बरसात का मौसम आते ही तालाबों में खिले कमल जितने मनमोहक लगते हैं, उतने ही खास होते हैं उनके बीज यानी कमलगट्टे। बहुत से लोग कमलगट्टे को केवल पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली वस्तु मानते हैं, लेकिन ग्रामीण भारत में यह एक बेहद स्वादिष्ट मौसमी सब्जी भी है।
रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – सुचित्रा
कमल के बीजों की खासियत यह है कि यह स्वाद के साथ-साथ परंपरा और प्रकृति से भी जुड़ी हुई है। गांवों में लोग तालाबों से ताज़े कमलगट्टे निकालकर बड़े चाव से इसकी सब्जी बनाते हैं, जबकि शहरों में यही कमलगट्टा महंगे दामों पर बिकता है और लोग इसे शौक से खरीदकर अपने भोजन का हिस्सा बनाते हैं।
कमलगट्टा मुख्य रूप से जून से अक्टूबर के बीच ताज़ा मिलता है। इसी समय कमल के फल पकते हैं और उनसे ताज़े कमलगट्टे प्राप्त होते हैं। इसकी सब्जी दो तरह से बनाई जाती है—सूखी और तरी वाली। दोनों का स्वाद अलग होता है और दोनों ही बेहद लाजवाब लगती हैं। खासकर सूखी कमलगट्टे की सब्जी का स्वाद हल्के अचार जैसा होता है, जो खाने वालों को खूब पसंद आता है।
सामग्री
- 250 ग्राम ताज़ा कमलगट्टा
- 2 टमाटर (बारीक कटे हुए या प्यूरी)
- 1 प्याज (बारीक कटा हुआ)
- 1–2 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
- 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
- ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
- 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
- ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
- नमक स्वादानुसार
- 2 बड़े चम्मच तेल
- हरा धनिया सजाने के लिए
- चाहें तो ½ छोटा चम्मच जीरा
बनाने की विधि
सबसे पहले कमलगट्टे का ऊपर का कठोर छिलका हटाकर उसके बीज निकाल लें। यदि बीज बड़े हों तो उन्हें आधा काट लें। अब इन बीजों को 8 से 10 मिनट तक हल्का उबाल लें और पानी छानकर अलग रख दें।
एक कड़ाही में तेल गरम करें। यदि चाहें तो सबसे पहले जीरा डालें। इसके बाद प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च डालकर कुछ देर चलाएं। अब टमाटर डालें और मसाले को तब तक पकाएं जब तक तेल अलग न होने लगे।
इसके बाद हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह भूनें। अब उबले हुए कमलगट्टे डालकर मसाले में अच्छी तरह मिला लें।
यदि तरी वाली सब्जी बनानी हो तो आवश्यकता अनुसार थोड़ा पानी डालें और 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। यदि सूखी सब्जी बनानी हो तो पानी न डालें और मसाले में अच्छी तरह भूनते रहें।
सब्जी तैयार होने पर ऊपर से गरम मसाला और बारीक कटा हरा धनिया डालें। गरमा-गरम कमलगट्टे की सब्जी रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसें।
कमलगट्टा ही नहीं, कमल का हर हिस्सा है उपयोगी
कमलगट्टा केवल सब्जी तक ही सीमित नहीं है। इससे स्वादिष्ट मिठाइयाँ भी बनाई जाती हैं। कमल ककड़ी, जिसे कई क्षेत्रों में भसीढ़ा कहा जाता है, उसकी भी सब्जी बड़े स्वाद से खाई जाती है। वहीं कमल के पत्ते, जिन्हें कई जगह पुरइन के पत्ते कहा जाता है, उनसे पारंपरिक पत्तल तैयार किए जाते हैं। इस तरह कमल का लगभग हर हिस्सा किसी न किसी रूप में लोगों के काम आता है।
कमलगट्टे की सब्जी केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक खान-पान की एक जीवंत पहचान है। यदि आपने अभी तक इसका स्वाद नहीं चखा है, तो इस मौसम में एक बार जरूर बनाइए। हो सकता है यह मौसमी सब्जी आपकी पसंदीदा सब्जियों की लिस्ट में हमेशा के लिए शामिल हो जाए।
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