बिहार की लहठी यानी लाख की चूड़ियां अपनी खूबसूरती और पारंपरिक कारीगरी के लिए मशहूर हैं। शादी-ब्याह से जुड़ी इस चूड़ी का बिहार की संस्कृति में खास स्थान है। मुजफ्फरपुर के इस्लामपुर लहठी बाजार और रामपुर बकरी की लहठी काफी प्रसिद्ध है। इस्लामपुर में दुकानदारों के लिए लहठी बनाने वाले कारीगर रामबाग में काम करते हैं, जहां करीब 600 छोटी-छोटी फैक्ट्रियों में लहठी बनाई जाती है। लेकिन इन खूबसूरत चूड़ियों के पीछे कारीगरों की मेहनत कितनी कठिन है? लाख को पिघलाने से लेकर उसे आकार देने और बारीक डिजाइन बनाने तक का काम आग के बीच होता है। थोड़ी सी चूक कारीगरों को जला सकती है। इसके बावजूद कारीगर एक दिन में करीब 500 से 600 रुपये तक ही कमा पाते हैं। इस पूरी कारीगरी में महिलाएं भी बराबर की भागीदार हैं। पुरुष लाख को आकार देते हैं, जबकि महिलाएं चूड़ियों पर फिनिशिंग, डिजाइन और नग की कारीगरी करती हैं। कई परिवार मिलकर इस पारंपरिक काम को आगे बढ़ा रहे हैं।
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