खबर लहरिया Hindi Jantar Mantar protest: जामिया मिलिया इस्लामिया के करीब 20 छात्रों को पुलिस ने पकड़ा, पुलिस ने कथित तौर पर की बदसलूकी

Jantar Mantar protest: जामिया मिलिया इस्लामिया के करीब 20 छात्रों को पुलिस ने पकड़ा, पुलिस ने कथित तौर पर की बदसलूकी

जामिया मिलिया इस्लामिया के कुछ छात्रों को दिल्ली पुलिस ने करीब 20 छात्रों को हिरासत में लिया। यह घटना कल 22 जुलाई की है जब छात्र जंतर-मंतर की ओर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे। तब दिल्ली पुलिस ने उन्हें निज़ामुद्दीन गोल चक्कर से उठाया। इसका वीडियो एक सोशल मीडिया पर भी दिखाया जा रहा है। छात्रों के अनुसार उन्हें जबरन ऑटो से उतार कर दिल्ली पुलिस ने उनके साथ बदसुलूकी की। इसके बाद छात्रों को बदरपुर पुलिस स्टेशन ले जाया गया और कुछ घंटों बाद रिहा कर दिया गया।

Jantar Mantar protest

20 जुलाई 2026 को हुए दिल्ली जंतर मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस पहले की तुलना में अधिक सतर्क हो गई है। जिस तरह से प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं उससे दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी तरह की तस्वीर कल 22 जुलाई को देखने को मिली जहां जामिया के छात्रों को जबरन रोका गया।

खबर लहरिया को प्राप्त ऑडियो में छात्रों ने अपने साथ हुई इस घटना को मौखिक रूप से बताया।

एक छात्र (जिनका नाम सुरक्षा कारणों से उजागर नहीं किया जा सकता) ने कहा कि “हर कोई व्यक्तिगत रूप से कहीं न कहीं जा रहा था। कुछ लोग जंतर मंतर भी जा रहे थे। पुलिस वाले हमें रोकते हैं। शक की निगाह पर हमें ऑटो से उतरने के लिए कहते हैं और अपनी डिटेल्स लिखने को कहते हैं। हमने डिटेल्स लिख दी उसके बाद भी हमें आगे नहीं जाने दे रहे। फिर इसके बाद दिल्ली पुलिस के दीपक सिंह (जो कि इंस्पेक्टर है) बतमीजी करना शुरू कर देते हैं, धमकाने लगते हैं। फिर बहस होने लगी हमने कहा किस आधार पर हमें पकड़ के ले जाओगे। उन्होंने एक ट्रैवलर (यात्रा वाली) बस बुलवाई। फिर मुझे गर्दन से पकड़ा और घसीट कर ले जाते हैं, मैं गिर जाता हूँ। बाकि लोग को भी डरना धमकाना करते हैं। फिर सब लोग बस में बैठ जाते हैं। एक लड़का है जिसने मेरी घसीटते हुए वीडियो बनाई थी उसे वीडियो डिलीट करने को कहा गया। पुलिस ने उसका फोन लिया और वो वीडियो डिलीट कर दी।

छात्र ने आगे कहा “फिर वो हमें कहते हैं कि बदरपुर पुलिस स्टेशन ले जायेंगे और तुम्हें छोड़ देंगे लेकिन ऐसा नहीं होता। वो हम से हमारी डिटेल्स पूछते हैं। हमें थाने में रोके रखते हैं फिर हम अपना वकील बुलाते हैं फिर डिटेल देते हैं। हमें दोपहर करीब 3 बजे दिल्ली पुलिस ने रोका था। हम 20 लोग थे जिसमे 2 नाबलिग थे। हमें शाम 7 बजे जाकर छोड़ते हैं।

पुलिस ने छात्रों को क्यों पकड़ा?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस का मानना था कि छात्र बिना अनुमति या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की आशंका के साथ प्रदर्शन के लिए जा रहे थे। इसी संदेह के आधार पर उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि कुछ घंटे बाद छोड़ दिया गया।

वहीं द क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार कुछ छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि बिना किसी कारण के छात्रों को रोका गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। इस छात्र संगठन में से एक AISA (छात्र संगठन) ने भी ये आरोप लगाया। इस संगठन ने कहा कि कुछ छात्रों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे एक छात्र को हल्की चोट आई। AISA ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जंतर मंतर प्रदर्शन

इस समय जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग के लिए प्रदर्शनकारी अभी तक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक मार्च निकालने की तैयारी थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठी चार्ज किया और आंसू गैस तक छोड़े। कई छात्रों और पुलिस कर्मियों को भी चोटें आई। नीचे दिए गए लिंक पर इस बारे में विस्तार से जान सकते हैं।

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यह मामला केवल छात्रों की हिरासत का नहीं बल्कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का भी है। एक ओर छात्र अपने मुद्दों को उठाने के लिए प्रदर्शन करना चाहते थे, वहीं पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है।

 

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