है जो सही में ज़रूरतमंद लोगों की सहायता के लिए कार्य कर रहा है और उन लोगों तक मदद पहुंचा रहा है जिन्हें सच में मदद की ज़रूरत है।

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