यह कहानी पन्ना जिले के कूडन गांव की रहने वाली हरबाई की कहानी है, जिनका घर केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण उजड़ गया। खबर लहरिया ने साल 2022 में उनके जीवन को रिकॉर्ड किया था। चार साल बाद, वही कैमरा उनके विस्थापन और संघर्ष का गवाह बना। हरबाई ने अपने गांव को बचाने के लिए चिता आंदोलन और धरनों में हिस्सा लिया, लेकिन आखिरकार उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। जिस घर में उन्होंने पूरी जिंदगी बिताई, आज वहां सिर्फ मलबा बचा है। इस सदमे ने उन्हें बीमार कर दिया। मुआवजे के बचे हुए पैसों से उन्होंने तारा गांव में थोड़ी-सी जमीन खरीदकर एक झोपड़ी बनाई है, लेकिन पुराना घर और उससे जुड़ी यादें आज भी उनका पीछा नहीं छोड़तीं। जब खबर लहरिया की टीम उनके साथ पुराने गांव पहुंची, तो उनकी आंखों में सिर्फ टूटे हुए घर का नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी के बिखर जाने का दर्द था। हरबाई की कहानी अकेली नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की कहानी है जो केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण अपने घर, जमीन और यादों से बिछड़ गए।
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