उत्तर प्रदेश के अयोध्या की कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार के समय लगभग वर्ष 2008 – 2010 के बीच आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और शहरी गरीबों के लिए कराया गया था। अयोध्या के चक्रतीर्थ (14 कोसी परिक्रमा मार्ग) स्थित कांशीराम आवासीय कॉलोनी भी इसी योजना के तहत विकसित की गई थी जिसमें कुल 220 आवास बनाए गए हैं –
रिपोर्ट – संगीता, लेखन – रचना
कॉलोनी की सुमित्रा दासी बताती हैं कि जब से कॉलोनी बनी है यानी वर्ष 2010 से तभी से वे यहां रह रही हैं और आज तक किसी नेता या मंत्री ने यहां के लोगों की समस्याओं के बारे में नहीं सोचा। “यहां साफ-सफाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता। कॉलोनी के आसपास हमेशा जलभराव रहता है। इसी रास्ते से होकर नेता और मंत्री अयोध्या मंदिर जाते हैं लेकिन कभी गरीबों के बीच आकर हमारे हालात जानने की कोशिश नहीं करते। यहां इतनी गंदगी रहती है कि हमेशा बदबू आती रहती है। सफाई के लिए कोई कर्मचारी तक दिखाई नहीं देता।”
सुमित्रा के अनुसार इस कॉलोनी में अधिकांश लोग अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों से हैं। यहां कोरी, निषाद, खटीक, धोबी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं इसी के साथ कुछ ब्राह्मण परिवार भी हैं जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं।
“सीवर डालने के लिए सड़क तोड़ दी, अब बारिश में रास्ता दलदल बन जाता है”
ब्लॉक नंबर-14 की निवासी निर्मला विश्वकर्मा के अनुसार इसी बीते मई महीने में सीवर लाइन डालने का काम शुरू हुआ। इसके लिए पहले से बनी आरसीसी सड़क को जेसीबी और रोलर की मदद से बीच से तोड़ दिया गया जिससे सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। अब जरा सी बारिश होते ही पूरा रास्ता दलदल बन जाता है। “ऐसा लगता है जैसे यहां इंसान नहीं जानवर रहते हों। प्रशासन को हमारी कोई चिंता नहीं है। उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। कई-कई महीनों तक कूड़ा नहीं उठाया जाता। बंदर और अन्य जानवर कूड़े को इधर-उधर फैला देते हैं। पूरे रास्ते में गंदगी बिखरी रहती है।”
निर्मला ने बताया कि वह भाजपा की महिला सचिव हैं और कई बार कॉलोनी की साफ-सफाई और अन्य समस्याओं को लेकर शिकायत कर चुकी हैं लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
“चुनाव के समय गरीब और दलित याद आते हैं”
इसके लिए वहां के ग्रामीण पूरी तरह से सरकार को इसका ज़िम्मेदार मानती है। स्थानीय निवासी भूपेंद्र का कहना है कि इस कॉलोनी को “मलिन बस्ती” समझकर नजरअंदाज किया जाता है। वे कहते हैं सिर्फ चुनाव के समय गरीब और दलित याद आते हैं। बाकी पांच साल तक कोई हाल-चाल पूछने नहीं आता। नगर निगम के कर्मचारियों से शिकायत करो तो सिर्फ इतना कहते हैं कि हो जाएगा लेकिन कोई जल्दी देखने नहीं आता। नालियों का पानी सड़क और घरों के आसपास भरा रहता है। नालियां अक्सर जाम रहती हैं और ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे यहां साल के बारहों महीने बाढ़ जैसी स्थिति बनी रहती है। रोज़मर्रे की स्थिति को बताते हुए कहते हैं कि बाहर से आने वाले रिश्तेदार यहां आते हैं तो नाक बंद करके गुजरते हैं। “हमारी मजबूरी है कि हमें यहीं रहना है। हर दिन इसी माहौल में उठना-बैठना होता है। अब तो ऐसी गंदगी में रहने की आदत सी पड़ गई है।”
गुंजा देवी समेत और ग्रामीणों का आरोप है कि कॉलोनी के ठीक सामने सड़क के उस पार श्रीराम के चारों भाइयों के बचपन से लेकर युवावस्था तक की मूर्तियों वाला संग्रहालय बना हुआ है। वहां रोज साफ-सफाई होती है और सड़कें चमकती रहती हैं। देश-विदेश से आने वाले लोग वहां पहुंचते हैं। लेकिन उनकी बस्ती की हालत जैसी की तैसी बनी हुई है। हालही में सरकार के लोगों द्वारा संग्रहालय का उद्घाटन भी किया गया लेकिन बस्ती के लिए कोई सुनवाई नहीं।
गुंजा देवी का कहना है कि यहां रहने वाले लोगों के पास इतना पैसा या पहुंच नहीं है कि वे अपनी समस्याओं का समाधान खुद कर सकें। “हम पूरा दिन मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पालते हैं। मायावती सरकार के समय जो आरसीसी सड़क और लाइट की व्यवस्था हुई थी वही आज तक चल रही है। उसके बाद कोई नया काम नहीं हुआ। उल्टा सीवर डालने के लिए बनी हुई सड़क भी उखाड़ दी गई। अब बारिश में पानी भर जाता है और रास्ते से निकलना मुश्किल हो जाता है।” उन्होंने कहा उनकी सिर्फ इतनी मांग है कि अगर नया काम नहीं कर सकते तो कम से कम जो बना हुआ है उसे खराब तो मत कीजिए।
इस मामले में नगर आयुक्त का क्या कहना है?
अयोध्या नगर निगम के नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार कांशीराम आवासीय कॉलोनी को लेकर कहते हैं कि कांशीराम आवासीय कॉलोनी में सीवर व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं का काम चल रहा है और यह कार्य अयोध्या की अमृत-2 योजना के तहत किया जा रहा है। फिलहाल इस परियोजना पर कुल कितना खर्च आएगा यह अभी बताना संभव नहीं है क्योंकि पूरे अयोध्या शहर में सीवर व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में नगर आयुक्त के अनुसार कॉलोनी की साफ-सफाई के लिए स्टाफ लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि बजट की कमी के कारण लंबे समय तक सीवर का काम शुरू नहीं हो सका था लेकिन मई के अंतिम सप्ताह से सीवर लाइन डालने का काम शुरू कर दिया गया है। ये भी बताया कि अभी नालों को सीवर लाइन से जोड़ने का काम जारी है। बरसात के दौरान जहां भी कीचड़ होगा या सीवर लाइन डालने के कारण जमीन धंसेगी वहां मरम्मत कराई जाएगी और उनके अनुसार सीवर लाइन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। अब केवल नालों का पानी उससे जोड़ना बाकी है। जैसे ही परियोजना पूरी होगी वर्षों से चली आ रही जलभराव और सीवर की समस्या का समाधान हो जाएगा।
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